अल-अनआम · 73/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۖ وَيَوْمَ يَقُولُ كُن فَيَكُونُ ۚ قَوْلُهُ الْحَقُّ ۚ وَلَهُ الْمُلْكُ يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ ۚ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ ۝٧٣
Wa an Huwal lazee khalaqas samaawaati wal arda bilhaqq; wa Yawma yaqoolu kun fa yakoon; Qawluhul haqq; wa lahul mulku Yawma yunfakhu fis Soor; `Aalimul Ghaibi wash shahaadah; wa Huwal Hakeemul Khabeer
📖 हिंदी अर्थ
उसका क़ौल सच्चा है और जिस दिन सूर फूंका जाएगा (उस दिन) ख़ास उसी की बादशाहत होगी (वही) ग़ायब हाज़िर (सब) का जानने वाला है और वही दाना वाक़िफकार है

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अनुवाद — Tafsir

### معاني الكلمات

  • بِالْحَقِّ: अर्थात सत्य और उचित प्रयोजन के साथ, बिना किसी व्यर्थता के।
  • كُن فَيَكُونُ: अर्थात जब वह किसी चीज़ के होने का आदेश देता है, तो वह तुरंत हो जाती है।
  • الصُّورِ: वह सींग (नरसिंगा) जिसमें इसराफील (अलैहिस्सलाम) फूँक मारेंगे।
  • الْغَيْبِ: वह सब कुछ जो इंद्रियों से छिपा हो।
  • الشَّهَادَةِ: वह सब कुछ जो प्रत्यक्ष और देखा जा सके।

### تفسير الآية

यह अल्लाह ही है जिसने आकाशों और धरती को सत्य के साथ पैदा किया—यानी यह सृष्टि किसी खेल या व्यर्थता के लिए नहीं, बल्कि एक गंभीर उद्देश्य और योजना के तहत बनाई गई है। फिर अल्लाह उस दिन की याद दिलाता है जब वह कहेगा "हो जा", तो सब कुछ उसी क्षण हो जाएगा। उसका कथन पूर्ण सत्य है, उसमें कोई झूठ या विलंब नहीं। क़ियामत के दिन जब सींग (सूर) में फूँक मारी जाएगी, तो सारा राज्य केवल उसी का होगा—किसी राजा, शासक या ताकतवर का कोई अधिकार नहीं रहेगा। वही अल्लाह छिपे और खुले सब कुछ जानता है; उससे कोई भी बात, चाहे वह दिल में हो या बाहर, छिपी नहीं है। वह हिकमत वाला है—हर काम को उचित स्थान पर रखता है—और ख़बर रखने वाला है, जिसे हर चीज़ की पूरी जानकारी है, बाहरी और भीतरी दोनों।


### फ़ायदे (उपदेश)

  1. सृष्टि का उद्देश्य: यह आयत हमें सिखाती है कि यह दुनिया बेमक़सद नहीं बनाई गई; हर चीज़ में अल्लाह की हिकमत है। इससे इंसान को अपनी ज़िंदगी का मक़सद समझना चाहिए और अल्लाह की इबादत में लग जाना चाहिए।
  2. अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा: जब अल्लाह किसी चीज़ के लिए "हो जा" कहता है, तो वह तुरंत हो जाती है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं, इसलिए हमें हर मुसीबत में उसी से उम्मीद रखनी चाहिए।
  3. क़ियामत की याद: जिस दिन सूर में फूँक मारी जाएगी, सारी बादशाहत अल्लाह के सिवा किसी की नहीं होगी। यह हमें दुनिया के झूठे दंभ और घमंड से बचाता है और आख़िरत की तैयारी की प्रेरणा देता है।
  4. अल्लाह का इल्म: अल्लाह छिपे और खुले सब कुछ जानता है। यह विश्वास इंसान को अच्छे कामों पर स्थिर रखता है और बुरे कामों से रोकता है, क्योंकि वह जानता है कि अल्लाह सब देख रहा है।
  5. हिकमत और ख़बरदारी: अल्लाह हर काम हिकमत से करता है और उसे हर चीज़ की ख़बर है। इससे इंसान को अपने जीवन के हर फ़ैसले में अल्लाह की मरज़ी तलाश करनी चाहिए और उसके दीन की ओर रुजू करना चाहिए।


📜 आयत 71-75 — सूरा अल-अनआम

71قُلْ أَنَدْعُو مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُنَا وَلَا يَضُرُّنَا وَنُرَدُّ عَلَىٰ أَعْقَابِنَا بَعْدَ إِذْ هَدَانَا اللَّهُ كَالَّذِي اسْتَهْوَتْهُ الشَّيَاطِينُ فِي الْأَرْضِ حَيْرَانَ لَهُ أَصْحَابٌ يَدْعُونَهُ إِلَى الْهُدَى ائْتِنَا ۗ قُلْ إِنَّ هُدَى اللَّهِ هُوَ الْهُدَىٰ ۖ وَأُمِرْنَا لِنُسْلِمَ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ
और ये (भी हुक्म हुआ है) कि पाबन्दी से नमाज़ पढ़ा करो और उसी से डरते रहो और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसके हुज़ूर में तुम सब के सब हाज़िर किए जाओगे
72وَأَنْ أَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَاتَّقُوهُ ۚ وَهُوَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
वह तो वह (ख़ुदा है) जिसने ठीक ठीक बहुतेरे आसमान व ज़मीन पैदा किए और जिस दिन (किसी चीज़ को) कहता है कि हो जा तो (फौरन) हो जाती है
73وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۖ وَيَوْمَ يَقُولُ كُن فَيَكُونُ ۚ قَوْلُهُ الْحَقُّ ۚ وَلَهُ الْمُلْكُ يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ ۚ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ
उसका क़ौल सच्चा है और जिस दिन सूर फूंका जाएगा (उस दिन) ख़ास उसी की बादशाहत होगी (वही) ग़ायब हाज़िर (सब) का जानने वाला है और वही दाना वाक़िफकार है
74۞ وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ لِأَبِيهِ آزَرَ أَتَتَّخِذُ أَصْنَامًا آلِهَةً ۖ إِنِّي أَرَاكَ وَقَوْمَكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
(ऐ रसूल) उस वक्त क़ा याद करो) जब इबराहीम ने अपने (मुंह बोले) बाप आज़र से कहा क्या तुम बुतों को ख़ुदा मानते हो-मै तो तुमको और तुम्हारी क़ौम को खुली गुमराही में देखता हूँ
75وَكَذَٰلِكَ نُرِي إِبْرَاهِيمَ مَلَكُوتَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَلِيَكُونَ مِنَ الْمُوقِنِينَ
और (जिस तरह हमने इबराहीम को दिखाया था कि बुत क़ाबिले परसतिश (पूजने के क़ाबिल) नहीं) उसी तरह हम इबराहीम को सारे आसमान और ज़मीन की सल्तनत का (इन्तज़ाम) दिखाते रहे ताकि वह (हमारी वहदानियत का) यक़ीन करने वालों से हो जाएं
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
73आयत

अनुवाद — अल-अनआम 73

सूरा अल-अनआम आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उसका क़ौल सच्चा है और जिस दिन सूर फूंका जाएगा…

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Friday, October 2, 2026

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