अल-आराफ · 52/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَلَقَدْ جِئْنَاهُم بِكِتَابٍ فَصَّلْنَاهُ عَلَىٰ عِلْمٍ هُدًى وَرَحْمَةً لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ۝٥٢
Wa laqad ji`naahum bi Kitaabin fassalnaahu `alaa `ilmin hudanw wa rahmatal liqawminy-yu`miinoon
📖 हिंदी अर्थ
जिस तरह यह लोग (हमारी) आज की हुज़ूरी को भूलें बैठे थे और हमारी आयतों से इन्कार करते थे हालांकि हमने उनके पास (रसूल की मारफत किताब भी भेज दी है)
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَصَّلْنَاهُ: हमने इसे विस्तार से स्पष्ट किया, हर आवश्यक बात को अलग-अलग करके बयान किया।
  • عَلَىٰ عِلْمٍ: अपने पूर्ण ज्ञान के साथ, अर्थात हम जो कुछ भी बयान कर रहे हैं उसे पूरी जानकारी और हिकमत के साथ बयान किया।
  • هُدًى: मार्गदर्शन, जो गुमराही से सीधे रास्ते की ओर ले जाए।
  • رَحْمَةً: दया और रहमत, जो लोगों के लिए भलाई और सफलता का ज़रिया बने।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने इन लोगों (काफ़िरों) के पास एक किताब (क़ुरआन) भेजी, जो हमारे पैग़म्बर मुहम्मद ﷺ पर उतारी गई। यह किताब कोई साधारण किताब नहीं, बल्कि हमने इसे अपने असीम ज्ञान के साथ विस्तार से स्पष्ट किया है—इसमें हर ज़रूरी बात को अलग-अलग करके बयान किया गया है, ताकि लोग इसे आसानी से समझ सकें। इसमें अक़ीदे, इबादत, मामिलात (लेन-देन), अख़लाक़ (आचरण), क़िस्से और नसीहतें सब कुछ शामिल हैं।

यह किताब गुमराही से निकालकर हिदायत (मार्गदर्शन) की ओर ले जाने वाली है और उन लोगों के लिए रहमत है जो अल्लाह पर ईमान लाते हैं और उसके हुक्मों पर अमल करते हैं। इसे सिर्फ़ ईमान वालों के लिए ही हिदायत और रहमत कहा गया है, क्योंकि वही इससे फ़ायदा उठाते हैं। जो लोग इस पर ईमान नहीं लाते, वे इसके नूर से महरूम रहते हैं और यह उनके लिए हुज्जत (प्रमाण) बन जाती है।

फ़ायदे (सबक):

  1. क़ुरआन अल्लाह की ओर से भेजी गई एक ऐसी किताब है जो पूरे ज्ञान और हिकमत पर आधारित है—इसमें कोई कमी या भूल नहीं है, इसलिए इसे पूरे यक़ीन के साथ अपनाना चाहिए।
  2. क़ुरआन का असली फ़ायदा उन्हीं को मिलता है जो ईमान लाते हैं और उस पर अमल करते हैं। ईमान ही वह चाबी है जो इस किताब के ख़ज़ानों को खोलती है।
  3. यह किताब हमारे लिए रहमत है—अगर हम इसे पढ़ें, समझें और उस पर चलें तो यह हमें दुनिया और आख़िरत की भलाई तक पहुँचाएगी।
  4. अल्लाह ने अपनी रहमत से हमें यह किताब दी है, इसलिए हमें इसकी क़द्र करनी चाहिए और इसे अपनी ज़िंदगी में निज़ाम (व्यवस्था) बनाना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 50-54 — अल-आराफ

