अल-आराफ · 141/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
وَإِذْ أَنجَيْنَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ ۖ يُقَتِّلُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ ۝١٤١
Wa iz anjainaakum min Aali Fir`awna yasoomoo nakum sooo`al `azaab, yuqattiloona abnaaa`akum wa yastahyoona nisaaa`akum; wa fee zaalikum balaaa`um mir Rabbikum `azeem
📖 हिंदी अर्थ
हालॉकि उसने तुमको सारी खुदाई पर फज़ीलत दी है (ऐ बनी इसराइल वह वक्त याद करो) जब हमने तुमको फिरऔन के लोगों से नजात दी जब वह लोग तुम्हें बड़ी बड़ी तकलीफें पहुंचाते थे तुम्हारे बेटों को तो (चुन चुन कर) क़त्ल कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (लौन्डियॉ बनाने के वास्ते ज़िन्दा रख छोड़ते) और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे (सब्र की) सख्त आज़माइश थी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَنجَيْنَاكُم: हमने तुम्हें मुक्त किया / छुटकारा दिलाया।
  • آلِ فِرْعَوْنَ: फ़िरऔन के लोग, उसका परिवार और उसके अनुयायी।
  • يَسُومُونَكُمْ: वे तुम्हें पहुँचाते थे / तुम पर थोपते थे।
  • سُوءَ الْعَذَابِ: सबसे बुरी और कठोर यातना।
  • يُقَتِّلُونَ: वे हत्या करते थे (बार-बार और अधिक मात्रा में)।
  • أَبْنَاءَكُمْ: तुम्हारे बेटों को।
  • يَسْتَحْيُونَ: वे जीवित छोड़ देते थे (अपमान और दासता के लिए)।
  • نِسَاءَكُمْ: तुम्हारी स्त्रियों को।
  • بَلَاءٌ: परीक्षण, कसौटी, और बड़ी नेमत (कृपा) भी।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ बनी इसराईल! उस समय को याद करो जब हमने तुम्हें फ़िरऔन और उसके लोगों के चंगुल से मुक्ति दिलाई। वे लोग तुम्हें सबसे बुरी और भयंकर यातनाएँ देते थे—वे तुम्हारे नवजात बेटों को बेरहमी से मार डालते थे, और तुम्हारी स्त्रियों को जीवित छोड़ देते थे ताकि वे उनकी दासियाँ बनें, उनका अपमान करें और उनसे सेवा लें। यह अत्याचार और अपमान का सबसे कठोर रूप था।

इस कठिन परीक्षा के बाद, अल्लाह ने अपनी कृपा से तुम्हें उनके ज़ुल्म से निजात दी। यह मुक्ति तुम्हारे लिए तुम्हारे रब की ओर से एक बहुत बड़ी नेमत और परीक्षण था—परीक्षण इसलिए कि क्या तुम इस कृपा के बाद अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनते हो और उसकी इबादत करते हो, या फिर उसकी नेमतों को भूलकर नाफ़रमानी करते हो। यह घटना तुम्हारे लिए एक सबक़ है कि अल्लाह ही सच्चा रक्षक और सहायक है।


फ़ायदे (उपदेश और सबक):

  1. अल्लाह की नेमतों को याद रखना — जब अल्लाह किसी क़ौम को कठिनाई से निकालता है, तो उसका कर्तव्य है कि वह उस एहसान को याद रखे और शुक्र अदा करे। नेमतों की याद दिलाने से दिल में अल्लाह की मुहब्बत और आज्ञाकारिता बढ़ती है।
  2. अल्लाह ही सबसे बड़ा रक्षक है — जब इंसान किसी ज़ालिम की ताक़त के आगे बेबस हो जाता है, तो अल्लाह की तरफ़ रुजू करना ही असली रास्ता है। अल्लाह अपने बंदों को उन हालात से भी निकाल सकता है जिनसे कोई और निकाल न सके।
  3. मुसीबतें और परीक्षण इंसान को निखारते हैं — बनी इसराईल की यातनाएँ और उसके बाद की मुक्ति यह सिखाती है कि कठिनाइयों के बाद अल्लाह राहत देता है। यह एक इम्तिहान है कि इंसान सब्र करता है या नहीं।
  4. ज़ुल्म और अत्याचार का अंजाम बुरा होता है — फ़िरऔन का अंजाम हमेशा के लिए इतिहास में बुराई की मिसाल बन गया। यह सबक़ है कि ज़ुल्म करने वाले अल्लाह की पकड़ से नहीं बच सकते।
  5. शुक्र अदा करने से नेमतें बढ़ती हैं — जो क़ौम अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करती है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है। यह आयत हमें सिखाती है कि हर हाल में अल्लाह का शुक्रगुज़ार बनना चाहिए।


