अज़-ज़ारियात · 3/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
فَالْجَارِيَاتِ يُسْرًا ۝٣
Faljaariyaati yusraa
📖 हिंदी अर्थ
फिर आहिस्ता आहिस्ता चलती हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَالْجَارِيَاتِ: चलने वाली चीज़ें, यहाँ अर्थ है समुद्र में चलने वाले जहाज़।
  • يُسْرًا: आसानी और सहजता के साथ।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में समुद्र में चलने वाले जहाज़ों की क़सम खाई है, जो पानी की सतह पर आसानी और सहजता के साथ चलते हैं। ये जहाज़ अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) की निशानी हैं, जो उसके हुक्म से समुद्र की लहरों को चीरते हुए अपनी मंज़िल की ओर बढ़ते हैं। यह क़सम इसलिए खाई गई है ताकि इंसान अल्लाह की ताक़त और उसके इंतज़ाम पर ग़ौर करे।

यह आयत हमें सिखाती है कि जिस तरह जहाज़ समुद्र में अल्लाह के हुक्म से आसानी से चलते हैं, उसी तरह अल्लाह की तदबीर (योजना) से यह पूरी कायनात (ब्रह्मांड) चल रही है। जहाज़ों का चलना, हवा का चलना, बादलों का उठना — सब कुछ अल्लाह के इशारे पर होता है। यह हमारे लिए एक बड़ी निशानी है कि अल्लाह जिस चीज़ को चाहता है, उसे आसान बना देता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने जीवन के हर मामले में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जिस तरह जहाज़ को समुद्र में चलने के लिए हवा की ज़रूरत होती है, उसी तरह हमें अपनी ज़िंदगी की मुश्किलों को पार करने के लिए अल्लाह की मदद और रहमत की ज़रूरत है। अल्लाह ने जहाज़ों को समुद्र में आसानी से चलने की ताक़त दी है, और वही हमारे लिए भी हर मुश्किल को आसान कर सकता है।

यह आयत हमें यह भी याद दिलाती है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे हर चीज़ मुत्थी (विनम्र) है। जहाज़, समुद्र, हवा — सब अल्लाह के हुक्म के ताबेदार हैं। इसलिए हमें भी अपने रब के हुक्मों का पालन करना चाहिए और उसकी रहमत से उम्मीद रखनी चाहिए। जो लोग अल्लाह पर भरोसा करते हैं, अल्लाह उनके लिए हर मुश्किल को आसान कर देता है और उन्हें कामयाबी की राह दिखाता है।



📜 आयत 1-5 — सूरा अज़-ज़ारियात

1وَالذَّارِيَاتِ ذَرْوًا
उन (हवाओं की क़सम) जो (बादलों को) उड़ा कर तितर बितर कर देती हैं
2فَالْحَامِلَاتِ وِقْرًا
फिर (पानी का) बोझ उठाती हैं
3فَالْجَارِيَاتِ يُسْرًا
फिर आहिस्ता आहिस्ता चलती हैं
4فَالْمُقَسِّمَاتِ أَمْرًا
फिर एक ज़रूरी चीज़ (बारिश) को तक़सीम करती हैं
5إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌ
कि तुम से जो वायदा किया जाता है ज़रूर बिल्कुल सच्चा है
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 3

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Friday, October 2, 2026

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