Wa laqadis tuhzi`a bi-Rusulim min qablika fahaaqa billazeena sakhiroo minhum maa kaanoo bihee yastahzi`oon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल तुम दिल तंग न हो) तुम से पहले (भी) पैग़म्बरों के साथ मसख़रापन किया गया है पस जो लोग मसख़रापन करते थे उनको उस अज़ाब ने जिसके ये लोग हॅसी उड़ाते थे घेर लिया
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
اور تم سے پہلے بھی پیغمبروں کے ساتھ تمسخر ہوتے رہے ہیں سو جو لوگ ان میں سے تمسخر کیا کرتے تھے ان کو تمسخر کی سزا نے آگھیرا
فَحَاقَ: घेर लिया, आ घेरा (अर्थात् अज़ाब ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया)।
يَسْتَهْزِئُونَ: वे मज़ाक उड़ाते थे, उपहास करते थे।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को सांत्वना देते हुए फ़रमाता है कि जिस प्रकार आपकी क़ौम के काफ़िर लोग आपका मज़ाक उड़ा रहे हैं और आप पर फ़रिश्ता उतारने जैसी माँगें करके आपको नीचा दिखाना चाहते हैं, यह कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी बहुत सी उम्मतों ने अपने नबियों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया। उन्होंने भी अपने रसूलों का उपहास किया और उनकी बातों को झुठलाया। लेकिन अल्लाह ने उन मज़ाक उड़ाने वालों को उनके किए की सज़ा दी। वह अज़ाब, जिसके आने की उन्हें धमकी दी जाती थी और जिसे वे मज़ाक समझकर टालते थे, आख़िरकार उन पर आ पड़ा और उन्हें चारों ओर से घेर लिया। उनका उपहास और इनकार उनके लिए विनाश का कारण बन गया। यह आयत नबी ﷺ को दिलासा देती है कि आपके साथ जो कुछ भी हो रहा है, वह पहले भी हो चुका है, और उसका अंजाम भी वही होगा जो पिछली उम्मतों का हुआ — अल्लाह की ओर से सज़ा और अपमान।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
नबियों का मज़ाक उड़ाना और उन्हें झुठलाना कोई नया काम नहीं है; यह पुराने काफ़िरों की आदत रही है। इससे पता चलता है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को हमेशा परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।
अल्लाह की सज़ा में देरी हो सकती है, लेकिन वह कभी टलती नहीं। जो लोग दीन की बातों का मज़ाक उड़ाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है।
यह आयत मुसलमानों को धैर्य और सब्र सिखाती है कि जब वे इस्लाम के लिए तकलीफ़ें झेलें, तो घबराएँ नहीं, क्योंकि अल्लाह हमेशा अपने नबियों की मदद करता है और उनके दुश्मनों को नीचा दिखाता है।
इस आयत में उन लोगों के लिए चेतावनी है जो आज भी क़ुरआन और इस्लाम की शिक्षाओं का मज़ाक उड़ाते हैं — उन्हें समझ लेना चाहिए कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है।
नबी ﷺ की स्थिति को देखकर हमें सीख मिलती है कि सत्य के प्रचार में रुकावटें आएँगी, लेकिन अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए।
(ऐ रसूल तुम दिल तंग न हो) तुम से पहले (भी) पैग़म्बरों के साथ मसख़रापन किया गया है पस जो लोग मसख़रापन करते थे उनको उस अज़ाब ने जिसके ये लोग हॅसी उड़ाते थे घेर लिया
और (ये भी) कहते कि उस (नबी) पर कोई फरिश्ता क्यों नहीं नाज़िल किया गया (जो साथ साथ रहता) हालॉकि अगर हम फरिश्ता भेज देते तो (उनका) काम ही तमाम हो जाता (और) फिर उन्हें मोहलत भी न दी जाती
(ऐ रसूल तुम दिल तंग न हो) तुम से पहले (भी) पैग़म्बरों के साथ मसख़रापन किया गया है पस जो लोग मसख़रापन करते थे उनको उस अज़ाब ने जिसके ये लोग हॅसी उड़ाते थे घेर लिया
(ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि (भला) जो कुछ आसमान और ज़मीन में है किसका है (वह जवाब देगें) तुम ख़ुद कह दो कि ख़ास ख़ुदा का है उसने अपनी ज़ात पर मेहरबानी लाज़िम कर ली है वह तुम सब के सब को क़यामत के दिन जिसके आने मे कुछ शक़ नहीं ज़रुर जमा करेगा (मगर) जिन लोगों ने अपना आप नुक़सान किया वह तो (क़यामत पर) ईमान न लाएंगें
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।