अल-अनआम · 34/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَلَقَدْ كُذِّبَتْ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ فَصَبَرُوا عَلَىٰ مَا كُذِّبُوا وَأُوذُوا حَتَّىٰ أَتَاهُمْ نَصْرُنَا ۚ وَلَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِ اللَّهِ ۚ وَلَقَدْ جَاءَكَ مِن نَّبَإِ الْمُرْسَلِينَ ۝٣٤
Wa laqad kuzzibat Rusulum min qablika fasabaroo `alaa maa kuzziboo wa oozoo hattaaa ataahum nasrunaa; wa laa mubaddila li Kalimaatil laah; wa laqad jaaa`aka min naba`il mursaleen
📖 हिंदी अर्थ
और (कुछ तुम ही पर नहीं) तुमसे पहले भी बहुतेरे रसूल झुठलाए जा चुके हैं तो उन्होनें अपने झुठलाए जाने और अज़ीयत (व तकलीफ) पर सब्र किया यहाँ तक कि हमारी मदद उनके पास आयी और (क्यों न आती) ख़ुदा की बातों का कोई बदलने वाला नहीं है और पैग़म्बर के हालात तो तुम्हारे पास पहुँच ही चुके हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كُذِّبَتْ – झुठलाया गया
  • فَصَبَرُوا – तो उन्होंने धैर्य रखा
  • أُوذُوا – उन्हें सताया गया / तकलीफ़ दी गई
  • نَصْرُنَا – हमारी मदद / विजय
  • لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِ اللَّهِ – अल्लाह की बातों (वादों) को बदलने वाला कोई नहीं
  • نَبَإِ الْمُرْسَلِينَ – पैग़म्बरों की ख़बरें / इतिहास

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ नबी! आप यह न समझें कि आपको झुठलाना कोई नई बात है। आपसे पहले भी अल्लाह के कई रसूलों को उनकी क़ौमों ने झुठलाया और उन्हें तरह-तरह की तकलीफ़ें दीं। मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, न ही वे अपने मिशन से डगमगाए। उन्होंने धैर्य और सब्र का दामन थामे रखा, अपनी दावत और जिहाद पर डटे रहे, यहाँ तक कि अल्लाह की मदद उनके पास आ पहुँची।

याद रखें, अल्लाह का वादा अटल है। उसने अपने रसूलों को विजय और सफलता का जो वादा दिया है, उसे कोई बदल नहीं सकता। अल्लाह की बातें और उसके फ़ैसले कभी नहीं बदलते। इसलिए आप भी निराश न हों, क्योंकि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी, चाहे देर हो।

और देखिए, अल्लाह ने आपको पिछले रसूलों की पूरी दास्तान से अवगत करा दिया है—कैसे उन्होंने सब्र किया, कैसे उन्हें सताया गया, और कैसे अल्लाह ने उन्हें विजय दी और उनके झुठलाने वालों को सज़ा दी। यह आपके लिए एक नमूना और सबक़ है।

दावत और नसीहत:

इस आयत में हमारे लिए भी बड़ी सीख है। जब हमारे साथ भी अच्छे कामों पर मुश्किलें आएँ, जब हमें झुठलाया जाए या तकलीफ़ दी जाए, तो हमें पैग़म्बरों के रास्ते पर चलना चाहिए—सब्र करना चाहिए, हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। अल्लाह का वादा है कि वह अपने नेक बंदों की मदद करता है। जो लोग अल्लाह की राह में सब्र करते हैं, उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से फ़तह और कामयाबी ज़रूर आती है। यही ईमान की निशानी है कि इंसान मुश्किलों में भी अल्लाह पर भरोसा रखे और उसकी मदद का यक़ीन रखे।

याद रखिए, अल्लाह का हर वादा सच्चा है। जो लोग उसके रास्ते पर चलते हैं, उन्हें कभी निराश नहीं होना चाहिए। पैग़म्बरों की सीरत हमारे लिए रोशनी है, और उनका सब्र हमारे लिए मिसाल है।



