अज़-ज़ारियात · 52/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
كَذَٰلِكَ مَا أَتَى الَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُوا سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ ۝٥٢
Kazaalika maaa atal lazeena min qablihim mir Rasoolin illaa qaaloo saahirun aw majnoon
📖 हिंदी अर्थ
इसी तरह उनसे पहले लोगों के पास जो पैग़म्बर आता तो वह उसको जादूगर कहते या सिड़ी दीवाना (बताते)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَٰلِكَ: इसी प्रकार, ऐसे ही।
  • مَا أَتَى: नहीं आया।
  • الَّذِينَ مِن قَبْلِهِم: उनसे पहले के लोग (पिछली उम्मतें)।
  • مِّن رَّسُولٍ: कोई भी रसूल (पैगंबर)।
  • إِلَّا قَالُوا: उन्होंने यही कहा।
  • سَاحِرٌ: जादूगर।
  • مَجْنُونٌ: पागल, दीवाना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मक्का के काफिरों को दिलासा और नबी ﷺ को सांत्वना देती है। अल्लाह तआला फरमाता है कि ऐ नबी! जिस तरह आपकी कौम (कुरैश) आपको झुठला रही है और आपके बारे में कहती है कि आप जादूगर हैं या पागल हैं, यह कोई नई बात नहीं है। यही हाल पिछली उम्मतों का भी था। जब भी उनके पास कोई रसूल अल्लाह की तरफ से आया, तो उन्होंने उसे झुठलाया और उसके बारे में यही कहा कि वह जादूगर है या पागल है।

यानी यह अल्लाह की सुन्नत (कायदा) रही है कि नबियों को झुठलाया जाता रहा। हर ज़माने में नबी को जादूगर, पागल, शायर या झूठा कहा गया। यह उन लोगों का बहाना था जो सच्चाई को कबूल नहीं करना चाहते थे। जब उनके पास कोई सच्चा रसूल आया, तो उन्होंने उसकी बात को नज़रअंदाज़ करने के लिए यह आरोप लगाए।

इस आयत में अल्लाह तआला नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए फरमा रहे हैं कि आप अकेले नहीं हैं, आपसे पहले भी सभी नबियों को इसी तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ा। यह नबियों की परीक्षा का तरीका रहा है। लेकिन अंजाम हमेशा नबियों के हक में रहा और झुठलाने वालों का अंजाम बुरा हुआ। जिन लोगों ने रसूलों को झुठलाया, उन पर अल्लाह का अज़ाब आया और वे तबाह हो गए।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सच्चाई का रास्ता हमेशा कठिन होता है। जो लोग अल्लाह के दीन की तरफ बुलाते हैं, उन्हें तानों और आरोपों का सामना करना पड़ता है। लेकिन हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह अपने नबियों और उनके सच्चे पैरोकारों की मदद करता है। जैसे पिछली उम्मतों में सच्चे नबी आखिरकार कामयाब हुए, वैसे ही हमारे नबी ﷺ और उनकी उम्मत भी कामयाब होगी।

आज भी जब कोई इंसान सच्चाई की तरफ बुलाता है, तो लोग उसे पागल या जादूगर कहते हैं, लेकिन यह कोई नई बात नहीं। यह तो पुरानी रिवायत है। हमें चाहिए कि हम सच्चाई पर डटे रहें और अल्लाह पर भरोसा रखें। अल्लाह का वादा है कि वह अपने दीन की मदद करेगा और सच्चे लोगों को कामयाबी देगा। यह आयत हमें सब्र और सच्चाई पर क़ायम रहने की ताकत देती है।



📜 आयत 50-54 — अज़-ज़ारियात

50فَفِرُّوا إِلَى اللَّهِ ۖ إِنِّي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
तो ख़ुदा ही की तरफ़ भागो मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ
51وَلَا تَجْعَلُوا مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ ۖ إِنِّي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ
और ख़ुदा के साथ दूसरा माबूद न बनाओ मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ
52كَذَٰلِكَ مَا أَتَى الَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُوا سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ
इसी तरह उनसे पहले लोगों के पास जो पैग़म्बर आता तो वह उसको जादूगर कहते या सिड़ी दीवाना (बताते)
53أَتَوَاصَوْا بِهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ
ये लोग एक दूसरे को ऐसी बात की वसीयत करते आते हैं (नहीं) बल्कि ये लोग हैं ही सरकश
54فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَا أَنتَ بِمَلُومٍ
तो (ऐ रसूल) तुम इनसे मुँह फेर लो तुम पर तो कुछ इल्ज़ाम नहीं है
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीRevelation
52आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 52

सूरा अज़-ज़ारियात आयत 52 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसी तरह उनसे पहले लोगों के पास जो पैग़म्बर आता…

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Tuesday, August 18, 2026

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