50وَنَادَىٰ أَصْحَابُ النَّارِ أَصْحَابَ الْجَنَّةِ أَنْ أَفِيضُوا عَلَيْنَا مِنَ الْمَاءِ أَوْ مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ ۚ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ حَرَّمَهُمَا عَلَى الْكَافِرِينَ
और दोज़ख वाले अहले बेहिश्त को (लजाजत से) आवाज़ देगें कि हम पर थोड़ा सा पानी ही उंडेल दो या जो (नेअमतों) खुदा ने तुम्हें दी है उसमें से कुछ (दे डालो दो तो अहले बेहिश्त जवाब में) कहेंगें कि ख़ुदा ने तो जन्नत का खाना पानी काफिरों पर कतई हराम कर दिया है
51الَّذِينَ اتَّخَذُوا دِينَهُمْ لَهْوًا وَلَعِبًا وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ فَالْيَوْمَ نَنسَاهُمْ كَمَا نَسُوا لِقَاءَ يَوْمِهِمْ هَٰذَا وَمَا كَانُوا بِآيَاتِنَا يَجْحَدُونَ
जिन लोगों ने अपने दीन को खेल तमाशा बना लिया था और दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी ने उनको फरेब दिया था तो हम भी आज (क़यामत में) उन्हें (क़सदन) भूल जाएगें
52وَلَقَدْ جِئْنَاهُم بِكِتَابٍ فَصَّلْنَاهُ عَلَىٰ عِلْمٍ هُدًى وَرَحْمَةً لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
जिस तरह यह लोग (हमारी) आज की हुज़ूरी को भूलें बैठे थे और हमारी आयतों से इन्कार करते थे हालांकि हमने उनके पास (रसूल की मारफत किताब भी भेज दी है)
53هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا تَأْوِيلَهُ ۚ يَوْمَ يَأْتِي تَأْوِيلُهُ يَقُولُ الَّذِينَ نَسُوهُ مِن قَبْلُ قَدْ جَاءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّ فَهَل لَّنَا مِن شُفَعَاءَ فَيَشْفَعُوا لَنَا أَوْ نُرَدُّ فَنَعْمَلَ غَيْرَ الَّذِي كُنَّا نَعْمَلُ ۚ قَدْ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
जिसे हर तरह समझ बूझ के तफसीलदार बयान कर दिया है (और वह) ईमानदार लोगों के लिए हिदायत और रहमत है क्या ये लोग बस सिर्फ अन्जाम (क़यामत ही) के मुन्तज़िर है (हालांकि) जिस दिन उसके अन्जाम का (वक्त) आ जाएगा तो जो लोग उसके पहले भूले बैठे थे (बेसाख्ता) बोल उठेगें कि बेशक हमारे परवरदिगार के सब रसूल हक़ लेकर आये थे तो क्या उस वक्त हमारी भी सिफरिश करने वाले हैं जो हमारी सिफारिश करें या हम फिर (दुनिया में) लौटाएं जाएं तो जो जो काम हम करते थे उसको छोड़कर दूसरें काम करें
54إِنَّ رَبَّكُمُ اللَّهُ الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ يُغْشِي اللَّيْلَ النَّهَارَ يَطْلُبُهُ حَثِيثًا وَالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ وَالنُّجُومَ مُسَخَّرَاتٍ بِأَمْرِهِ ۗ أَلَا لَهُ الْخَلْقُ وَالْأَمْرُ ۗ تَبَارَكَ اللَّهُ رَبُّ الْعَالَمِينَ
बेशक उन लोगों ने अपना सख्त घाटा किया और जो इफ़तेरा परदाज़िया किया करते थे वह सब गायब (ग़ल्ला) हो गयीं बेशक तुम्हारा परवरदिगार ख़ुदा ही है जिसके (सिर्फ) 6 दिनों में आसमान और ज़मीन को पैदा किया फिर अर्श के बनाने पर आमादा हुआ वही रात को दिन का लिबास पहनाता है तो (गोया) रात दिन को पीछे पीछे तेज़ी से ढूंढती फिरती है और उसी ने आफ़ताब और माहताब और सितारों को पैदा किया कि ये सब के सब उसी के हुक्म के ताबेदार हैं
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अनुवाद — अल-आराफ 52

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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