अल-मआरिज · 22/44
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मआरिज
إِلَّا الْمُصَلِّينَ ۝٢٢
Illal musalleen
📖 हिंदी अर्थ
मगर जो लोग नमाज़ पढ़ते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِلَّا = सिवाय, के अलावा
  • الْمُصَلِّينَ = नमाज़ पढ़ने वाले, जो नमाज़ की पाबंदी करते हैं

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने इंसान की कमज़ोरियों और बुराइयों का ज़िक्र करने के बाद एक खास गिरोह को इससे मुस्तसना (अलग) किया है। इंसान अपनी फितरत (प्राकृतिक स्वभाव) के कारण जल्दबाज़, बेसब्र और हरकत में लालची होता है। जब उस पर मुसीबत आती है तो वह घबरा जाता है और बेचैन हो जाता है, और जब उसे खुशहाली और राहत मिलती है तो वह बखील (कंजूस) बन जाता है और दूसरों का हक़ रोक लेता है।

लेकिन नमाज़ पढ़ने वाले इस बुराई से बचे हुए हैं। ये वो लोग हैं जो अपनी नमाज़ों की हिफ़ाज़त करते हैं, उन्हें वक़्त पर अदा करते हैं और कोई काम उन्हें नमाज़ से नहीं रोकता। नमाज़ उन्हें बुराई और बेहयाई से रोकती है, उनके दिलों को साफ़ करती है और उन्हें सब्र, शुक्र और अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहने की तालीम देती है।

ये नमाज़ी लोग अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करते हैं। वे अपने माल में अल्लाह का हक़ (ज़कात और सदक़ा) अदा करते हैं, रोज़े रखते हैं, अच्छे काम करते हैं और बुराइयों से दूर रहते हैं। वे अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं और उसकी रहमत की उम्मीद रखते हैं। उनकी नमाज़ सिर्फ़ जिस्मानी इबादत नहीं, बल्कि उनके दिल और रूह की पाकीज़गी का ज़रिया बनती है।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि नमाज़ सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि इंसान को बुराइयों से बचाने वाली ताक़त है। जो लोग नमाज़ की पाबंदी करते हैं, अल्लाह उन्हें बुरे अख़लाक़, लालच, कंजूसी और घबराहट से बचाता है। नमाज़ इंसान को सब्र, शुक्र, इख़लास और अल्लाह की मुहब्बत सिखाती है।

आओ, हम सब अपनी नमाज़ों को सिर्फ़ रस्म न बनाएं, बल्कि उन्हें अपनी ज़िंदगी का असली मक़सद बनाएं। नमाज़ ही वो चीज़ है जो इंसान को इस दुनिया की बुराइयों से बचाकर आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाती है। अल्लाह तआला हमें सच्चे नमाज़ियों में शामिल करे। आमीन।



📜 आयत 20-24 — सूरा अल-मआरिज

20إِذَا مَسَّهُ الشَّرُّ جَزُوعًا
जब उसे तक़लीफ छू भी गयी तो घबरा गया
21وَإِذَا مَسَّهُ الْخَيْرُ مَنُوعًا
और जब उसे ज़रा फराग़ी हासिल हुई तो बख़ील बन बैठा
22إِلَّا الْمُصَلِّينَ
मगर जो लोग नमाज़ पढ़ते हैं
23الَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَائِمُونَ
जो अपनी नमाज़ का इल्तज़ाम रखते हैं
24وَالَّذِينَ فِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ مَّعْلُومٌ
और जिनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले के
अल-मआरिजकुरान सूची
44आयत
मक्कीअवतरण स्थान
22आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 22

सूरा अल-मआरिज आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर जो लोग नमाज़ पढ़ते हैं

सूरा आयत 22/44 — सूरा अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मआरिज सुनें, सूरा अल-मआरिज अनुवाद, सूरा अल-मआरिज mp3, सूरा अल-मआरिज pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए