अल-आराफ · 18/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
قَالَ اخْرُجْ مِنْهَا مَذْءُومًا مَّدْحُورًا ۖ لَّمَن تَبِعَكَ مِنْهُمْ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكُمْ أَجْمَعِينَ ۝١٨
Qaalakh ruj mnhaa maz`oomam madhooraa; laman tabi`aka minhum la amla`anna Jahannama minkum ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने फरमाया यहाँ से बुरे हाल में (राइन्दा होकर निकल) (दूर) जा उन लोगों से जो तेरा कहा मानेगा तो मैं यक़ीनन तुम (और उन) सबको जहन्नुम में भर दूंगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَذْءُومًا: बुराई और निन्दा के साथ, अपमानित होकर।
  • مَّدْحُورًا: दूर किया हुआ, रहमत से निकाला हुआ, अपमानित और तिरस्कृत।
  • لَأَمْلَأَنَّ: मैं अवश्य भर दूँगा।
  • أَجْمَعِينَ: तुम सबको मिलाकर, बिना किसी को छोड़े।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इब्लीस को, जब उसने आदम (अलैहिस्सलाम) को सजदा करने से इनकार कर दिया और घमंड किया, आदेश दिया: "तू यहाँ से निकल जा, जबकि तू निन्दित, अपमानित और रहमत से दूर किया हुआ है।" यह इब्लीस के लिए सबसे बड़ी सज़ा थी कि उसे अल्लाह की रहमत, उसकी क़ुर्बत और उसके पवित्र स्थान से हमेशा के लिए निकाल दिया गया। फिर अल्लाह ने उसे चेतावनी दी कि जो कोई भी इंसानों में से तेरी پیروی करेगा, तुझ पर ईमान लाएगा और तेरे कहने पर चलेगा, तो मैं जहन्नम को तुझसे और तेरे सभी अनुयायियों से भर दूँगा — चाहे वे जिन्न हों या इंसान। यह अल्लाह की ओर से एक पक्का वादा और कठोर चेतावनी है कि शैतान और उसके साथियों का अंजाम जहन्नम की आग है, जिसमें वे सब हमेशा के लिए रहेंगे। यह आदेश उसी समय दिया गया जब इब्लीस ने अवज्ञा की थी, और यह उसके घमंड और अहंकार का परिणाम था।

फ़ायदे (सबक):

  1. अहंकार और अवज्ञा का अंजाम: इब्लीस का किस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के आदेश के सामने सिर झुकाना ही सच्ची इबादत है। घमंड और अपनी बड़ाई का ख़्याल इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर सकता है, जैसा कि इब्लीस के साथ हुआ।
  2. अल्लाह का न्याय और सज़ा: यह आयत बताती है कि अल्लाह न्याय करने वाला है और वह बुराई करने वालों को उनकी सज़ा ज़रूर देगा। शैतान और उसके अनुयायियों के लिए जहन्नम का वादा अटल है।
  3. शैतान से सावधानी: हमें शैतान के बहकावे से बचना चाहिए और उसके रास्ते पर चलने से डरना चाहिए, क्योंकि उसका रास्ता जहन्नम तक ले जाता है। यह आयत हमें याद दिलाती है कि शैतान हमारा खुला दुश्मन है और उसकी پیروی का अंजाम बहुत बुरा है।
  4. अल्लाह की रहमत की क़द्र: जब हम देखते हैं कि इब्लीस को अल्लाह की रहमत से निकाल दिया गया, तो हमें अपने ऊपर अल्लाह की रहमत की क़द्र करनी चाहिए और उसके शुक्र में अपनी ज़िंदगी को नेक बनाना चाहिए। अल्लाह ने हमें मौका दिया है कि हम उसकी इबादत करें और उसकी रहमत के हक़दार बनें।
  5. क़ुरआन की हिदायत: यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने और उससे सबक लेने के लिए है। हमें अपनी ज़िंदगी में इन हिदायतों को अपनाना चाहिए ताकि हम जहन्नम से बच सकें और जन्नत के हक़दार बन सकें।
🎧 सुनें

📜 आयत 16-20 — अल-आराफ

16قَالَ فَبِمَا أَغْوَيْتَنِي لَأَقْعُدَنَّ لَهُمْ صِرَاطَكَ الْمُسْتَقِيمَ
फ़रमाया (अच्छा मंजूर) तुझे ज़रूर मोहलत दी गयी कहने लगा चूँकि तूने मेरी राह मारी तो मैं भी तेरी सीधी राह पर बनी आदम को (गुमराह करने के लिए) ताक में बैठूं तो सही
17ثُمَّ لَآتِيَنَّهُم مِّن بَيْنِ أَيْدِيهِمْ وَمِنْ خَلْفِهِمْ وَعَنْ أَيْمَانِهِمْ وَعَن شَمَائِلِهِمْ ۖ وَلَا تَجِدُ أَكْثَرَهُمْ شَاكِرِينَ
फिर उन लोगों से और उनके पीछे से और उनके दाहिने से और उनके बाएं से (गरज़ हर तरफ से) उन पर आ पडूंगा और (उनको बहकाउंगा) और तू उन में से बहुतरों की शुक्रग़ुज़ार नहीं पायेगा
18قَالَ اخْرُجْ مِنْهَا مَذْءُومًا مَّدْحُورًا ۖ لَّمَن تَبِعَكَ مِنْهُمْ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكُمْ أَجْمَعِينَ
ख़ुदा ने फरमाया यहाँ से बुरे हाल में (राइन्दा होकर निकल) (दूर) जा उन लोगों से जो तेरा कहा मानेगा तो मैं यक़ीनन तुम (और उन) सबको जहन्नुम में भर दूंगा
19وَيَا آدَمُ اسْكُنْ أَنتَ وَزَوْجُكَ الْجَنَّةَ فَكُلَا مِنْ حَيْثُ شِئْتُمَا وَلَا تَقْرَبَا هَٰذِهِ الشَّجَرَةَ فَتَكُونَا مِنَ الظَّالِمِينَ
और (आदम से कहा) ऐ आदम तुम और तुम्हारी बीबी (दोनों) बेहश्त में रहा सहा करो और जहाँ से चाहो खाओ (पियो) मगर (ख़बरदार) उस दरख्त के करीब न जाना वरना तुम अपना आप नुक़सान करोगे
20فَوَسْوَسَ لَهُمَا الشَّيْطَانُ لِيُبْدِيَ لَهُمَا مَا وُورِيَ عَنْهُمَا مِن سَوْآتِهِمَا وَقَالَ مَا نَهَاكُمَا رَبُّكُمَا عَنْ هَٰذِهِ الشَّجَرَةِ إِلَّا أَن تَكُونَا مَلَكَيْنِ أَوْ تَكُونَا مِنَ الْخَالِدِينَ
फिर शैतान ने उन दोनों को वसवसा (शक) दिलाया ताकि (नाफरमानी की वजह से) उनके अस्तर की चीज़े जो उनकी नज़र से बेहश्ती लिबास की वजह से पोशीदा थी खोल डाले कहने लगा कि तुम्हारे परवरदिगार ने दोनों को दरख्त (के फल खाने) से सिर्फ इसलिए मना किया है (कि मुबादा) तुम दोनों फरिश्ते बन जाओ या हमेशा (ज़िन्दा) रह जाओ
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अनुवाद — अल-आराफ 18

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Tuesday, August 18, 2026

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