Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- वज्जहतु: मैंने मुख किया, अपनी नियत और इबादत को एकाग्र किया।
- फ़तरा: पैदा किया, बनाया (बिना किसी पूर्व नमूने के)।
- हनीफ़न: एकेश्वरवाद की ओर झुका हुआ, शिर्क से बिल्कुल अलग, सीधे मार्ग पर चलने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह महान वाणी है हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की, जो उन्होंने अपनी क़ौम के सामने उस समय कही जब उन्होंने सितारों, चाँद और सूरज की पूजा को निरर्थक और मिथ्या सिद्ध कर दिया था। वे कहते हैं: "मैंने अपना मुख, अपनी नियत, अपनी इबादत और अपना पूरा वजूद उस हस्ती की ओर कर दिया है जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया है—बिना किसी सानी और बिना किसी मिसाल के। मैं शिर्क से हटकर पूर्ण एकेश्वरवाद (तौहीद) की ओर झुका हुआ हूँ, और मैं उन लोगों में से नहीं हूँ जो अल्लाह के साथ किसी और को साझीदार बनाते हैं।"
यह घोषणा केवल एक ऐतिहासिक बयान नहीं है, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक आदर्श है जो सच्चाई की तलाश में है। इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने जीवन के हर पड़ाव पर यही सबक सिखाया कि जो चीज़ें बदलती हैं, डूबती हैं, या ग़ायब हो जाती हैं, वे पूजा के योग्य नहीं हो सकतीं। सच्चा ख़ुदा वही है जो हर चीज़ का ख़ालिक़ (रचयिता) है, जो कभी नहीं बदलता और जिसकी कुदरत से यह पूरा निज़ाम चल रहा है।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है: हमारा रुख़ भी उसी अल्लाह की ओर होना चाहिए जिसने हमें पैदा किया, हमें रिज़्क़ दिया और हमें इस धरती पर अपना ख़लीफ़ा बनाया। जब हम अपने दिल को शिर्क की गंदगी से पाक करके सिर्फ़ अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित कर देते हैं, तो हमें एक अजीब सुकून और इत्मिनान मिलता है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई तक पहुँचाता है।
याद रखिए, यह घोषणा सिर्फ़ इब्राहीम अलैहिस्सलाम की नहीं थी, बल्कि हर मुसलमान की पहचान है। हमें भी दिल से कहना चाहिए: "मैंने अपना मुख उस ज़ात की ओर किया जिसने आसमान और ज़मीन पैदा किए, मैं शिर्क से अलग होकर तौहीद पर क़ायम हूँ, और मैं मुशरिकों में से नहीं हूँ।" यही वह कलिमा है जो हमें जहान के झूठे ख़ुदाओं से आज़ाद करती है और हमें सच्चे मालिक से जोड़ती है। जिसने इस सच्चाई को अपना लिया, उसने कामयाबी हासिल कर ली, और जो इससे मुँह मोड़ेगा, वह घाटे में रहेगा।
📜 आयत 77-81 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 79
सूरा अल-अनआम आयत 79 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये हरगिज़ नहीं हो सकते) मैने तो बातिल से कतराकर…सूरा आयत 79/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 77–81. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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