Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اسْكُنْ: तुम निवास करो।
- زَوْجُكَ: तुम्हारी पत्नी (हव्वा)।
- الْجَنَّةَ: स्वर्ग (बाग़)।
- مِنْ حَيْثُ شِئْتُمَا: जहाँ से तुम दोनों चाहो।
- وَلَا تَقْرَبَا: और तुम दोनों उसके पास न जाओ (अर्थात उसका फल न खाओ)।
- هَذِهِ الشَّجَرَةَ: यह पेड़ (जिसे अल्लाह ने उन दोनों के लिए निर्धारित किया था)।
- الظَّالِمِينَ: अत्याचारी, अपनी आत्मा पर ज़ुल्म करने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने आदम अलैहिस्सलाम को आदेश दिया कि वे अपनी पत्नी हव्वा के साथ स्वर्ग (जन्नत) में निवास करें। अल्लाह ने उन्हें पूरी स्वतंत्रता दी कि वे जन्नत के किसी भी हिस्से से जो चाहें खाएँ और उसकी नेमतों का आनंद उठाएँ। लेकिन साथ ही उन्हें एक स्पष्ट निषेध (मनाही) दिया—वे एक विशेष पेड़ के पास न जाएँ और उसका फल न खाएँ। यह पेड़ अल्लाह ने उन दोनों के लिए निर्धारित किया था, और यह उनकी आज्ञाकारिता की परीक्षा थी। अल्लाह ने उन्हें चेतावनी दी कि यदि उन्होंने इस निषेध का उल्लंघन किया और उस पेड़ के पास गए या उसका फल खाया, तो वे अपने ऊपर ज़ुल्म करने वालों में से हो जाएँगे—अर्थात वे अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करके अपनी आत्मा को नुकसान पहुँचाएँगे। यह आदेश उनके लिए एक परीक्षा थी, जिसमें उन्हें अपने रब की आज्ञा का पालन करके सच्ची बंदगी का प्रमाण देना था।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह तआला अपने बंदों पर बेहद मेहरबान है—उसने आदम को जन्नत की सारी नेमतें दीं और केवल एक चीज़ से रोका, जो उनके लिए परीक्षा थी। यह सिखाता है कि अल्लाह की नेमतें असीम हैं, और उसकी मनाही भी हमारी भलाई के लिए होती है।
- इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह की आज्ञा का पालन करना और उसकी सीमाओं का सम्मान करना ही सच्ची सफलता है। जो व्यक्ति अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करता है, वह वास्तव में अपने ही ऊपर ज़ुल्म करता है।
- यहाँ से हमें सीख मिलती है कि जीवन में हर व्यक्ति के लिए कुछ निषेध (हलाल-हराम) निर्धारित हैं। इनका पालन करना ही हमारी परीक्षा है, और इसमें ही हमारी भलाई छिपी है।
- आदम अलैहिस्सलाम की कहानी हमें सिखाती है कि अल्लाह इंसान को परीक्षा में डालता है ताकि उसका सच्चा ईमान और आज्ञाकारिता प्रकट हो। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि हम अपने जीवन में अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसकी रहमत के भूखे रहें।
📜 आयत 17-21 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 19
सूरा अल-आराफ आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (आदम से कहा) ऐ आदम तुम और तुम्हारी बीबी…सूरा आयत 19/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


