अल-मुजादिला · 3/22
अनुवाद उच्चारण — अल-मुजादिला
وَالَّذِينَ يُظَاهِرُونَ مِن نِّسَائِهِمْ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُوا فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ مِّن قَبْلِ أَن يَتَمَاسَّا ۚ ذَٰلِكُمْ تُوعَظُونَ بِهِ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ ۝٣
Wallazeena yuzaahiroona min nisaaa`ihim summa ya`oodoona limaa qaaloo fatabreeru raqabatim min qabli any-yatamaaassaa; zaalikum too`azoona bih; wallaahu bimaa ta`maloona khabeer
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग अपनी बीवियों से ज़हार कर बैठे फिर अपनी बात वापस लें तो दोनों के हमबिस्तर होने से पहले (कफ्फ़ारे में) एक ग़ुलाम का आज़ाद करना (ज़रूरी) है उसकी तुमको नसीहत की जाती है और तुम जो कुछ भी करते हो (ख़ुदा) उससे आगाह है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُظَاهِرُونَ مِن نِّسَائِهِمْ: अपनी पत्नियों को माँ कहकर उन पर हराम कर लेना (ज़िहार करना)।
  • ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُوا: फिर अपने उस कथन से पलटकर पत्नी से संभोग का इरादा करना।
  • فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ: एक गर्दन (ग़ुलाम या लौंडी) को आज़ाद करना।
  • يَتَمَاسَّا: एक-दूसरे को छूना, यानी संभोग करना।
  • تُوعَظُونَ بِهِ: इसके द्वारा तुम्हें नसीहत दी जाती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो ज़िहार करते हैं, यानी अपनी पत्नी को "माँ" कहकर उसे अपने ऊपर हराम कर लेते हैं। यह जाहिलियत का एक बुरा रिवाज था, जिसे इस्लाम ने सख्ती से मना किया। जब कोई व्यक्ति यह घृणित बात कह देता है, फिर पछताकर अपनी पत्नी के पास लौटना चाहता है और उससे संभोग का इरादा रखता है, तो उस पर यह कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) अनिवार्य है कि वह संभोग से पहले एक ग़ुलाम या लौंडी को आज़ाद करे। यह कफ़्फ़ारा इसलिए लगाया गया ताकि इंसान अपनी ज़ुबान से निकली बुरी बात की गंभीरता को समझे और भविष्य में ऐसी गलती न करे।

यह आदेश अल्लाह की ओर से एक सख्त नसीहत है, ताकि तुम लोग ज़िहार जैसे झूठ और बुरे काम से बचो। अल्लाह तआला हर उस चीज़ से पूरी तरह वाक़िफ है जो तुम करते हो, चाहे वह छिपी हो या खुली। वह तुम्हारे अच्छे और बुरे हर अमल का हिसाब लेगा और उसका बदला देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम ने औरतों की इज़्ज़त और उनके अधिकारों की कितनी बड़ी हिफाज़त की है। ज़िहार जैसी बुरी बात को इस्लाम ने मिटाकर उसकी सज़ा भी ऐसी रखी जो इंसान के दिल को नरम करे और उसे अल्लाह की तरफ लौटाए। ग़ुलाम आज़ाद करने का हुक्म देकर इस्लाम ने इंसानियत की भलाई का रास्ता दिखाया। हमें चाहिए कि अपनी ज़ुबान की हिफाज़त करें, क्योंकि एक बुरा शब्द इंसान को अल्लाह के गज़ब का हक़दार बना सकता है। अल्लाह हमें अपनी पत्नियों के साथ अच्छे अख़लाक़ और मुहब्बत से पेश आने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 1-5 — अल-मुजादिला

1قَدْ سَمِعَ اللَّهُ قَوْلَ الَّتِي تُجَادِلُكَ فِي زَوْجِهَا وَتَشْتَكِي إِلَى اللَّهِ وَاللَّهُ يَسْمَعُ تَحَاوُرَكُمَا ۚ إِنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ بَصِيرٌ
ऐ रसूल जो औरत (ख़ुला) तुमसे अपने शौहर (उस) के बारे में तुमसे झगड़ती और ख़ुदा से गिले शिकवे करती है ख़ुदा ने उसकी बात सुन ली और ख़ुदा तुम दोनों की ग़ुफ्तगू सुन रहा है बेशक ख़ुदा बड़ा सुनने वाला देखने वाला है
2الَّذِينَ يُظَاهِرُونَ مِنكُم مِّن نِّسَائِهِم مَّا هُنَّ أُمَّهَاتِهِمْ ۖ إِنْ أُمَّهَاتُهُمْ إِلَّا اللَّائِي وَلَدْنَهُمْ ۚ وَإِنَّهُمْ لَيَقُولُونَ مُنكَرًا مِّنَ الْقَوْلِ وَزُورًا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌ
तुम में से जो लोग अपनी बीवियों के साथ ज़हार करते हैं अपनी बीवी को माँ कहते हैं वह कुछ उनकी माएँ नहीं (हो जातीं) उनकी माएँ तो बस वही हैं जो उनको जनती हैं और वह बेशक एक नामाक़ूल और झूठी बात कहते हैं और ख़ुदा बेशक माफ करने वाला और बड़ा बख्शने वाला है
3وَالَّذِينَ يُظَاهِرُونَ مِن نِّسَائِهِمْ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا قَالُوا فَتَحْرِيرُ رَقَبَةٍ مِّن قَبْلِ أَن يَتَمَاسَّا ۚ ذَٰلِكُمْ تُوعَظُونَ بِهِ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
और जो लोग अपनी बीवियों से ज़हार कर बैठे फिर अपनी बात वापस लें तो दोनों के हमबिस्तर होने से पहले (कफ्फ़ारे में) एक ग़ुलाम का आज़ाद करना (ज़रूरी) है उसकी तुमको नसीहत की जाती है और तुम जो कुछ भी करते हो (ख़ुदा) उससे आगाह है
4فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ مِن قَبْلِ أَن يَتَمَاسَّا ۖ فَمَن لَّمْ يَسْتَطِعْ فَإِطْعَامُ سِتِّينَ مِسْكِينًا ۚ ذَٰلِكَ لِتُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ ۚ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ ۗ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ أَلِيمٌ
फिर जिसको ग़ुलाम न मिले तो दोनों की मुक़ारबत के क़ब्ल दो महीने के पै दर पै रोज़े रखें और जिसको इसकी भी क़ुदरत न हो साठ मोहताजों को खाना खिलाना फर्ज़ है ये (हुक्म इसलिए है) ताकि तुम ख़ुदा और उसके रसूल की (पैरवी) तसदीक़ करो और ये ख़ुदा की मुक़र्रर हदें हैं और काफ़िरों के लिए दर्दनाक अज़ाब है
5إِنَّ الَّذِينَ يُحَادُّونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ كُبِتُوا كَمَا كُبِتَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَقَدْ أَنزَلْنَا آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۚ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ مُّهِينٌ
बेशक जो लोग ख़ुदा की और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त करते हैं वह (उसी तरह) ज़लील किए जाएँगे जिस तरह उनके पहले लोग किए जा चुके हैं और हम तो अपनी साफ़ और सरीही आयतें नाज़िल कर चुके और काफिरों के लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है
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अनुवाद — अल-मुजादिला 3

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Tuesday, August 18, 2026

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