अल-अनआम · 72/165
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनआम
وَأَنْ أَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَاتَّقُوهُ ۚ وَهُوَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ ۝٧٢
Wa an aqeemus Salaata wattaqooh; wa Hual lazeee ilaihi tuhsharoon
📖 हिंदी अर्थ
वह तो वह (ख़ुदा है) जिसने ठीक ठीक बहुतेरे आसमान व ज़मीन पैदा किए और जिस दिन (किसी चीज़ को) कहता है कि हो जा तो (फौरन) हो जाती है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَقِيمُوا الصَّلَاةَ: नमाज़ को उसके नियमों, शर्तों और अदब के साथ पूर्ण रूप से स्थापित करना।
  • وَاتَّقُوهُ: उस (अल्लाह) से डरना, यानी उसके आदेशों का पालन करना और उसकी मनाही से बचना।
  • تُحْشَرُونَ: तुम सब इकट्ठे किए जाओगे (क़ियामत के दिन)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने पैग़म्बरों (अलैहिमुस्सलाम) के ज़रिए और उनके अनुयायियों को यह आदेश दिया है कि वे नमाज़ को पूरी तरह से क़ायम करें—यानी उसे समय पर, उसके सभी रुक्न (अर्कान) और शर्तों के साथ, खुशू (विनम्रता) और खुज़ू (ध्यान) के साथ अदा करें। साथ ही, उन्हें तक़वा (अल्लाह का डर) अपनाने का हुक्म दिया गया है, जिसका मतलब है कि अल्लाह के हर आदेश का पालन किया जाए और हर उस चीज़ से बचा जाए जिससे उसने रोका है। यही सच्चा तक़वा है।

फिर अल्लाह तआला ने यह बताया कि वही अकेला है जिसकी ओर सभी प्राणियों को क़ियामत के दिन इकट्ठा किया जाएगा। उस दिन हर व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा। यह इकट्ठा होना अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) का प्रमाण है और यह भी प्रमाण है कि अंतिम फैसला सिर्फ उसी का है। इसलिए नमाज़ और तक़वा ही वे साधन हैं जो इंसान को उस दिन की मुश्किलों से बचा सकते हैं।

फ़ायदे (लाभ):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि नमाज़ और तक़वा (अल्लाह का डर) दो ऐसी चीज़ें हैं जो एक मुसलमान की ज़िंदगी को सीधा रखती हैं। नमाज़ इंसान को बुराई से रोकती है और तक़वा उसे अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) के करीब ले जाता है।
  2. यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी; एक दिन हम सबको अल्लाह के सामने हाज़िर होना है। यह विश्वास इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है और उसे अच्छे कामों की ओर प्रेरित करता है।
  3. इसमें इस बात की तसल्ली (सांत्वना) है कि अल्लाह न्याय करने वाला है; जो भी अच्छा काम करेगा उसे उसका बदला मिलेगा, और जो बुरा करेगा उसे उसकी सज़ा मिलेगी। यह इंसान को निराशा से बचाता है और उसे अच्छाई पर स्थिर रहने की ताक़त देता है।
  4. नमाज़ और तक़वा ही वे ज़रिए हैं जिनसे इंसान अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रहमत (दया) को अपनी ओर आकर्षित करता है, और यही दुनिया और आख़िरत की कामयाबी की कुंजी है।


