अल-आराफ · 19/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
وَيَا آدَمُ اسْكُنْ أَنتَ وَزَوْجُكَ الْجَنَّةَ فَكُلَا مِنْ حَيْثُ شِئْتُمَا وَلَا تَقْرَبَا هَٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ الظَّالِمِينَ ۝١٩
Wa yaaa Aadamus kun anta wa zawjukal Jannata fakulaa min haisu shi`tumaa wa laa taqrabaa haazihish shajarata fatakoonaa minza zaalimeen
📖 हिंदी अर्थ
और (आदम से कहा) ऐ आदम तुम और तुम्हारी बीबी (दोनों) बेहश्त में रहा सहा करो और जहाँ से चाहो खाओ (पियो) मगर (ख़बरदार) उस दरख्त के करीब न जाना वरना तुम अपना आप नुक़सान करोगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْكُنْ: तुम निवास करो।
  • زَوْجُكَ: तुम्हारी पत्नी (हव्वा)।
  • الْجَنَّةَ: स्वर्ग (बाग़)।
  • مِنْ حَيْثُ شِئْتُمَا: जहाँ से तुम दोनों चाहो।
  • وَلَا تَقْرَبَا: और तुम दोनों उसके पास न जाओ (अर्थात उसका फल न खाओ)।
  • هَذِهِ الشَّجَرَةَ: यह पेड़ (जिसे अल्लाह ने उन दोनों के लिए निर्धारित किया था)।
  • الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, अपनी आत्मा पर ज़ुल्म करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने आदम अलैहिस्सलाम को आदेश दिया कि वे अपनी पत्नी हव्वा के साथ स्वर्ग (जन्नत) में निवास करें। अल्लाह ने उन्हें पूरी स्वतंत्रता दी कि वे जन्नत के किसी भी हिस्से से जो चाहें खाएँ और उसकी नेमतों का आनंद उठाएँ। लेकिन साथ ही उन्हें एक स्पष्ट निषेध (मनाही) दिया—वे एक विशेष पेड़ के पास न जाएँ और उसका फल न खाएँ। यह पेड़ अल्लाह ने उन दोनों के लिए निर्धारित किया था, और यह उनकी आज्ञाकारिता की परीक्षा थी। अल्लाह ने उन्हें चेतावनी दी कि यदि उन्होंने इस निषेध का उल्लंघन किया और उस पेड़ के पास गए या उसका फल खाया, तो वे अपने ऊपर ज़ुल्म करने वालों में से हो जाएँगे—अर्थात वे अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करके अपनी आत्मा को नुकसान पहुँचाएँगे। यह आदेश उनके लिए एक परीक्षा थी, जिसमें उन्हें अपने रब की आज्ञा का पालन करके सच्ची बंदगी का प्रमाण देना था।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है—उसने आदम को जन्नत की सारी नेमतें दीं और केवल एक चीज़ से रोका, जो उनके लिए परीक्षा थी। यह सिखाता है कि अल्लाह की नेमतें असीम हैं, और उसकी मनाही भी हमारी भलाई के लिए होती है।
  2. इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह की आज्ञा का पालन करना और उसकी सीमाओं का सम्मान करना ही सच्ची सफलता है। जो व्यक्ति अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करता है, वह वास्तव में अपने ही ऊपर ज़ुल्म करता है।
  3. यहाँ से हमें सीख मिलती है कि जीवन में हर व्यक्ति के लिए कुछ निषेध (हलाल-हराम) निर्धारित हैं। इनका पालन करना ही हमारी परीक्षा है, और इसमें ही हमारी भलाई छिपी है।
  4. आदम अलैहिस्सलाम की कहानी हमें सिखाती है कि अल्लाह इंसान को परीक्षा में डालता है ताकि उसका सच्चा ईमान और आज्ञाकारिता प्रकट हो। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि हम अपने जीवन में अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसकी रहमत के भूखे रहें।


📜 आयत 17-21 — सूरा अल-आराफ

17ثُمَّ لَآتِيَنَّهُم مِّن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ وَعَنْ أَيْمَانِهِمْ وَعَن شَمَائِلِهِمْ ۖ وَلَا تَجِدُ أَكْثَرَهُمْ شَاكِرِينَ
फिर उन लोगों से और उनके पीछे से और उनके दाहिने से और उनके बाएं से (गरज़ हर तरफ से) उन पर आ पडूंगा और (उनको बहकाउंगा) और तू उन में से बहुतरों की शुक्रग़ुज़ार नहीं पायेगा
18قَالَ اخْرُجْ مِنْهَا مَذْءُومًا مَّدْحُورًا ۖ لَّمَن تَبِعَكَ مِنْهُمْ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكُمْ أَجْمَعِينَ
ख़ुदा ने फरमाया यहाँ से बुरे हाल में (राइन्दा होकर निकल) (दूर) जा उन लोगों से जो तेरा कहा मानेगा तो मैं यक़ीनन तुम (और उन) सबको जहन्नुम में भर दूंगा
19وَيَا آدَمُ اسْكُنْ أَنتَ وَزَوْجُكَ الْجَنَّةَ فَكُلَا مِنْ حَيْثُ شِئْتُمَا وَلَا تَقْرَبَا هَٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ الظَّالِمِينَ
और (आदम से कहा) ऐ आदम तुम और तुम्हारी बीबी (दोनों) बेहश्त में रहा सहा करो और जहाँ से चाहो खाओ (पियो) मगर (ख़बरदार) उस दरख्त के करीब न जाना वरना तुम अपना आप नुक़सान करोगे
20فَوَسْوَسَ لَهُمَا الشَّيْطَانُ لِيُبْدِيَ لَهُمَا مَا وُورِيَ عَنْهُمَا مِن سَوْآتِهِمَا وَقَالَ مَا نَهَاكُمَا رَبُّكُمَا عَنْ هَٰذِهِ الشَّجَرَةِ إِلَّا أَن تَكُونَا مَلَكَيْنِ أَوْ تَكُونَا مِنَ الْخَالِدِينَ
फिर शैतान ने उन दोनों को वसवसा (शक) दिलाया ताकि (नाफरमानी की वजह से) उनके अस्तर की चीज़े जो उनकी नज़र से बेहश्ती लिबास की वजह से पोशीदा थी खोल डाले कहने लगा कि तुम्हारे परवरदिगार ने दोनों को दरख्त (के फल खाने) से सिर्फ इसलिए मना किया है (कि मुबादा) तुम दोनों फरिश्ते बन जाओ या हमेशा (ज़िन्दा) रह जाओ
21وَقَاسَمَهُمَا إِنِّي لَكُمَا لَمِنَ النَّاصِحِينَ
और उन दोनों के सामने क़समें खायीं कि मैं यक़ीनन तुम्हारा ख़ैर ख्वाह हूँ
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
19आयत

अनुवाद — अल-आराफ 19

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Wednesday, September 30, 2026

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