अल-आराफ · 129/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
قَالُوا أُوذِينَا مِن قَبْلِ أَن تَأْتِيَنَا وَمِن بَعْدِ مَا جِئْتَنَا ۚ قَالَ عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَن يُهْلِكَ عَدُوَّكُمْ وَيَسْتَخْلِفَكُمْ فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرَ كَيْفَ تَعْمَلُونَ ۝١٢٩
Qaaloo oozeenaa min qabli an taatiyanaa wa mim ba`di maa ji`tanaa; qaala `asaa Rabbukum ai yuhlika `aduwwakum wa yastakhli fakum fil ardi fayanzura kaifa ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
वह लोग कहने लगे कि (ऐ मूसा) तुम्हारे आने के क़ब्ल (पहले) ही से और तुम्हारे आने के बाद भी हम को तो बराबर तकलीफ ही पहुँच रही है (आख़िर कहाँ तक सब्र करें) मूसा ने कहा अनकरीब ही तुम्हारा परवरदिगार तुम्हारे दुश्मन को हलाक़ करेगा और तुम्हें (उसका जानशीन) बनाएगा फिर देखेगा कि तुम कैसा काम करते हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُوذِينَا: हमें सताया गया, हम पर अत्याचार किया गया।
  • يَسْتَخْلِفَكُمْ: वह तुम्हें उत्तराधिकारी बनाए, तुम्हें (उस भूमि का) स्वामी बनाए।
  • فَيَنظُرَ: फिर वह देखे (अर्थात तुम्हारे कर्मों को जाने और उसके अनुसार तुम्हें बदला दे)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को अल्लाह के दीन की ओर बुलाया और फ़िरऔन के अत्याचारों का सामना करना पड़ा, तो बनी इसराइल के लोगों ने मूसा (अलैहिस्सलाम) से शिकायत करते हुए कहा: "हे मूसा! हम तो पहले भी सताए जाते रहे हैं और अब भी सताए जा रहे हैं। तेरे आने से पहले फ़िरऔन हमारे बेटों को ज़िब्ह करता था और हमारी औरतों को ज़िंदा रखता था, और तेरे आने के बाद भी यही सिलसिला जारी है। हमें कोई राहत नहीं मिली।"

इस पर मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें धैर्य और आशा का पाठ पढ़ाते हुए कहा: "उम्मीद है कि तुम्हारा रब तुम्हारे दुश्मन (फ़िरऔन और उसकी क़ौम) को हलाक कर देगा और उनकी ज़मीन (मिस्र) का उत्तराधिकारी तुम्हें बना देगा। फिर वह देखेगा कि तुम उसके इन अहसानों के बाद कैसे अमल करते हो — क्या तुम शुक्र अदा करते हो या कुफ़्रान (नाशुक्री) करते हो।"

यह अल्लाह का वादा था, जो पूरा हुआ — फ़िरऔन को समुद्र में ग़रक़ कर दिया गया और बनी इसराइल को मिस्र की ज़मीन में बसाया गया। लेकिन बाद में उन्होंने बछड़े की पूजा करके नाशुक्री की, जिससे यह साबित हुआ कि अल्लाह उनके अमल को देख रहा था।

फ़ायदे (सबक):

  1. मुसीबत में धैर्य और आशा: मुसलमान को चाहिए कि कठिनाइयों में घबराए नहीं, बल्कि अल्लाह से राहत की उम्मीद रखे। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को यही सिखाया।
  2. अल्लाह का वादा सच्चा है: अल्लाह अपने नेक बंदों की मदद ज़रूर करता है, चाहे देर हो, लेकिन उसका फ़ैसला बेहतरीन होता है।
  3. अमल की परीक्षा: अल्लाह जब किसी को नेमत देता है, तो वह देखता है कि वह शुक्र करता है या कुफ़्र। यह हमारे लिए चेतावनी है कि नेमतें इम्तिहान हैं, सिर्फ़ इनाम नहीं।
  4. नाशुक्री का अंजाम: बनी इसराइल ने अल्लाह के एहसानों के बाद बछड़े की पूजा की, जो हमारे लिए सबक है कि अल्लाह की नेमतों का सही इस्तेमाल करें और उसकी इबादत में एकाग्र रहें।
  5. दुश्मन पर फ़तह अल्लाह के हाथ में है: किसी भी ज़ालिम की ताक़त अल्लाह के मुक़ाबले में कुछ नहीं। मुसलमान को अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही हलाक करने और इज़्ज़त देने वाला है।


