अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- اسْتَعِينُوا: मदद माँगो, सहायता चाहो।
- وَاصْبِرُوا: धैर्य रखो, सब्र करो।
- يُورِثُهَا: उसे (ज़मीन को) देता है, वारिस बनाता है।
- الْعَاقِبَةُ: अंतिम परिणाम, अच्छा अंजाम।
- الْمُتَّقِينَ: परहेज़गार, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसकी मनाही से बचें।
तफ़सीर:
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम (बनी इसराइल) को नसीहत करते हुए कहा कि जब फ़िरऔन का ज़ुल्म और सितम तुम पर बढ़ गया है, और उसने तुम्हारे बेटों को क़त्ल करना और तुम्हारी बेटियों को ज़िंदा रखना शुरू कर दिया है, तो इस मुश्किल घड़ी में तुम्हें अल्लाह ही से मदद माँगनी चाहिए। उसी पर भरोसा रखो और उसी से सब्र की ताक़त माँगो। धैर्य और अल्लाह पर भरोसा ही वह ज़रिया है जिसके ज़रिए तुम इस आज़माइश पर क़ाबू पा सकते हो।
फिर हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें यक़ीन दिलाया कि यह ज़मीन (मिस्र की सरज़मीन) असल में अल्लाह की मिल्कियत है, न कि फ़िरऔन की। अल्लाह जिसे चाहता है, अपने बंदों में से इसका वारिस बनाता है। फ़िरऔन की सल्तनत और उसका ज़ुल्म कोई स्थायी चीज़ नहीं है, बल्कि यह बदलने वाली है। अल्लाह की मर्ज़ी के बग़ैर कोई भी हाकिम ज़मीन पर हुकूमत नहीं कर सकता। जब अल्लाह चाहेगा, वह इस ज़मीन को ज़ालिमों से छीनकर मज़लूमों और नेक लोगों को दे देगा।
और सबसे अहम बात यह है कि आख़िरी कामयाबी और अच्छा अंजाम (बेहतरीन नतीजा) उन्हीं लोगों के लिए है जो अल्लाह से डरते हैं, उसके आदेशों का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं। यह एक वादा है अल्लाह की तरफ़ से उन लोगों के लिए जो सब्र और तक़वा (परहेज़गारी) का रास्ता अपनाते हैं। चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, चाहे ज़ुल्म कितना भी बढ़ जाए, लेकिन अल्लाह का वादा सच्चा है कि आख़िरकार जीत उन्हीं की होगी जो अल्लाह के मुतक़ी (परहेज़गार) बंदे होंगे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन में जब भी मुश्किलें आएँ, जब ज़ुल्म और सितम की अंधेरी रातें छाई हों, तो हमें अल्लाह की तरफ़ रुजू करना चाहिए। सब्र और अल्लाह पर भरोसा ही वह चाबी है जो हर बंद दरवाज़े को खोल देती है। यह भी याद रखें कि यह ज़मीन अल्लाह की है, और वह जिसे चाहे उसे दे देता है। ज़ालिम चाहे कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, उसकी हुकूमत हमेशा के लिए नहीं रहेगी। अल्लाह का वादा है कि अच्छा अंजाम उन्हीं का है जो उससे डरते हैं और नेक काम करते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में तक़वा (अल्लाह का ख़ौफ़) अपनाएँ, सब्र करें और अल्लाह से मदद माँगते रहें — यही कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 126-130 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 128
सूरा अल-आराफ आयत 128 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये सुनकर) मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि (भाइयों)…सूरा आयत 128/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 126–130. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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