📜 आयत 139-143 — सूरा अल-आराफ

139إِنَّ هَٰؤُلَاءِ مُتَبَّرٌ مَّا هُمْ فِيهِ وَبَاطِلٌ مَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
(अरे कमबख्तो) ये लोग जिस मज़हब पर हैं (वह यक़ीनी बरबाद होकर रहेगा) और जो अमल ये लोग कर रहे हैं (वह सब मिटिया मेट हो जाएगा)
140قَالَ أَغَيْرَ اللَّهِ أَبْغِيكُمْ إِلَٰهًا وَهُوَ فَضَّلَكُمْ عَلَى الْعَالَمِينَ
(मूसा ने ये भी) कहा क्या तुम्हारा ये मतलब है कि ख़ुदा को छोड़कर मै दूसरे को तुम्हारा माबूद तलाश करू
141وَإِذْ أَنجَيْنَاكُم مِّنْ آلِ فِرْعَوْنَ يَسُومُونَكُمْ سُوءَ الْعَذَابِ ۖ يُقَتِّلُونَ أَبْنَاءَكُمْ وَيَسْتَحْيُونَ نِسَاءَكُمْ ۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَاءٌ مِّن رَّبِّكُمْ عَظِيمٌ
हालॉकि उसने तुमको सारी खुदाई पर फज़ीलत दी है (ऐ बनी इसराइल वह वक्त याद करो) जब हमने तुमको फिरऔन के लोगों से नजात दी जब वह लोग तुम्हें बड़ी बड़ी तकलीफें पहुंचाते थे तुम्हारे बेटों को तो (चुन चुन कर) क़त्ल कर डालते थे और तुम्हारी औरतों को (लौन्डियॉ बनाने के वास्ते ज़िन्दा रख छोड़ते) और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे (सब्र की) सख्त आज़माइश थी
142۞ وَوَاعَدْنَا مُوسَىٰ ثَلَاثِينَ لَيْلَةً وَأَتْمَمْنَاهَا بِعَشْرٍ فَتَمَّ مِيقَاتُ رَبِّهِ أَرْبَعِينَ لَيْلَةً ۚ وَقَالَ مُوسَىٰ لِأَخِيهِ هَارُونَ اخْلُفْنِي فِي قَوْمِي وَأَصْلِحْ وَلَا تَتَّبِعْ سَبِيلَ الْمُفْسِدِينَ
और हमने मूसा से तौरैत देने के लिए तीस रातों का वायदा किया और हमने उसमें दस रोज़ बढ़ाकर पूरा कर दिया ग़रज़ उसके परवरदिगार का वायदा चालीस रात में पूरा हो गया और (चलते वक्त) मूसा ने अपने भाई हारून कहा कि तुम मेरी क़ौम में मेरे जानशीन रहो और उनकी इसलाह करना और फसाद करने वालों के तरीक़े पर न चलना
143وَلَمَّا جَاءَ مُوسَىٰ لِمِيقَاتِنَا وَكَلَّمَهُ رَبُّهُ قَالَ رَبِّ أَرِنِي أَنظُرْ إِلَيْكَ ۚ قَالَ لَن تَرَانِي وَلَٰكِنِ انظُرْ إِلَى الْجَبَلِ فَإِنِ اسْتَقَرَّ مَكَانَهُ فَسَوْفَ تَرَانِي ۚ فَلَمَّا تَجَلَّىٰ رَبُّهُ لِلْجَبَلِ جَعَلَهُ دَكًّا وَخَرَّ مُوسَىٰ صَعِقًا ۚ فَلَمَّا أَفَاقَ قَالَ سُبْحَانَكَ تُبْتُ إِلَيْكَ وَأَنَا أَوَّلُ الْمُؤْمِنِينَ
और जब मूसा हमारा वायदा पूरा करते (कोहेतूर पर) आए और उनका परवरदिगार उनसे हम कलाम हुआ तो मूसा ने अर्ज़ किया कि ख़ुदाया तू मेझे अपनी एक झलक दिखला दे कि मैं तूझे देखँ ख़ुदा ने फरमाया तुम मुझे हरगिज़ नहीं देख सकते मगर हॉ उस पहाड़ की तरफ देखो (हम उस पर अपनी तजल्ली डालते हैं) पस अगर (पहाड़) अपनी जगह पर क़ायम रहे तो समझना कि अनक़रीब मुझे भी देख लोगे (वरना नहीं) फिर जब उनके परवरदिगार ने पहाड़ पर तजल्ली डाली तो उसको चकनाचूर कर दिया और मूसा बेहोश होकर गिर पड़े फिर जब होश में आए तो कहने लगे ख़ुदा वन्दा तू (देखने दिखाने से) पाक व पाकीज़ा है-मैने तेरी बारगाह में तौबा की और मै सब से पहले तेरी अदम रवायत का यक़ीन करता हूँ
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
141आयत

अनुवाद — अल-आराफ 141

सूरा अल-आराफ आयत 141 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हालॉकि उसने तुमको सारी खुदाई पर फज़ीलत दी है (ऐ…

सूरा आयत 141/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 139–143. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Wednesday, September 30, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए