अज़-ज़ारियात · 45/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
فَمَا اسْتَطَاعُوا مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا مُنتَصِرِينَ ۝٤٥
Famas tataa`oo min qiyaaminw wa maa kaanoo muntasireen
📖 हिंदी अर्थ
फिर न वह उठने की ताक़त रखते थे और न बदला ही ले सकते थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَمَا اسْتَطَاعُوا مِن قِيَامٍ: वे उठने और खड़े होने की ताक़त न रख सके।
  • وَمَا كَانُوا مُنتَصِرِينَ: और वे अपनी रक्षा या बचाव करने वाले न बन सके।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह का अज़ाब (यातना) उन पर आ पहुँचा, तो वे न तो उससे भाग सके और न ही उठकर खड़े होने की शक्ति उनमें बची। वे इस क़दर बेबस और लाचार हो गए कि न उन्हें भागने का कोई रास्ता मिला और न ही अपनी जान बचाने का कोई ज़रिया। अल्लाह की पकड़ से बचने के लिए न उनमें कोई ताक़त थी और न ही कोई मददगार उन्हें बचा सका। यह उन लोगों का हाल था जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और हक़ को क़बूल करने से इनकार किया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जब वह किसी ज़ालिम क़ौम को पकड़ता है, तो उसके लिए बचने का कोई रास्ता नहीं होता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों का पालन करें, उसके रसूल की बताई हुई राह पर चलें और अपनी ज़िंदगी को गुनाहों से पाक रखें। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी ओर रुजू करते हैं, तौबा करते हैं और नेक काम करते हैं। अल्लाह हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी पकड़ से डरते हैं और उसकी रहमत के हक़दार बनते हैं। आमीन।



📜 आयत 43-47 — सूरा अज़-ज़ारियात

43وَفِي ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا حَتَّىٰ حِينٍ
और समूद (के हाल) में भी (क़ुदरत की निशानी) है जब उससे कहा गया कि एक ख़ास वक्त तक ख़ूब चैन कर लो
44فَعَتَوْا عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ
तो उन्होने अपने परवरदिगार के हुक्म से सरकशी की तो उन्हें एक रोज़ कड़क और बिजली ने ले डाला और देखते ही रह गए
45فَمَا اسْتَطَاعُوا مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا مُنتَصِرِينَ
फिर न वह उठने की ताक़त रखते थे और न बदला ही ले सकते थे
46وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ
और (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर चुके थे) बेशक वह बदकार लोग थे
47وَالسَّمَاءَ بَنَيْنَاهَا بِأَيْدٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ
और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
45आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 45

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Saturday, October 3, 2026

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