अल-अनआम · 10/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَلَقَدِ اسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍ مِّن قَبْلِكَ فَحَاقَ بِالَّذِينَ سَخِرُوا مِنْهُم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ ۝١٠
Wa laqadis tuhzi`a bi-Rusulim min qablika fahaaqa billazeena sakhiroo minhum maa kaanoo bihee yastahzi`oon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल तुम दिल तंग न हो) तुम से पहले (भी) पैग़म्बरों के साथ मसख़रापन किया गया है पस जो लोग मसख़रापन करते थे उनको उस अज़ाब ने जिसके ये लोग हॅसी उड़ाते थे घेर लिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • اسْتُهْزِئَ: मज़ाक उड़ाया गया, उपहास किया गया।
  • فَحَاقَ: घेर लिया, आ घेरा (अर्थात् अज़ाब ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया)।
  • يَسْتَهْزِئُونَ: वे मज़ाक उड़ाते थे, उपहास करते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को सांत्वना देते हुए फ़रमाता है कि जिस प्रकार आपकी क़ौम के काफ़िर लोग आपका मज़ाक उड़ा रहे हैं और आप पर फ़रिश्ता उतारने जैसी माँगें करके आपको नीचा दिखाना चाहते हैं, यह कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी बहुत सी उम्मतों ने अपने नबियों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया। उन्होंने भी अपने रसूलों का उपहास किया और उनकी बातों को झुठलाया। लेकिन अल्लाह ने उन मज़ाक उड़ाने वालों को उनके किए की सज़ा दी। वह अज़ाब, जिसके आने की उन्हें धमकी दी जाती थी और जिसे वे मज़ाक समझकर टालते थे, आख़िरकार उन पर आ पड़ा और उन्हें चारों ओर से घेर लिया। उनका उपहास और इनकार उनके लिए विनाश का कारण बन गया। यह आयत नबी ﷺ को दिलासा देती है कि आपके साथ जो कुछ भी हो रहा है, वह पहले भी हो चुका है, और उसका अंजाम भी वही होगा जो पिछली उम्मतों का हुआ — अल्लाह की ओर से सज़ा और अपमान।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. नबियों का मज़ाक उड़ाना और उन्हें झुठलाना कोई नया काम नहीं है; यह पुराने काफ़िरों की आदत रही है। इससे पता चलता है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को हमेशा परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।
  2. अल्लाह की सज़ा में देरी हो सकती है, लेकिन वह कभी टलती नहीं। जो लोग दीन की बातों का मज़ाक उड़ाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है।
  3. यह आयत मुसलमानों को धैर्य और सब्र सिखाती है कि जब वे इस्लाम के लिए तकलीफ़ें झेलें, तो घबराएँ नहीं, क्योंकि अल्लाह हमेशा अपने नबियों की मदद करता है और उनके दुश्मनों को नीचा दिखाता है।
  4. इस आयत में उन लोगों के लिए चेतावनी है जो आज भी क़ुरआन और इस्लाम की शिक्षाओं का मज़ाक उड़ाते हैं — उन्हें समझ लेना चाहिए कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है।
  5. नबी ﷺ की स्थिति को देखकर हमें सीख मिलती है कि सत्य के प्रचार में रुकावटें आएँगी, लेकिन अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए।


📜 आयत 8-12 — अल-अनआम

8وَقَالُوا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْهِ مَلَكٌ ۖ وَلَوْ أَنزَلْنَا مَلَكًا لَّقُضِيَ الْأَمْرُ ثُمَّ لَا يُنظَرُونَ
और (ये भी) कहते कि उस (नबी) पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं नाज़िल किया गया (जो साथ साथ रहता) हालॉकि अगर हम फरिश्ता भेज देते तो (उनका) काम ही तमाम हो जाता (और) फिर उन्हें मोहलत भी न दी जाती
9وَلَوْ جَعَلْنَاهُ مَلَكًا لَّجَعَلْنَاهُ رَجُلًا وَلَلَبَسْنَا عَلَيْهِم مَّا يَلْبِسُونَ
और अगर हम फरिश्ते को नबी बनाते तो (आख़िर) उसको भी मर्द सूरत बनाते और जो शुबहे ये लोग कर रहे हैं वही शुबहे (गोया) हम ख़ुद उन पर (उस वक्त भी) उठा देते
10وَلَقَدِ اسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍ مِّن قَبْلِكَ فَحَاقَ بِالَّذِينَ سَخِرُوا مِنْهُم مَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
(ऐ रसूल तुम दिल तंग न हो) तुम से पहले (भी) पैग़म्बरों के साथ मसख़रापन किया गया है पस जो लोग मसख़रापन करते थे उनको उस अज़ाब ने जिसके ये लोग हॅसी उड़ाते थे घेर लिया
11قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ ثُمَّ انظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّبِينَ
(ऐ रसूल उनसे) कहो कि ज़रुर रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (अम्बिया के) झुठलाने वालो का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ
12قُل لِّمَن مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ قُل لِّلَّهِ ۚ كَتَبَ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۚ لَيَجْمَعَنَّكُمْ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ لَا رَيْبَ فِيهِ ۚ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ فَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि (भला) जो कुछ आसमान और ज़मीन में है किसका है (वह जवाब देगें) तुम ख़ुद कह दो कि ख़ास ख़ुदा का है उसने अपनी ज़ात पर मेहरबानी लाज़िम कर ली है वह तुम सब के सब को क़यामत के दिन जिसके आने मे कुछ शक़ नहीं ज़रुर जमा करेगा (मगर) जिन लोगों ने अपना आप नुक़सान किया वह तो (क़यामत पर) ईमान न लाएंगें
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अनुवाद — अल-अनआम 10

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Tuesday, August 18, 2026

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