अनुवाद — Tafsir
फिर उस दोनों (जिन्न और इंसान) के रब की कौन-कौन सी नेमतें हैं जिन्हें तुम दोनों झुठलाओगे?
इस आयत में अल्लाह तआला ने अपनी उन दो आँखों (चश्मों) का ज़िक्र किया है जो जन्नत के उन दो बाग़ों में होंगी, और वे आँखें पानी से उबलती हुई और बहती हुई होंगी, कभी न सूखने वाली। यह अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है कि उसने अपने नेक बंदों के लिए ऐसे बाग़ तैयार किए हैं जिनमें ये चश्मे हमेशा जारी रहेंगे।
अल्लाह तआला इस आयत में जिन्न और इंसान दोनों को संबोधित कर रहा है, क्योंकि यह सूरह (अर-रहमान) में यही अंदाज़ है कि अल्लाह अपनी नेमतें गिनाता है और फिर पूछता है कि "तुम दोनों इनमें से किस-किस नेमत को झुठलाओगे?" यह एक ऐसा सवाल है जो दिल को हिला देता है और इंसान को सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर हम उस रब की नेमतों को कैसे झुठला सकते हैं जिसने हमें पैदा किया, हमें रिज़्क़ दिया, हमें इस्लाम जैसा दीन दिया और हमें जन्नत की खुशखबरी सुनाई।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें इतनी ज़्यादा हैं कि उन्हें गिना नहीं जा सकता। हर साँस में, हर पल में, हर चीज़ में अल्लाह की नेमतें छिपी हुई हैं। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं, आसमान, ज़मीन, पानी, हवा, सूरज, चाँद, सब कुछ अल्लाह की रहमत का नतीजा है। इसलिए हमें चाहिए कि हम इन नेमतों का शुक्र अदा करें, उन्हें झुठलाने के बजाय उन्हें पहचानें और अल्लाह की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें।
यह आयत हमें यह भी याद दिलाती है कि क़यामत के दिन जब हम अल्लाह के सामने खड़े होंगे, तो हमसे हमारी नेमतों के बारे में पूछा जाएगा। इसलिए आज ही हमें अपने अमल को सुधारना चाहिए, अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल करना चाहिए और उसकी राह में खर्च करना चाहिए। अल्लाह की नेमतों का इनकार करना, उन्हें भूल जाना या उनका गलत इस्तेमाल करना बहुत बड़ी नाफ़रमानी है।
📜 आयत 65-69 — अर-रहमान
अनुवाद — अर-रहमान 67
सूरा अर-रहमान आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से…सूरा आयत 67/78 — अर-रहमान الرحمن (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रहमान सुनें, अर-रहमान अनुवाद, अर-रहमान mp3, अर-रहमान pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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