Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- اسْتُهْزِئَ: मज़ाक उड़ाया गया, उपहास किया गया।
- فَحَاقَ: घेर लिया, आ घेरा (अर्थात् अज़ाब ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया)।
- يَسْتَهْزِئُونَ: वे मज़ाक उड़ाते थे, उपहास करते थे।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को सांत्वना देते हुए फ़रमाता है कि जिस प्रकार आपकी क़ौम के काफ़िर लोग आपका मज़ाक उड़ा रहे हैं और आप पर फ़रिश्ता उतारने जैसी माँगें करके आपको नीचा दिखाना चाहते हैं, यह कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी बहुत सी उम्मतों ने अपने नबियों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया। उन्होंने भी अपने रसूलों का उपहास किया और उनकी बातों को झुठलाया। लेकिन अल्लाह ने उन मज़ाक उड़ाने वालों को उनके किए की सज़ा दी। वह अज़ाब, जिसके आने की उन्हें धमकी दी जाती थी और जिसे वे मज़ाक समझकर टालते थे, आख़िरकार उन पर आ पड़ा और उन्हें चारों ओर से घेर लिया। उनका उपहास और इनकार उनके लिए विनाश का कारण बन गया। यह आयत नबी ﷺ को दिलासा देती है कि आपके साथ जो कुछ भी हो रहा है, वह पहले भी हो चुका है, और उसका अंजाम भी वही होगा जो पिछली उम्मतों का हुआ — अल्लाह की ओर से सज़ा और अपमान।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- नबियों का मज़ाक उड़ाना और उन्हें झुठलाना कोई नया काम नहीं है; यह पुराने काफ़िरों की आदत रही है। इससे पता चलता है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को हमेशा परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।
- अल्लाह की सज़ा में देरी हो सकती है, लेकिन वह कभी टलती नहीं। जो लोग दीन की बातों का मज़ाक उड़ाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है।
- यह आयत मुसलमानों को धैर्य और सब्र सिखाती है कि जब वे इस्लाम के लिए तकलीफ़ें झेलें, तो घबराएँ नहीं, क्योंकि अल्लाह हमेशा अपने नबियों की मदद करता है और उनके दुश्मनों को नीचा दिखाता है।
- इस आयत में उन लोगों के लिए चेतावनी है जो आज भी क़ुरआन और इस्लाम की शिक्षाओं का मज़ाक उड़ाते हैं — उन्हें समझ लेना चाहिए कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है।
- नबी ﷺ की स्थिति को देखकर हमें सीख मिलती है कि सत्य के प्रचार में रुकावटें आएँगी, लेकिन अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए।
📜 आयत 8-12 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 10
सूरा अल-अनआम आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल तुम दिल तंग न हो) तुम से पहले…सूरा आयत 10/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


