अल-मआरिज · 28/44
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मआरिज
إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍ ۝٢٨
Inna `azaaba Rabbihim ghairu maamoon
📖 हिंदी अर्थ
बेशक उनको परवरदिगार के अज़ाब से बेख़ौफ न होना चाहिए

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अज़ाब (عذاب): दंड, यातना, सज़ा।
  • ग़ैरु म'मून (غير مأمون): जिससे निःसंदेह और पूर्ण रूप से सुरक्षित न हुआ जा सके, जिसका भय हमेशा बना रहे।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन मोमिनिन की विशेषताओं का वर्णन कर रहे हैं जो अपने रब के अज़ाब से डरते हैं। ये वे लोग हैं जो अपनी नमाज़ों की हिफ़ाज़त करते हैं, अपने माल में ज़कात और फ़ितरा का हक़ अदा करते हैं, और आख़िरत के दिन पर पूरा यक़ीन रखते हैं। उनके दिल हमेशा अल्लाह के अज़ाब से ख़ौफ़ज़दा रहते हैं।

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि उनके रब का अज़ाब ऐसा है जिससे कोई भी व्यक्ति पूर्ण रूप से निडर और सुरक्षित नहीं हो सकता। यानी कोई भी अक़्लमंद इंसान उस अज़ाब से बेख़ौफ़ नहीं हो सकता, क्योंकि वह अज़ाब बहुत सख्त, भयानक और अटल है। यह अज़ाब उन लोगों के लिए है जो अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और उसके हुक्मों को नहीं मानते।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा मोमिन कभी भी अल्लाह की पकड़ से बेख़ौफ़ नहीं होता। वह हमेशा अपने रब से डरता है, अपनी गलतियों पर नदामत करता है और तौबा करता रहता है। यही ख़ौफ़ उसे नेक कामों की तरफ़ राग़िब करता है और गुनाहों से दूर रखता है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का अज़ाब कोई मज़ाक़ नहीं है। जो लोग उससे बेख़ौफ़ हो जाते हैं और गुनाहों में डूबे रहते हैं, वे बड़े नुक़सान में हैं। लेकिन अल्लाह की रहमत भी बहुत वसीअ है। जो लोग उसके अज़ाब से डरते हैं, वही लोग उसकी रहमत के हक़दार बनते हैं। आइए हम अपने दिलों में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करें, अपनी नमाज़ों की पाबंदी करें, अपने माल में से हक़ अदा करें और आख़िरत के दिन की तैयारी करें। याद रखिए, जो लोग अल्लाह से डरते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त और कामयाबी अता करता है।



📜 आयत 26-30 — सूरा अल-मआरिज

26وَالَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ الدِّينِ
और जो लोग रोज़े जज़ा की तस्दीक़ करते हैं
27وَالَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ
और जो लोग अपने परवरदिगार के अज़ाब से डरते रहते हैं
28إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍ
बेशक उनको परवरदिगार के अज़ाब से बेख़ौफ न होना चाहिए
29وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो लोग अपनी शर्मगाहों को अपनी बीवियों और अपनी लौन्डियों के सिवा से हिफाज़त करते हैं
30إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
तो इन लोगों की हरगिज़ मलामत न की जाएगी
अल-मआरिजकुरान सूची
44आयत
मक्कीअवतरण स्थान
28आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 28

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Friday, October 2, 2026

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