अल-अनआम · 11/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ ثُمَّ انظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّبِينَ ۝١١
Qul seeroo fil ardi summan zuroo kaifa kaana `aaqibatul mukazzibeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल उनसे) कहो कि ज़रुर रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (अम्बिया के) झुठलाने वालो का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • सीरू = चलो, सफ़र करो
  • फ़िल-अर्ज़ = धरती में
  • आक़िबत = अंजाम, परिणाम
  • अल-मुकज़्ज़िबीन = झुठलाने वाले, जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को नकारा

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुक़र्रिबीन (झुठलाने वालों) और मज़ाक उड़ाने वालों से कहिए कि ज़मीन पर चलो-फिरो और फिर ग़ौर से देखो कि उन लोगों का अंजाम क्या हुआ जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया था। वे लोग जो अपनी ताक़त, माल और ऐशो-आराम पर इतराते थे, जिन्होंने हक़ को नकारा और नबियों का मज़ाक उड़ाया — देखो कि अल्लाह ने उनके साथ क्या किया! उन्हें ज़िल्लत, बर्बादी और हलाकत में डाल दिया। उनके महल उजड़ गए, उनकी सल्तनतें तबाह हो गईं और उनके नाम तक मिट गए।

यह आयत हमें सोचने की दावत देती है कि इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें — आद, समूद, फ़िरऔन और नूह की क़ौम का क्या हुआ? ये सब ताक़तवर थे, लेकिन जब उन्होंने हक़ को झुठलाया, तो अल्लाह का अज़ाब आया और उन्हें जड़ से उखाड़ दिया।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम उन लोगों के अंजाम से सबक़ लें जिन्होंने अल्लाह के दीन को नकारा। यह सिर्फ़ एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक प्यार भरा इशारा है कि ऐ इंसान! तू अपनी आँखें खोल, इतिहास से सीख, और उस रास्ते पर चल जो अल्लाह ने दिखाया है। क्योंकि अल्लाह की रहमत उनके लिए है जो उसकी तरफ़ लौट आएं, और उसका अज़ाब उनके लिए है जो हक़ के सामने सर झुकाने से इनकार करें।

याद रखो, यह दुनिया किसी के लिए हमेशा नहीं रही। जो लोग आज हक़ का मज़ाक उड़ाते हैं, कल उनका अंजाम भी वही होगा जो पहले झुठलाने वालों का हुआ। लेकिन जो लोग अल्लाह की तरफ़ लौट आएं, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है — जहाँ हमेशा की ज़िंदगी है, जहाँ कोई ग़म नहीं, कोई डर नहीं। तो आओ, हम सब इस नसीहत को दिल से अपनाएं और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएं।



📜 आयत 9-13 — सूरा अल-अनआम

9وَلَوْ جَعَلْنَاهُ مَلَكًا لَّجَعَلْنَاهُ رَجُلًا وَلَلَبَسْنَا عَلَيْهِم مَّا يَلْبِسُونَ
और अगर हम फरिश्ते को नबी बनाते तो (आख़िर) उसको भी मर्द सूरत बनाते और जो शुबहे ये लोग कर रहे हैं वही शुबहे (गोया) हम ख़ुद उन पर (उस वक्त भी) उठा देते
10وَلَقَدِ اسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍ مِّن قَبْلِكَ فَحَاقَ بِالَّذِينَ سَخِرُوا مِنْهُم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
(ऐ रसूल तुम दिल तंग न हो) तुम से पहले (भी) पैग़म्बरों के साथ मसख़रापन किया गया है पस जो लोग मसख़रापन करते थे उनको उस अज़ाब ने जिसके ये लोग हॅसी उड़ाते थे घेर लिया
11قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ ثُمَّ انظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّبِينَ
(ऐ रसूल उनसे) कहो कि ज़रुर रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (अम्बिया के) झुठलाने वालो का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ
12قُل لِّمَن مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ قُل لِّلَّهِ ۚ كَتَبَ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۚ لَيَجْمَعَنَّكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ ۚ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि (भला) जो कुछ आसमान और ज़मीन में है किसका है (वह जवाब देगें) तुम ख़ुद कह दो कि ख़ास ख़ुदा का है उसने अपनी ज़ात पर मेहरबानी लाज़िम कर ली है वह तुम सब के सब को क़यामत के दिन जिसके आने मे कुछ शक़ नहीं ज़रुर जमा करेगा (मगर) जिन लोगों ने अपना आप नुक़सान किया वह तो (क़यामत पर) ईमान न लाएंगें
13۞ وَلَهُ مَا سَكَنَ فِي اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ ۚ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
हालॉकि (ये नहीं समझते कि) जो कुछ रात को और दिन को (रुए ज़मीन पर) रहता (सहता) है (सब) ख़ास उसी का है और वही (सब की) सुनता (और सब कुछ) जानता है
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
11आयत

अनुवाद — अल-अनआम 11

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Friday, October 2, 2026

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