अज़-ज़ारियात · 4/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
فَالْمُقَسِّمَاتِ أَمْرًا ۝٤
Falmuqassimaati amraa
📖 हिंदी अर्थ
फिर एक ज़रूरी चीज़ (बारिश) को तक़सीम करती हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَالْمُقَسِّمَاتِ: वितरण करने वाली (यहाँ अर्थ: फ़रिश्ते)।
  • أَمْرًا: अल्लाह के आदेश से (अर्थात् अल्लाह के हुक्म से विभिन्न कार्यों का प्रबंधन)।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन फ़रिश्तों की क़सम खाई है जो उसके आदेश से सृष्टि के विभिन्न मामलों को विभाजित और वितरित करते हैं। ये फ़रिश्ते अल्लाह के हुक्म से रिज़्क़ (आजीविका), बारिश, जीवन, मृत्यु, और अन्य सभी चीज़ों को उनके निर्धारित स्थानों तक पहुँचाते हैं। वे अल्लाह के आदेश के बिना कुछ भी नहीं करते, बल्कि पूर्ण रूप से उसकी आज्ञा के पाबंद हैं।

यह क़सम इसलिए खाई गई है ताकि इंसान उन शक्तियों पर ध्यान दे जो अल्लाह ने इस ब्रह्मांड में कार्यरत की हैं। जिस प्रकार ये फ़रिश्ते अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए हर कार्य को व्यवस्थित करते हैं, उसी प्रकार अल्लाह का वादा भी सत्य है कि वह सभी को जीवित करके उनके कर्मों का हिसाब लेगा। यह प्रणाली जो आज काम कर रही है, यह इस बात का प्रमाण है कि अल्लाह हर चीज़ पर पूर्ण शक्ति रखता है और वह जिसे चाहे जीवित कर सकता है।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि जिस प्रकार फ़रिश्ते अल्लाह के आदेश के आगे पूर्ण रूप से समर्पित हैं, हमें भी अपने जीवन को अल्लाह के आदेशों के अनुसार ढालना चाहिए। अल्लाह ने इस ब्रह्मांड की हर चीज़ को एक व्यवस्था के अधीन किया है, और यही व्यवस्था हमें उसकी महानता और शक्ति का एहसास कराती है। जब हम देखते हैं कि बारिश, रिज़्क़, और जीवन-मृत्यु सब कुछ अल्लाह के नियंत्रण में है, तो हमारा दिल उसकी ओर झुकता है और हम उसकी इबादत में लीन हो जाते हैं। यह आयत हमें यह भी याद दिलाती है कि अल्लाह का वादा (क़ियामत और हिसाब) अटल सत्य है, इसलिए हमें अपने कर्मों की जाँच करते रहना चाहिए और उसकी रहमत के साये में जीवन बिताना चाहिए।



📜 आयत 2-6 — अज़-ज़ारियात

2فَالْحَامِلَاتِ وِقْرًا
फिर (पानी का) बोझ उठाती हैं
3فَالْجَارِيَاتِ يُسْرًا
फिर आहिस्ता आहिस्ता चलती हैं
4فَالْمُقَسِّمَاتِ أَمْرًا
फिर एक ज़रूरी चीज़ (बारिश) को तक़सीम करती हैं
5إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌ
कि तुम से जो वायदा किया जाता है ज़रूर बिल्कुल सच्चा है
6وَإِنَّ الدِّينَ لَوَاقِعٌ
और (आमाल की) जज़ा (सज़ा) ज़रूर होगी
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मक्कीRevelation
4आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 4

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Tuesday, August 18, 2026

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