Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- سلطانًا: प्रमाण, तर्क, या कोई ठोस दलील।
- अशरक्तुम: तुमने साझी ठहराया।
- अहक़्क़ु बिल-अम्न: सुरक्षा और शांति का अधिक हक़दार।
व्याख्या:
यह आयत हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की वह प्रसिद्ध बात है जो उन्होंने अपनी क़ौम के मुशरिकों से कही थी। वे उनसे फ़रमा रहे हैं: "मैं उन मूर्तियों से कैसे डरूँ जिन्हें तुमने अल्लाह का साझी बनाया है, जबकि उनमें न तो कोई नुक़सान पहुँचाने की ताक़त है और न ही फ़ायदा देने की? मेरा डर तो केवल अल्लाह से है, जो सच्चा ख़ालिक़ और मालिक है। लेकिन तुम लोग उस अल्लाह से नहीं डरते, जिसने तुम्हें पैदा किया और तुम्हारी इन मूर्तियों को भी, और तुमने उसके साथ उन चीज़ों को शरीक कर दिया जिनके लिए अल्लाह ने कोई सबूत या प्रमाण नाज़िल नहीं किया।"
फिर वे उनसे पूछते हैं: "अब तुम ख़ुद फ़ैसला करो—दो फ़िर्क़ों में से कौन सा फ़िर्क़ा सुरक्षा और शांति का अधिक हक़दार है? एक वह जो अकेले अल्लाह की इबादत करता है और उसी से डरता है, या वह जो अल्लाह के साथ दूसरों को शरीक करता है और उसकी नाराज़गी की परवाह नहीं करता? अगर तुम सच्चाई जानते हो तो बताओ।"
इस सवाल का जवाब ख़ुद-ब-ख़ुद साफ़ है—जो अल्लाह से डरता है और उसकी इबादत में किसी को शरीक नहीं करता, वही सच्ची सुरक्षा और अम्न का हक़दार है। मुशरिक लोग तो अपने शिर्क की वजह से अल्लाह के अज़ाब के सबसे ज़्यादा मुस्तहिक़ हैं।
फ़ायदे:
- सच्ची सुरक्षा अल्लाह की इबादत में है: जो इंसान अकेले अल्लाह से जुड़ जाता है और उसी पर भरोसा करता है, उसका दिल हर ख़तरे से महफ़ूज़ रहता है। अल्लाह की याद और उसकी इबादत ही असली अम्न का ज़रिया है।
- बिना प्रमाण के किसी चीज़ को मानना गुनाह है: इस आयत से सीख मिलती है कि दीन के मामलों में हमें बिना सबूत और प्रमाण के किसी चीज़ को नहीं अपनाना चाहिए। अल्लाह ने जो हुक्म दिया है, वही सच्चा रास्ता है।
- बहस में नर्मी और हिकमत: हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने मुशरिकों से प्यार और हिकमत के साथ बात की और उन्हें सोचने पर उकसाया। हमें भी दूसरों को समझाने के लिए नर्मी और अक़्लमंदी से काम लेना चाहिए।
- तौहीद ही असली निजात है: यह आयत तौहीद (अल्लाह की एकता) की अहमियत सिखाती है। जो इंसान तौहीद पर क़ायम रहता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में सुरक्षित रहता है।
📜 आयत 79-83 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 81
सूरा अल-अनआम आयत 81 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन्हें तुम ख़ुदा का शरीक बताते हो मै उन…सूरा आयत 81/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 79–83. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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