📜 आयत 127-131 — सूरा अल-आराफ

127وَقَالَ الْمَلَأُ مِن قَوْمِ فِرْعَوْنَ أَتَذَرُ مُوسَىٰ وَقَوْمَهُ لِيُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ وَيَذَرَكَ وَآلِهَتَكَ ۚ قَالَ سَنُقَتِّلُ أَبْنَاءَهُمْ وَنَسْتَحْيِي نِسَاءَهُمْ وَإِنَّا فَوْقَهُمْ قَاهِرُونَ
और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले और फिरऔन की क़ौम के चन्द सरदारों ने (फिरऔन) से कहा कि क्या आप मूसा और उसकी क़ौम को उनकी हालत पर छोड़ देंगे कि मुल्क में फ़साद करते फिरे और आपके और आपके ख़ुदाओं (की परसतिश) को छोड़ बैठें- फिरऔन कहने लगा (तुम घबराओ नहीं) हम अनक़रीब ही उनके बेटों की क़त्ल करते हैं और उनकी औरतों को (लौन्डियॉ बनाने के वास्ते) जिन्दा रखते हैं और हम तो उन पर हर तरह क़ाबू रखते हैं
128قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ اسْتَعِينُوا بِاللَّهِ وَاصْبِرُوا ۖ إِنَّ الْأَرْضَ لِلَّهِ يُورِثُهَا مَن يَشَاءُ مِنْ عِبَادِهِ ۖ وَالْعَاقِبَةُ لِلْمُتَّقِينَ
(ये सुनकर) मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि (भाइयों) ख़ुदा से मदद माँगों और सब्र करो सारी ज़मीन तो ख़ुदा ही की है वह अपने बन्दों में जिसकी चाहे उसका वारिस (व मालिक) बनाए और ख़ातमा बिल ख़ैर तो सब परहेज़गार ही का है
129قَالُوا أُوذِينَا مِن قَبْلِ أَن تَأْتِيَنَا وَمِن بَعْدِ مَا جِئْتَنَا ۚ قَالَ عَسَىٰ رَبُّكُمْ أَن يُهْلِكَ عَدُوَّكُمْ وَيَسْتَخْلِفَكُمْ فِي الْأَرْضِ فَيَنظُرَ كَيْفَ تَعْمَلُونَ
वह लोग कहने लगे कि (ऐ मूसा) तुम्हारे आने के क़ब्ल (पहले) ही से और तुम्हारे आने के बाद भी हम को तो बराबर तकलीफ ही पहुँच रही है (आख़िर कहाँ तक सब्र करें) मूसा ने कहा अनकरीब ही तुम्हारा परवरदिगार तुम्हारे दुश्मन को हलाक़ करेगा और तुम्हें (उसका जानशीन) बनाएगा फिर देखेगा कि तुम कैसा काम करते हो
130وَلَقَدْ أَخَذْنَا آلَ فِرْعَوْنَ بِالسِّنِينَ وَنَقْصٍ مِّنَ الثَّمَرَاتِ لَعَلَّهُمْ يَذَّكَّرُونَ
और बेशक हमने फिरऔन के लोगों को बरसों से कहत और फलों की कम पैदावार (के अज़ाब) में गिरफ्तार किया ताकि वह इबरत हासिल करें
131فَإِذَا جَاءَتْهُمُ الْحَسَنَةُ قَالُوا لَنَا هَٰذِهِ ۖ وَإِن تُصِبْهُمْ سَيِّئَةٌ يَطَّيَّرُوا بِمُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُ ۗ أَلَا إِنَّمَا طَائِرُهُمْ عِندَ اللَّهِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
तो जब उन्हें कोई राहत मिलती तो कहने लगते कि ये तो हमारे लिए सज़ावार ही है और जब उन्हें कोई मुसीबत पहुँचती तो मूसा और उनके साथियों की बदशुगूनी समझते देखो उनकी बदशुगूनी तो ख़ुदा के हा (लिखी जा चुकी) थी मगर बहुतेरे लोग नही जानते हैं
अल-आराफकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
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अनुवाद — अल-आराफ 129

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Monday, September 28, 2026

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