📜 आयत 32-36 — अल-अनआम

32وَمَا الْحَيَاةُ الدُّنْيَا إِلَّا لَعِبٌ وَلَهْوٌ ۖ وَلَلدَّارُ الْآخِرَةُ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ يَتَّقُونَ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
और (ये) दुनियावी ज़िन्दगी तो खेल तमाशे के सिवा कुछ भी नहीं और ये तो ज़ाहिर है कि आख़िरत का घर (बेहिश्त) परहेज़गारो के लिए उसके बदर वहॉ (कई गुना) बेहतर है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
33قَدْ نَعْلَمُ إِنَّهُ لَيَحْزُنُكَ الَّذِي يَقُولُونَ ۖ فَإِنَّهُمْ لَا يُكَذِّبُونَكَ وَلَٰكِنَّ الظَّالِمِينَ بِآيَاتِ اللَّهِ يَجْحَدُونَ
हम खूब जानते हैं कि उन लोगों की बकबक तुम को सदमा पहुँचाती है तो (तुम को समझना चाहिए कि) ये लोग तुम को नहीं झुठलाते बल्कि (ये) ज़ालिम (हक़ीक़तन) ख़ुदा की आयतों से इन्कार करते हैं
34وَلَقَدْ كُذِّبَتْ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ فَصَبَرُوا عَلَىٰ مَا كُذِّبُوا وَأُوذُوا حَتَّىٰ أَتَاهُمْ نَصْرُنَا ۚ وَلَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَاتِ اللَّهِ ۚ وَلَقَدْ جَاءَكَ مِن نَّبَإِ الْمُرْسَلِينَ
और (कुछ तुम ही पर नहीं) तुमसे पहले भी बहुतेरे रसूल झुठलाए जा चुके हैं तो उन्होनें अपने झुठलाए जाने और अज़ीयत (व तकलीफ) पर सब्र किया यहाँ तक कि हमारी मदद उनके पास आयी और (क्यों न आती) ख़ुदा की बातों का कोई बदलने वाला नहीं है और पैग़म्बर के हालात तो तुम्हारे पास पहुँच ही चुके हैं
35وَإِن كَانَ كَبُرَ عَلَيْكَ إِعْرَاضُهُمْ فَإِنِ اسْتَطَعْتَ أَن تَبْتَغِيَ نَفَقًا فِي الْأَرْضِ أَوْ سُلَّمًا فِي السَّمَاءِ فَتَأْتِيَهُم بِآيَةٍ ۚ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَجَمَعَهُمْ عَلَى الْهُدَىٰ ۚ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْجَاهِلِينَ
अगरचे उन लोगों की रदगिरदानी (मुँह फेरना) तुम पर शाक़ ज़रुर है (लेकिन) अगर तुम्हारा बस चले तो ज़मीन के अन्दर कोई सुरगं ढँढ निकालो या आसमान में सीढ़ी लगाओ और उन्हें कोई मौजिज़ा ला दिखाओ (तो ये भी कर देखो) अगर ख़ुदा चाहता तो उन सब को राहे रास्त पर इकट्ठा कर देता (मगर वह तो इम्तिहान करता है) बस (देखो) तुम हरगिज़ ज़ालिमों में (शामिल) न होना
36۞ إِنَّمَا يَسْتَجِيبُ الَّذِينَ يَسْمَعُونَ ۘ وَالْمَوْتَىٰ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ ثُمَّ إِلَيْهِ يُرْجَعُونَ
(तुम्हारा कहना तो) सिर्फ वही लोग मानते हैं जो (दिल से) सुनते हैं और मुर्दो को तो ख़ुदा क़यामत ही में उठाएगा फिर उसी की तरफ लौटाए जाएंगें
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अनुवाद — अल-अनआम 34

सूरा अल-अनआम आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (कुछ तुम ही पर नहीं) तुमसे पहले भी बहुतेरे…

सूरा आयत 34/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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