📜 आयत 70-74 — सूरा अल-अनआम

70وَذَرِ الَّذِينَ اتَّخَذُوا دِينَهُمْ لَعِبًا وَلَهْوًا وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ وَذَكِّرْ بِهِ أَن تُبْسَلَ نَفْسٌ بِمَا كَسَبَتْ لَيْسَ لَهَا مِن دُونِ اللَّهِ وَلِيٌّ وَلَا شَفِيعٌ وَإِن تَعْدِلْ كُلَّ عَدْلٍ لَّا يُؤْخَذْ مِنْهَا ۗ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ أُبْسِلُوا بِمَا كَسَبُوا ۖ لَهُمْ شَرَابٌ مِّنْ حَمِيمٍ وَعَذَابٌ أَلِيمٌ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ
(ऐ रसूल) उनसे पूछो तो कि क्या हम लोग ख़ुदा को छोड़कर उन (माबूदों) से मुनाज़ात (दुआ) करे जो न तो हमें नफ़ा पहुंचा सकते हैं न हमारा कुछ बिगाड़ ही सकते हैं- और जब ख़ुदा हमारी हिदायत कर चुका) उसके बाद उल्टे पावँ कुफ्र की तरफ उस शख़्श की तरह फिर जाएं जिसे शैतानों ने जंगल में भटका दिया हो और वह हैरान (परेशान) हो (कि कहा जाए क्या करें) और उसके कुछ रफीक़ हो कि उसे राहे रास्त (सीधे रास्ते) की तरफ पुकारते रह जाएं कि (उधर) हमारे पास आओ और वह एक न सुने (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हिदायत तो बस ख़ुदा की हिदायत है और हमें तो हुक्म ही दिया गया है कि हम सारे जहॉन के परवरदिगार ख़ुदा के फरमाबरदार हैं
71قُلْ أَنَدْعُو مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُنَا وَلَا يَضُرُّنَا وَنُرَدُّ عَلَىٰ أَعْقَابِنَا بَعْدَ إِذْ هَدَانَا اللَّهُ كَالَّذِي اسْتَهْوَتْهُ الشَّيَاطِينُ فِي الْأَرْضِ حَيْرَانَ لَهُ أَصْحَابٌ يَدْعُونَهُ إِلَى الْهُدَى ائْتِنَا ۗ قُلْ إِنَّ هُدَى اللَّهِ هُوَ الْهُدَىٰ ۖ وَأُمِرْنَا لِنُسْلِمَ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ
और ये (भी हुक्म हुआ है) कि पाबन्दी से नमाज़ पढ़ा करो और उसी से डरते रहो और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसके हुज़ूर में तुम सब के सब हाज़िर किए जाओगे
72وَأَنْ أَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَاتَّقُوهُ ۚ وَهُوَ الَّذِي إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
वह तो वह (ख़ुदा है) जिसने ठीक ठीक बहुतेरे आसमान व ज़मीन पैदा किए और जिस दिन (किसी चीज़ को) कहता है कि हो जा तो (फौरन) हो जाती है
73وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۖ وَيَوْمَ يَقُولُ كُن فَيَكُونُ ۚ قَوْلُهُ الْحَقُّ ۚ وَلَهُ الْمُلْكُ يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ ۚ عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ ۚ وَهُوَ الْحَكِيمُ الْخَبِيرُ
उसका क़ौल सच्चा है और जिस दिन सूर फूंका जाएगा (उस दिन) ख़ास उसी की बादशाहत होगी (वही) ग़ायब हाज़िर (सब) का जानने वाला है और वही दाना वाक़िफकार है
74۞ وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ لِأَبِيهِ آزَرَ أَتَتَّخِذُ أَصْنَامًا آلِهَةً ۖ إِنِّي أَرَاكَ وَقَوْمَكَ فِي ضَلَالٍ مُّبِينٍ
(ऐ रसूल) उस वक्त क़ा याद करो) जब इबराहीम ने अपने (मुंह बोले) बाप आज़र से कहा क्या तुम बुतों को ख़ुदा मानते हो-मै तो तुमको और तुम्हारी क़ौम को खुली गुमराही में देखता हूँ
अल-अनआमकुरान सूची
165आयत
मक्कीअवतरण स्थान
72आयत

अनुवाद — अल-अनआम 72

सूरा अल-अनआम आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह तो वह (ख़ुदा है) जिसने ठीक ठीक बहुतेरे आसमान…

सूरा आयत 72/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए