अज़-ज़ारियात · 43/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
وَفِي ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا حَتَّىٰ حِينٍ ۝٤٣
Wa fee Samooda iz qeela lahum tamatta``oo hattaa heen
📖 हिंदी अर्थ
और समूद (के हाल) में भी (क़ुदरत की निशानी) है जब उससे कहा गया कि एक ख़ास वक्त तक ख़ूब चैन कर लो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ثَمُودَ (समूद): यह नबी सालिह अलैहिस्सलाम की क़ौम का नाम है।
  • تَمَتَّعُوا (तमत्तऊ): आनंद उठाओ, अपनी इच्छाओं को पूरा करो।
  • حَتَّىٰ حِينٍ (हत्ता हीन): एक निश्चित समय तक, यानी अपनी मृत्यु के समय तक।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला समूद की क़ौम के हालात से सबक़ लेने की बात बता रहे हैं। समूद वह क़ौम थी जो नबी सालिह अलैहिस्सलाम की उम्मत थी। जब उन्होंने अल्लाह के नबी को झुठलाया और उस चमत्कारिक ऊँटनी को काट डाला जो अल्लाह की तरफ से उनके लिए निशानी के रूप में आई थी, तो अल्लाह ने उन्हें आज़ाब (अज़ाब) की चेतावनी दी। उनसे कहा गया: "अपनी ज़िंदगी का आनंद ले लो, लेकिन यह मोहलत ज़्यादा दिनों की नहीं है — बस तीन दिनों तक।" यह उनके लिए एक आज़माइश और रहमत का आख़िरी मौक़ा था, लेकिन उन्होंने अपनी सरकशी और ज़िद पर अड़े रहना जारी रखा।

जब वे अपनी ख़ुशहाली और आराम में मगन थे, अचानक अल्लाह का अज़ाब आ पहुँचा — एक भयानक चीख़ (सैहा) ने उन्हें आ घेरा और वे सबके सब हलाक हो गए। यह वाक़िया उन लोगों के लिए एक बड़ी निशानी है जो अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं और उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहते हैं।

दावती पहलू (नसीहत):

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि दुनिया की ज़िंदगी चंद रोज़ की है। अल्लाह जब किसी को मोहलत देता है, तो यह उसकी रहमत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम ग़ाफ़िल हो जाएँ। समूद की क़ौम ने सोचा कि उन्हें जो समय मिला है वह हमेशा रहेगा, लेकिन अज़ाब अचानक आ गया। हमें चाहिए कि हर पल अल्लाह की इताअत में गुज़ारें, अपनी ज़िंदगी को नेकियों से भरें, और अल्लाह की रहमत और मग़फिरत के तलबगार रहें। याद रखें, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत भी बेपनाह है — जो कोई उसकी तरफ रुजू करे, उसे वह कभी निराश नहीं करता।



📜 आयत 41-45 — सूरा अज़-ज़ारियात

41وَفِي عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الرِّيحَ الْعَقِيمَ
और वह तो क़ाबिले मलामत काम करता ही था और आद की क़ौम (के हाल) में भी निशानी है हमने उन पर एक बे बरकत ऑंधी चलायी
42مَا تَذَرُ مِن شَيْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَالرَّمِيمِ
कि जिस चीज़ पर चलती उसको बोसीदा हडडी की तरह रेज़ा रेज़ा किए बग़ैर न छोड़ती
43وَفِي ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا حَتَّىٰ حِينٍ
और समूद (के हाल) में भी (क़ुदरत की निशानी) है जब उससे कहा गया कि एक ख़ास वक्त तक ख़ूब चैन कर लो
44فَعَتَوْا عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ
तो उन्होने अपने परवरदिगार के हुक्म से सरकशी की तो उन्हें एक रोज़ कड़क और बिजली ने ले डाला और देखते ही रह गए
45فَمَا اسْتَطَاعُوا مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا مُنتَصِرِينَ
फिर न वह उठने की ताक़त रखते थे और न बदला ही ले सकते थे
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
43आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 43

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Sunday, October 4, 2026

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