अल-आराफ · 36/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ ۝٣٦
Wallazeena kazzaboo bi Aayaatinaa wastakbaroo `anhhaaa ulaaa`ika Ashaabun naari hum feehaa khaalidoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनसे सरताबी कर बैठे वह लोग जहन्नुमी हैं कि वह उसमें हमेशा रहेगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَّبُوا: झुठलाया, असत्य माना
  • بِآيَاتِنَا: हमारी निशानियों को (अल्लाह की आयतों, प्रमाणों और निशानियों को)
  • وَاسْتَكْبَرُوا: और घमंड/अहंकार किया
  • عَنْهَا: उनसे (उन आयतों को मानने और उनका अनुसरण करने से)
  • أَصْحَابُ النَّارِ: आग (जहन्नम) वाले
  • خَالِدُونَ: हमेशा रहने वाले, सदैव रहने वाले

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों का हाल बयान कर रहे हैं जिन्होंने अल्लाह की आयतों को झुठलाया — चाहे वे क़ुरआन की आयतें हों, या अल्लाह की क़ुदरत की निशानियाँ जो इस कायनात में बिखरी हुई हैं, या वे प्रमाण जो अल्लाह के रसूलों के ज़रिए लोगों तक पहुँचे। उन्होंने न सिर्फ़ इन्हें झुठलाया, बल्कि इनके आगे सर झुकाने से इनकार किया और घमंड किया। उनका अहंकार उन्हें सच्चाई क़बूल करने से रोकता रहा। वे इसलिए ईमान नहीं लाए कि सच्चाई उनके पास नहीं पहुँची थी, बल्कि इसलिए कि उन्होंने अपनी बड़ाई और घमंड की वजह से सच्चाई को स्वीकार करना गवारा नहीं किया।

अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे लोग "आग वाले" हैं — यानी जहन्नम की आग उनका ठिकाना है। वे उसमें हमेशा रहने वाले हैं, कभी बाहर नहीं निकलेंगे। यह उनका स्थायी निवास होगा, न उनकी मौत आएगी और न ही उन्हें कोई राहत मिलेगी। यह उनके कुफ़्र और अहंकार का बदला है।


दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने हमें साफ़ बता दिया है कि सच्चाई को क़बूल करने में घमंड और अहंकार सबसे बड़ी रुकावट है। इंसान जब अपने ज्ञान, अपनी हैसियत या अपनी सोच पर इतना घमंड करने लगता है कि वह अल्लाह की बात को भी नहीं मानता, तो वह उसी अंजाम की तरफ बढ़ता है जिसका ज़िक्र इस आयत में है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को अहंकार से पाक रखें, हमेशा सच्चाई के आगे झुकने की तैयारी रखें, और अल्लाह की आयतों को खुले दिल से क़बूल करें। याद रखें, जो लोग अल्लाह के सामने अपने आप को छोटा करते हैं और उसकी बात मानते हैं, अल्लाह उन्हें जन्नत की बुलंदियाँ अता करता है। लेकिन जो लोग घमंड करते हैं, उनके लिए जहन्नम की आग है। अल्लाह हम सबको सच्चाई क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे और हमें अहंकार से बचाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 34-38 — अल-आराफ

34وَلِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ ۖ فَإِذَا جَاءَ أَجَلُهُمْ لَا يَسْتَأْخِرُونَ سَاعَةً ۖ وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ
और हर गिरोह (के न पैदा होने) का एक ख़ास वक्त है फिर जब उनका वक्त आ पहुंचता है तो न एक घड़ी पीछे रह सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं
35يَا بَنِي آدَمَ إِمَّا يَأْتِيَنَّكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي ۙ فَمَنِ اتَّقَىٰ وَأَصْلَحَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
ऐ औलादे आदम जब तुम में के (हमारे) पैग़म्बर तुम्हारे पास आए और तुमसे हमारे एहकाम बयान करे तो (उनकी इताअत करना क्योंकि जो शख्स परहेज़गारी और नेक काम करेगा तो ऐसे लोगों पर न तो (क़यामत में) कोई ख़ौफ़ होगा और न वह आर्ज़दा ख़ातिर (परेशान) होंगे
36وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनसे सरताबी कर बैठे वह लोग जहन्नुमी हैं कि वह उसमें हमेशा रहेगें
37فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ كَذَّبَ بِآيَاتِهِ ۚ أُولَٰئِكَ يَنَالُهُمْ نَصِيبُهُم مِّنَ الْكِتَابِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَاءَتْهُمْ رُسُلُنَا يَتَوَفَّوْنَهُمْ قَالُوا أَيْنَ مَا كُنتُمْ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ
तो जो शख्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़कर ज़ालिम और कौन होगा फिर तो वह लोग हैं जिन्हें उनकी (तक़दीर) का लिखा हिस्सा (रिज़क) वग़ैरह मिलता रहेगा यहाँ तक कि जब हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) उनके पास आकर उनकी रूह कब्ज़ करेगें तो (उनसे) पूछेगें कि जिन्हें तुम ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थे अब वह (कहाँ हैं तो वह कुफ्फार) जवाब देगें कि वह सब तो हमें छोड़ कर चल चंपत हुए और अपने खिलाफ आप गवाही देगें कि वह बेशक काफ़िर थे
38قَالَ ادْخُلُوا فِي أُمَمٍ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِكُم مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ فِي النَّارِ ۖ كُلَّمَا دَخَلَتْ أُمَّةٌ لَّعَنَتْ أُخْتَهَا ۖ حَتَّىٰ إِذَا ادَّارَكُوا فِيهَا جَمِيعًا قَالَتْ أُخْرَاهُمْ لِأُولَاهُمْ رَبَّنَا هَٰؤُلَاءِ أَضَلُّونَا فَآتِهِمْ عَذَابًا ضِعْفًا مِّنَ النَّارِ ۖ قَالَ لِكُلٍّ ضِعْفٌ وَلَٰكِن لَّا تَعْلَمُونَ
(तब ख़ुदा उनसे) फरमाएगा कि जो लोग जिन व इन्स के तुम से पहले बसे हैं उन्हीं में मिलजुल कर तुम भी जहन्नुम वासिल हो जाओ (और ) अहले जहन्नुम का ये हाल होगा कि जब उसमें एक गिरोह दाख़िल होगा तो अपने साथी दूसरे गिरोह पर लानत करेगा यहाँ तक कि जब सब के सब पहुंच जाएगें तो उनमें की पिछली जमात अपने से पहली जमाअत के वास्ते बदद्आ करेगी कि परवरदिगार उन्हीं लोगों ने हमें गुमराह किया था तो उन पर जहन्नुम का दोगुना अज़ाब फरमा (इस पर) ख़ुदा फरमाएगा कि हर एक के वास्ते दो गुना अज़ाब है लेकिन (तुम पर) तुफ़ है तुम जानते नहीं
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अनुवाद — अल-आराफ 36

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Tuesday, August 18, 2026

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