Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاعَدْنَا: हमने वादा किया।
- مِيقَاتَ: निर्धारित समय या अवधि।
- اخْلُفْنِي: मेरे स्थान पर (मेरा उत्तराधिकारी/प्रतिनिधि) बनो।
- أَصْلِحْ: सुधार करो, भलाई का आदेश दो।
- سَبِيلَ الْمُفْسِدِينَ: बिगाड़ पैदा करने वालों का रास्ता।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) से वादा किया कि वे तीस रातों के लिए उनकी मुनाजात (एकांत में इबादत और बातचीत) के लिए आएँगे। यह अवधि ज़ुल-क़ादा के महीने की थी। फिर अल्लाह ने इस अवधि को दस रातों (ज़ुल-हिज्जा के पहले दस दिन) से बढ़ाकर पूरा किया, इस प्रकार कुल चालीस रातें हो गईं। यह वह समय था जब अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) से सीधे कलाम (बातचीत) करने का वादा किया था, और यह अवधि उनके लिए एक महान परीक्षा और सम्मान थी।
जब मूसा (अलैहिस्सलाम) इस मुनाजात के लिए जाने लगे, तो उन्होंने अपने भाई हारून (अलैहिस्सलाम) से कहा: "मेरे भाई! मेरी अनुपस्थिति में तुम मेरे स्थान पर मेरी क़ौम (बनी इसराईल) के मामलों को संभालना। उन्हें अच्छाई का आदेश देना, उनके बीच सुधार करना, और उन्हें अल्लाह की इबादत और आज्ञाकारिता पर स्थिर रखना। बिगाड़ पैदा करने वालों के रास्ते पर मत चलना, न उनकी बात मानना, न उनके कामों में उनका साथ देना।"
यह एक महान ज़िम्मेदारी थी जो मूसा (अलैहिस्सलाम) ने हारून (अलैहिस्सलाम) को सौंपी, क्योंकि वे जानते थे कि उनकी क़ौम में कुछ ऐसे लोग हैं जो फ़साद (बिगाड़) फैलाने की कोशिश करेंगे, और हारून को चौकस रहना था।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह तआला अपने नबियों को परीक्षा और सम्मान के लिए विशेष समय देता है, और इससे उनके दिलों को मज़बूती मिलती है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह से जुड़ाव और इबादत के लिए समय निकालना बहुत बड़ी नेमत है।
- नेतृत्व और ज़िम्मेदारी सौंपते समय सही व्यक्ति का चुनाव करना चाहिए। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने हारून (अलैहिस्सलाम) को चुना जो नेक, सच्चे और अमानतदार थे।
- हर मुसलमान को चाहिए कि वह अपनी ज़िम्मेदारी में सुधार और भलाई का आदेश दे, और फ़साद फैलाने वालों के रास्ते से बचे। यह एक अहम सिद्धांत है कि बुराई का साथ देना या उसकी तरफ़ इशारा करना भी गुनाह है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के वादे पूरे होकर रहते हैं, और उसकी तरफ़ से दी गई मुद्दतें और समय हिकमत (बुद्धिमत्ता) से भरे होते हैं। हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसके फैसलों पर संतुष्ट रहना चाहिए।
- इस्लाम में भाईचारे और आपसी सहयोग की कितनी बड़ी अहमियत है — मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाई को ज़िम्मेदारी सौंपी और उन्हें नेकी की तरफ़ बुलाया। यह हमें सिखाता है कि अच्छे कामों में एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए।
📜 आयत 140-144 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 142
सूरा अल-आराफ आयत 142 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने मूसा से तौरैत देने के लिए तीस रातों…सूरा आयत 142/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 140–144. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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