अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَوَسْوَسَ: छुपाकर बुरा विचार डालना, दिल में खोटा ख्याल डालना।
- لِيُبْدِيَ: प्रकट करने के लिए, खोलने के लिए।
- وُورِيَ: छिपाया गया।
- سَوْآتِهِمَا: उनके शर्म के स्थान (सतर)।
- مَلَكَيْنِ: दो फ़रिश्ते।
- الْخَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले (अमर)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला हमें शैतान की उस चाल के बारे में बताते हैं जो उसने हज़रत आदम और हव्वा (अलैहिमास्सलाम) के साथ की। शैतान ने उन दोनों के दिलों में धीरे-धीरे बुरा विचार डाला, ताकि उनके सामने उनके वे अंग प्रकट कर दे जो अल्लाह ने उनसे छिपाए थे। यानी उसका मक़सद उनकी शर्मगाहों को खोलना और उन्हें उस चीज़ की तरफ ले जाना था जिससे अल्लाह ने उन्हें रोका था।
फिर शैतान ने उनसे कहा: "तुम्हारे रब ने तुम्हें इस पेड़ के पास जाने से सिर्फ इसलिए मना किया है कि कहीं तुम दो फ़रिश्ते न बन जाओ या कहीं तुम हमेशा ज़िंदा रहने वालों में से न हो जाओ।" यानी उसने अल्लाह की मनाही को उलटा पेश किया। उसने उन्हें यक़ीन दिलाया कि अल्लाह ने तुम्हें इसलिए रोका है ताकि तुम आगे न बढ़ सको, तुम्हारी तरक्की न हो, तुम फ़रिश्तों के दर्जे तक न पहुँच सको और हमेशा की ज़िंदगी हासिल न कर सको। इस तरह उसने झूठ और धोखे से उन्हें भटकाने की कोशिश की।
यहाँ से हमें सबक़ मिलता है कि शैतान हमेशा से इंसान का खुला दुश्मन है। वह कभी सीधे रास्ते से नहीं आता, बल्कि बहानों और झूठी बातों से इंसान को गुमराह करता है। वह बुरे कामों को अच्छे रूप में पेश करता है और अल्लाह के हुक्मों को बोझ या रुकावट के तौर पर दिखाता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों पर पूरा भरोसा करें और शैतान के बहकावे में न आएँ। अल्लाह ने जो भी चीज़ हमारे लिए मना की है, उसमें हमारी ही भलाई है, भले ही हमें उसका कारण समझ न आए।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि शर्म और हया इंसान की फ़ितरत (स्वभाव) है। अल्लाह ने इंसान को सतर ढकने की ताक़त दी थी, और शैतान की कोशिश यही है कि इंसान की हया छीन ले और उसे बेशर्म बना दे। इसलिए हमें अपनी शर्म और हया की हिफ़ाज़त करनी चाहिए और उन चीज़ों से बचना चाहिए जो हमें बेशर्मी की तरफ ले जाएँ।
अल्लाह तआला हमें शैतान के मकर से बचाए और हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 18-22 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 20
सूरा अल-आराफ आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर शैतान ने उन दोनों को वसवसा (शक) दिलाया ताकि…सूरा आयत 20/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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