Wa haaajjahoo qawmuh; qaala a-tuh aaajjooonnnee fillaahi wa qad hadaan; wa laaa akhaafu mmaa tushrikoona bihee illaaa ai yashaaa`a Rabbee shai`anw wasi`a Rabbee kulla shai`in `ilman afalaa tatazakkaroon
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और उनकी क़ौम के लोग उनसे हुज्जत करने लगे तो इबराहीम ने कहा था क्या तुम मुझसे ख़ुदा के बारे में हुज्जत करते हो हालॉकि वह यक़ीनी मेरी हिदायत कर चुका और तुम मे जिन बुतों को उसका शरीक मानते हो मै उनसे डरता (वरता) नहीं (वह मेरा कुछ नहीं कर सकते) मगर हॉ मेरा ख़ुदा खुद (करना) चाहे तो अलबत्ता कर सकता है मेरा परवरदिगार तो बाएतबार इल्म के सब पर हावी है तो क्या उस पर भी तुम नसीहत नहीं मानते
🌐 Additional reference in اردو
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اور ان کی قوم ان سے بحث کرنے لگی تو انہوں نے کہا کہ تم مجھ سے خدا کے بارےمیں (کیا) بحث کرتے ہو اس نے تو مجھے سیدھا رستہ دکھا دیا ہے۔ اور جن چیزوں کو تم اس کا شریک بناتے ہو میں ان سے نہیں ڈرتا۔ ہاں جو میرا پروردگار چاہے۔ میرا پروردگار اپنے علم سے ہر چیز پر احاطہ کئے ہوئے ہے۔ کیا تم خیال نہیں کرتے۔
أَفَلَا تَتَذَكَّرُونَ = क्या तुम विचार नहीं करते?
तफ़सीर:
जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को एकेश्वरवाद (तौहीद) की ओर बुलाया और उनके मूर्तिपूजा के रास्ते को ग़लत बताया, तो उनकी क़ौम ने उनसे बहस और झगड़ा शुरू कर दिया। उन्होंने उन्हें उनके देवताओं के क्रोध और नुक़सान से डराने की कोशिश की। इस पर हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें जवाब दिया: "क्या तुम मुझसे अल्लाह के बारे में बहस करते हो, जबकि उसने मुझे सीधा रास्ता दिखा दिया है? मैं उन चीज़ों से बिल्कुल नहीं डरता जिन्हें तुम उसका साझी बनाते हो। ये मूर्तियाँ न तो मुझे नुक़सान पहुँचा सकती हैं और न ही फ़ायदा। हाँ, अगर मेरा रब कुछ चाहे, तो वही होगा, क्योंकि सारा मामला उसी के हाथ में है। मेरा रब अपने ज्ञान से हर चीज़ को घेरे हुए है — आसमान और ज़मीन की कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है। क्या तुम लोग इतना भी नहीं सोचते कि जो सच्चा मालिक और पूजा के योग्य है, वही अकेला अल्लाह है?"
फ़ायदे:
इस आयत से हमें कई महत्वपूर्ण शिक्षाएँ मिलती हैं:
सच्चाई पर दृढ़ रहना: हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अकेले होने के बावजूद सच्चाई पर डटे रहने का सबक दिया। हमें भी सच्चाई पर क़ायम रहना चाहिए, चाहे लोग कितना भी विरोध करें।
अल्लाह पर पूरा भरोसा: जब हमारा दिल अल्लाह पर भरोसा करता है, तो हमें किसी और का डर नहीं होता। अल्लाह ही सब कुछ कर सकता है, बाक़ी सब बेबस हैं।
ज्ञान की व्यापकता: अल्लाह का ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है। यह हमें यक़ीन दिलाता है कि हमारे साथ जो कुछ भी होता है, वह अल्लाह के इल्म और हिकमत के अनुसार होता है।
अक़्ल का इस्तेमाल: आयत हमें सोचने और विचार करने की तरफ़ बुलाती है। जो लोग अक़्ल से काम लेते हैं, वे सच्चाई को पहचान लेते हैं और मूर्तियों या झूठे देवताओं की पूजा से बच जाते हैं।
तौहीद की अहमियत: यह आयत इस्लाम के सबसे बुनियादी सिद्धांत — अल्लाह की एकता — की पुष्टि करती है और हमें सिखाती है कि सारी इबादत और भरोसा सिर्फ़ अल्लाह के लिए होना चाहिए।
और उनकी क़ौम के लोग उनसे हुज्जत करने लगे तो इबराहीम ने कहा था क्या तुम मुझसे ख़ुदा के बारे में हुज्जत करते हो हालॉकि वह यक़ीनी मेरी हिदायत कर चुका और तुम मे जिन बुतों को उसका शरीक मानते हो मै उनसे डरता (वरता) नहीं (वह मेरा कुछ नहीं कर सकते) मगर हॉ मेरा ख़ुदा खुद (करना) चाहे तो अलबत्ता कर सकता है मेरा परवरदिगार तो बाएतबार इल्म के सब पर हावी है तो क्या उस पर भी तुम नसीहत नहीं मानते
फिर जब आफताब को दमकता हुआ देखा तो कहने लगे (क्या) यही मेरा ख़ुदा है ये तो सबसे बड़ा (भी) है फिर जब ये भी ग़ुरुब हो गया तो कहने लगे ऐ मेरी क़ौम जिन जिन चीज़ों को तुम लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो उनसे मैं बेज़ार हूँ
और उनकी क़ौम के लोग उनसे हुज्जत करने लगे तो इबराहीम ने कहा था क्या तुम मुझसे ख़ुदा के बारे में हुज्जत करते हो हालॉकि वह यक़ीनी मेरी हिदायत कर चुका और तुम मे जिन बुतों को उसका शरीक मानते हो मै उनसे डरता (वरता) नहीं (वह मेरा कुछ नहीं कर सकते) मगर हॉ मेरा ख़ुदा खुद (करना) चाहे तो अलबत्ता कर सकता है मेरा परवरदिगार तो बाएतबार इल्म के सब पर हावी है तो क्या उस पर भी तुम नसीहत नहीं मानते
और जिन्हें तुम ख़ुदा का शरीक बताते हो मै उन से क्यों डरुँ जब तुम इस बात से नहीं डरते कि तुमने ख़ुदा का शरीक ऐसी चीज़ों को बनाया है जिनकी ख़ुदा ने कोई सनद तुम पर नहीं नाज़िल की फिर अगर तुम जानते हो तो (भला बताओ तो सही कि) हम दोनों फरीक़ (गिरोह) में अमन क़ायम रखने का ज्यादा हक़दार कौन है
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