अज़-ज़ारियात · 44/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
فَعَتَوْا عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ ۝٤٤
Fa`ataw `an amri Rabbihim fa akhazal humus saa`iqatu wa hum yanzuroon
📖 हिंदी अर्थ
तो उन्होने अपने परवरदिगार के हुक्म से सरकशी की तो उन्हें एक रोज़ कड़क और बिजली ने ले डाला और देखते ही रह गए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَعَتَوْا – उन्होंने सरकशी और घमंड किया, अकड़ दिखाई।
  • الصَّاعِقَةُ – वह भयानक आज़ाब जो आसमान से आता है, हलाक करने वाली आवाज़ और बिजली का अज़ाब।
  • وَهُمْ يَنظُرُونَ – और वे उसे अपनी आँखों से देख रहे थे।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने क़ौमे-समूद (समूद की क़ौम) का ज़िक्र किया है, जिन्हें हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की दावत दी गई थी। उन्होंने अपने रब के हुक्म को ठुकरा दिया और सरकशी व घमंड में चूर होकर उस आदेश को मानने से इनकार कर दिया। उन्हें पहले से आगाह किया गया था कि अज़ाब आने वाला है, और उन्हें तीन दिन की मोहलत दी गई थी। लेकिन उन्होंने अपनी सरकशी और ज़िद पर अड़े रहे।

आख़िरकार अल्लाह का अज़ाब आ पहुँचा — एक भयानक सदमा, एक कड़कती हुई बिजली या आसमानी आज़ाब जिसने उन्हें अपनी लपेट में ले लिया। और यह सब कुछ उनके सामने हुआ, वे स्वयं देख रहे थे कि उनका अंजाम क्या हो रहा है। यह उनके लिए और भी बड़ी रुसवाई और इज़्ज़त की पस्ती का सबब बना — कि अज़ाब उन पर खुली आँखों से आया और उन्हें बचने का कोई मौक़ा न मिला।

इस आयत में हर उस इंसान के लिए बड़ी नसीहत है जो अल्लाह के हुक्म से सरकशी करता है और अपने नबी की दावत को ठुकराता है। याद रखिए, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। वह मोहलत देता है, मगर जब पकड़ता है, तो कोई नहीं बचा सकता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने रब के हुक्म के आगे सर झुकाएँ, उसकी इताअत करें और उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलें। यही हमारी कामयाबी और बचाव का ज़रिया है। अल्लाह तआला हमें हर उस चीज़ से बचाए जो उसके ग़ज़ब का सबब बनती है। आमीन।



📜 आयत 42-46 — अज़-ज़ारियात

42مَا تَذَرُ مِن شَيْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَالرَّمِيمِ
कि जिस चीज़ पर चलती उसको बोसीदा हडडी की तरह रेज़ा रेज़ा किए बग़ैर न छोड़ती
43وَفِي ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا حَتَّىٰ حِينٍ
और समूद (के हाल) में भी (क़ुदरत की निशानी) है जब उससे कहा गया कि एक ख़ास वक्त तक ख़ूब चैन कर लो
44فَعَتَوْا عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ
तो उन्होने अपने परवरदिगार के हुक्म से सरकशी की तो उन्हें एक रोज़ कड़क और बिजली ने ले डाला और देखते ही रह गए
45فَمَا اسْتَطَاعُوا مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا مُنتَصِرِينَ
फिर न वह उठने की ताक़त रखते थे और न बदला ही ले सकते थे
46وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
और (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर चुके थे) बेशक वह बदकार लोग थे
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
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अनुवाद — अज़-ज़ारियात 44

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Tuesday, August 18, 2026

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