Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَرْيَةٍ (क़र्याह): बस्ती, नगर या गाँव।
- أَهْلَكْنَاهَا (अहलकनाहा): हमने उसे (उसके निवासियों को) विनष्ट कर दिया।
- بَأْسُنَا (बअ्सुनाः): हमारा कठोर अज़ाब (यातना)।
- بَيَاتًا (बयातन): रात के समय।
- قَائِلُونَ (क़ाइलून): दोपहर के समय आराम करने वाले (क़ैलूला करने वाले)।
विस्तृत विवरण:
अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि कितनी ही बस्तियाँ थीं जिन्हें हमने उनके निवासियों के कुफ़्र और पैग़म्बरों को झुठलाने की वजह से विनष्ट कर दिया। जब उन पर हमारा अज़ाब आया, तो वह उनके पास दो अवस्थाओं में से किसी एक अवस्था में आया — या तो रात के समय जब वे सो रहे थे, या दोपहर के समय जब वे क़ैलूला (आराम) कर रहे थे। ये दोनों समय ऐसे होते हैं जब इंसान पूरी तरह से बेख़बर और आराम की हालत में होता है, इसलिए इन समयों में अज़ाब का आना अधिक भयानक और सख्त होता है। जब अज़ाब आया, तो न तो वे उसे टाल सके और न ही उनके बनाए हुए झूठे देवता उन्हें उससे बचा सके। यह उनके कुफ़्र और ज़ुल्म का सीधा परिणाम था, और यह अज़ाब दुनिया में भी उनके लिए रुस्वाई का सबब बना और आख़िरत में भी उनके लिए ज़िल्लत और अज़ाब का कारण बना।
शिक्षाएँ और लाभ:
- इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह किसी को भी उसकी ज़िद और कुफ़्र पर मोहलत दे सकता है, लेकिन जब उसका अज़ाब आता है, तो कोई उसे रोक नहीं सकता।
- यह आयत हमें यह चेतावनी देती है कि हमें अपने जीवन में हर समय अल्लाह की आज्ञाकारिता का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अज़ाब उस समय भी आ सकता है जब हम सो रहे हों या आराम कर रहे हों।
- यह हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह के पैग़म्बरों और उनके संदेश को झुठलाना और उनकी अवज्ञा करना विनाश का कारण बनता है, इसलिए हमें उनके मार्ग पर चलना चाहिए।
- यह आयत हमें यह याद दिलाती है कि अल्लाह की रहमत और उसकी पकड़ दोनों उसके नियंत्रण में हैं, और हमें उसकी रहमत की ओर लौटना चाहिए, क्योंकि वह क्षमा करने वाला और दयालु है।
📜 आयत 2-6 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 4
सूरा अल-आराफ आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम लोग बहुत ही कम नसीहत क़ुबूल करते हो और…सूरा आयत 4/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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