अल-आराफ · 4/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
وَكَم مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا فَجَاءَهَا بَأْسُنَا بَيَاتًا أَوْ هُمْ قَائِلُونَ ۝٤
Wa kam min qaryatin ahlaknaahaa fajaaa`ahaa baasunaa bayaatan aw hum qaaa`iloon
📖 हिंदी अर्थ
तुम लोग बहुत ही कम नसीहत क़ुबूल करते हो और क्या (तुम्हें) ख़बर नहीं कि ऐसी बहुत सी बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलाक कर डाला तो हमारा अज़ाब (ऐसे वक्त) आ पहुचा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَرْيَةٍ (क़र्याह): बस्ती, नगर या गाँव।
  • أَهْلَكْنَاهَا (अहलकनाहा): हमने उसे (उसके निवासियों को) विनष्ट कर दिया।
  • بَأْسُنَا (बअ्सुनाः): हमारा कठोर अज़ाब (यातना)।
  • بَيَاتًا (बयातन): रात के समय।
  • قَائِلُونَ (क़ाइलून): दोपहर के समय आराम करने वाले (क़ैलूला करने वाले)।

विस्तृत विवरण:

अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि कितनी ही बस्तियाँ थीं जिन्हें हमने उनके निवासियों के कुफ़्र और पैग़म्बरों को झुठलाने की वजह से विनष्ट कर दिया। जब उन पर हमारा अज़ाब आया, तो वह उनके पास दो अवस्थाओं में से किसी एक अवस्था में आया — या तो रात के समय जब वे सो रहे थे, या दोपहर के समय जब वे क़ैलूला (आराम) कर रहे थे। ये दोनों समय ऐसे होते हैं जब इंसान पूरी तरह से बेख़बर और आराम की हालत में होता है, इसलिए इन समयों में अज़ाब का आना अधिक भयानक और सख्त होता है। जब अज़ाब आया, तो न तो वे उसे टाल सके और न ही उनके बनाए हुए झूठे देवता उन्हें उससे बचा सके। यह उनके कुफ़्र और ज़ुल्म का सीधा परिणाम था, और यह अज़ाब दुनिया में भी उनके लिए रुस्वाई का सबब बना और आख़िरत में भी उनके लिए ज़िल्लत और अज़ाब का कारण बना।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह किसी को भी उसकी ज़िद और कुफ़्र पर मोहलत दे सकता है, लेकिन जब उसका अज़ाब आता है, तो कोई उसे रोक नहीं सकता।
  2. यह आयत हमें यह चेतावनी देती है कि हमें अपने जीवन में हर समय अल्लाह की आज्ञाकारिता का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि अज़ाब उस समय भी आ सकता है जब हम सो रहे हों या आराम कर रहे हों।
  3. यह हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह के पैग़म्बरों और उनके संदेश को झुठलाना और उनकी अवज्ञा करना विनाश का कारण बनता है, इसलिए हमें उनके मार्ग पर चलना चाहिए।
  4. यह आयत हमें यह याद दिलाती है कि अल्लाह की रहमत और उसकी पकड़ दोनों उसके नियंत्रण में हैं, और हमें उसकी रहमत की ओर लौटना चाहिए, क्योंकि वह क्षमा करने वाला और दयालु है।


📜 आयत 2-6 — सूरा अल-आराफ

2كِتَابٌ أُنزِلَ إِلَيْكَ فَلَا يَكُن فِي صَدْرِكَ حَرَجٌ مِّنْهُ لِتُنذِرَ بِهِ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) ये किताब ख़ुदा (क़ुरान) तुम पर इस ग़रज़ से नाज़िल की गई है ताकि तुम उसके ज़रिये से लोगों को अज़ाबे ख़ुदा से डराओ और ईमानदारों के लिए नसीहत का बायस हो
3اتَّبِعُوا مَا أُنزِلَ إِلَيْكُم مِّن رَّبِّكُمْ وَلَا تَتَّبِعُوا مِن دُونِهِ أَوْلِيَاءَ ۗ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
तुम्हारे दिल में उसकी वजह से कोई न तंगी पैदा हो (लोगों) जो तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम पर नाज़िल किया गया है उसकी पैरवी करो और उसके सिवा दूसरे (फर्ज़ी) बुतों (माबुदों) की पैरवी न करो
4وَكَم مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا فَجَاءَهَا بَأْسُنَا بَيَاتًا أَوْ هُمْ قَائِلُونَ
तुम लोग बहुत ही कम नसीहत क़ुबूल करते हो और क्या (तुम्हें) ख़बर नहीं कि ऐसी बहुत सी बस्तियाँ हैं जिन्हें हमने हलाक कर डाला तो हमारा अज़ाब (ऐसे वक्त) आ पहुचा
5فَمَا كَانَ دَعْوَاهُمْ إِذْ جَاءَهُم بَأْسُنَا إِلَّا أَن قَالُوا إِنَّا كُنَّا ظَالِمِينَ
कि वह लोग या तो रात की नींद सो रहे थे या दिन को क़लीला (खाने के बाद का लेटना) कर रहे थे तब हमारा अज़ाब उन पर आ पड़ा तो उनसे सिवाए इसके और कुछ न कहते बन पड़ा कि हम बेशक ज़ालिम थे
6فَلَنَسْأَلَنَّ الَّذِينَ أُرْسِلَ إِلَيْهِمْ وَلَنَسْأَلَنَّ الْمُرْسَلِينَ
फिर हमने तो ज़रूर उन लोगों से जिनकी तरफ पैग़म्बर भेजे गये थे (हर चीज़ का) सवाल करेगें और ख़ुद पैग़म्बरों से भी ज़रूर पूछेगें
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-आराफ 4

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Monday, September 28, 2026

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