अल-आराफ · 35/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
يَا بَنِي آدَمَ إِمَّا يَأْتِيَنَّكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي ۙ فَمَنِ اتَّقَىٰ وَأَصْلَحَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ ۝٣٥
yaa Banee Aadama immaa yaatiyannakum Rusulum minkum yaqussoona `alaikum Aayaatee famanit taqaa wa aslaha falaa khawfun `alaihim wa laa hum yahzanoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ औलादे आदम जब तुम में के (हमारे) पैग़म्बर तुम्हारे पास आए और तुमसे हमारे एहकाम बयान करे तो (उनकी इताअत करना क्योंकि जो शख्स परहेज़गारी और नेक काम करेगा तो ऐसे लोगों पर न तो (क़यामत में) कोई ख़ौफ़ होगा और न वह आर्ज़दा ख़ातिर (परेशान) होंगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَقُصُّونَ: तुम्हें सुनाते हैं, एक के बाद एक बयान करते हैं।
  • آيَاتِي: मेरी आयतें, मेरे आदेश और निशानियाँ।
  • اتَّقَى: डर रखा, (यहाँ) शिर्क से बचा और अल्लाह के आदेशों का पालन किया।
  • أَصْلَحَ: अपने कर्मों को सुधारा, अच्छे कर्म किए।
  • خَوْفٌ: डर (आगे के अज़ाब का)।
  • حَزَنٌ: ग़म (जो चीज़ें दुनिया में छूट गईं उनका)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ आदम की संतानो! जब मेरी ओर से तुम्हारे पास रसूल आएँ, जो तुम्हीं में से हों, और वे तुम्हें मेरी आयतें पढ़कर सुनाएँ और मेरे आदेशों व निशानियों को स्पष्ट रूप से बयान करें, तो उनकी बात मानो और उनके लाए हुए मार्ग पर चलो। फिर जो व्यक्ति मेरे क्रोध से डरा, शिर्क और अवज्ञा से बचा, और अपने कर्मों को सुधारकर अच्छे कर्म करता रहा, तो ऐसे लोगों के लिए क़ियामत के दिन न तो कोई डर होगा अल्लाह की ओर से आने वाली सज़ा का, और न ही वे उन दुनियावी चीज़ों पर ग़मगीन होंगे जो उन्होंने अल्लाह की राह में छोड़ दी होंगी। यह उनके लिए अल्लाह का वादा है, और अल्लाह का वादा सत्य है।


फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह ने हर उम्मत की हिदायत के लिए रसूल भेजे, और यह उसकी रहमत है कि रसूल उन्हीं में से चुने गए ताकि लोग आसानी से समझ सकें और उनसे सीख सकें।
  2. इस आयत से पता चलता है कि रसूलों की शिक्षाओं को क़बूल करना और उन पर अमल करना ही सच्ची भलाई का रास्ता है।
  3. "तक़वा" (परहेज़गारी) और "इस्लाह" (सुधार) — ये दोनों चीज़ें एक साथ ज़रूरी हैं: बुराई से बचना भी और अच्छाई को अपनाना भी। केवल बुराई छोड़ देना काफ़ी नहीं, बल्कि कर्मों को सुधारना भी ज़रूरी है।
  4. मोमिन के लिए सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी यह है कि क़ियामत के दिन उसे न डर होगा और न ग़म — यह अल्लाह की ओर से उसके वफ़ादार बंदों के लिए एक पक्का वादा है।
  5. यह आयत मुसलमानों को यह सिखाती है कि दुनिया की चीज़ों के खोने पर ग़म करने की ज़रूरत नहीं, बशर्ते वे अल्लाह की राह में हों; असली कामयाबी आख़िरत की कामयाबी है।


📜 आयत 33-37 — सूरा अल-आराफ

33قُلْ إِنَّمَا حَرَّمَ رَبِّيَ الْفَوَاحِشَ مَا ظَهَرَ مِنْهَا وَمَا بَطَنَ وَالْإِثْمَ وَالْبَغْيَ بِغَيْرِ الْحَقِّ وَأَن تُشْرِكُوا بِاللَّهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِ سُلْطَانًا وَأَن تَقُولُوا عَلَى اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) तुम साफ कह दो कि हमारे परवरदिगार ने तो तमाम बदकारियों को ख्वाह (चाहे) ज़ाहिरी हो या बातिनी और गुनाह और नाहक़ ज्यादती करने को हराम किया है और इस बात को कि तुम किसी को ख़ुदा का शरीक बनाओ जिनकी उनसे कोई दलील न ही नाज़िल फरमाई और ये भी कि बे समझे बूझे ख़ुदा पर बोहतान बॉधों
34وَلِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌ ۖ فَإِذَا جَاءَ أَجَلُهُمْ لَا يَسْتَأْخِرُونَ سَاعَةً ۖ وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ
और हर गिरोह (के न पैदा होने) का एक ख़ास वक्त है फिर जब उनका वक्त आ पहुंचता है तो न एक घड़ी पीछे रह सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं
35يَا بَنِي آدَمَ إِمَّا يَأْتِيَنَّكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي ۙ فَمَنِ اتَّقَىٰ وَأَصْلَحَ فَلَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
ऐ औलादे आदम जब तुम में के (हमारे) पैग़म्बर तुम्हारे पास आए और तुमसे हमारे एहकाम बयान करे तो (उनकी इताअत करना क्योंकि जो शख्स परहेज़गारी और नेक काम करेगा तो ऐसे लोगों पर न तो (क़यामत में) कोई ख़ौफ़ होगा और न वह आर्ज़दा ख़ातिर (परेशान) होंगे
36وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا وَاسْتَكْبَرُوا عَنْهَا أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया और उनसे सरताबी कर बैठे वह लोग जहन्नुमी हैं कि वह उसमें हमेशा रहेगें
37فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا أَوْ كَذَّبَ بِآيَاتِهِ ۚ أُولَٰئِكَ يَنَالُهُمْ نَصِيبُهُم مِّنَ الْكِتَابِ ۖ حَتَّىٰ إِذَا جَاءَتْهُمْ رُسُلُنَا يَتَوَفَّوْنَهُمْ قَالُوا أَيْنَ مَا كُنتُمْ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ قَالُوا ضَلُّوا عَنَّا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ
तो जो शख्स ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़कर ज़ालिम और कौन होगा फिर तो वह लोग हैं जिन्हें उनकी (तक़दीर) का लिखा हिस्सा (रिज़क) वग़ैरह मिलता रहेगा यहाँ तक कि जब हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) उनके पास आकर उनकी रूह कब्ज़ करेगें तो (उनसे) पूछेगें कि जिन्हें तुम ख़ुदा को छोड़कर पुकारा करते थे अब वह (कहाँ हैं तो वह कुफ्फार) जवाब देगें कि वह सब तो हमें छोड़ कर चल चंपत हुए और अपने खिलाफ आप गवाही देगें कि वह बेशक काफ़िर थे
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
35आयत

अनुवाद — अल-आराफ 35

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सूरा आयत 35/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.





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Tuesday, September 29, 2026

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