अल-मआरिज · 27/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
وَالَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ ۝٢٧
Wallazeena hum min `azaabi Rabbihim mushfiqoon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग अपने परवरदिगार के अज़ाब से डरते रहते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُّشْفِقُونَ: डरने वाले, खौफ खाने वाले, भयभीत रहने वाले।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने उन नेक बंदों की तारीफ कर रहा है जो क़ियामत के दिन और अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं। ये वे लोग हैं जो अपने रब के अज़ाब से हमेशा खौफ में रहते हैं, भले ही उन्होंने अच्छे काम किए हों। वे कभी भी अल्लाह के अज़ाब से बेख़ौफ नहीं होते और न ही उसे हल्का समझते हैं। वे जानते हैं कि अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त है और उससे कोई भी बच नहीं सकता। इसलिए वे हमेशा अल्लाह से डरते हैं और उसकी रहमत की उम्मीद रखते हैं। वे अपने अच्छे आमाल पर इतराते नहीं, बल्कि हमेशा यही सोचते हैं कि कहीं हमारे आमाल क़ुबूल न हों और कहीं हम अज़ाब के हक़दार न बन जाएं। यही खौफ उन्हें गुनाहों से दूर रखता है और नेक कामों पर मज़बूत रखता है।

यह खौफ उन्हें अल्लाह की इबादत में मशगूल रखता है, और वे अपनी ज़िंदगी में हर उस चीज़ से बचते हैं जो अल्लाह के अज़ाब का सबब बने। वे जानते हैं कि अल्लाह का अज़ाब सिर्फ काफिरों के लिए नहीं है, बल्कि गुनाहगार मोमिनीन के लिए भी हो सकता है, इसलिए वे हमेशा अल्लाह से माफी मांगते रहते हैं और अपनी कमियों पर नज़र रखते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा मोमिन कभी भी अल्लाह के अज़ाब से बेखौफ नहीं होता। चाहे उसने कितने ही नेक काम किए हों, वह हमेशा अल्लाह के सामने अपनी कमजोरी और गुनाहों का एहसास रखता है। यही खौफ उसे गुनाहों से बचाता है और नेकी पर साबित क़दम रखता है। अल्लाह तआला ऐसे लोगों से मुहब्बत करता है और उन्हें जन्नत की खुशखबरी देता है। हमें भी चाहिए कि हम अपने अमल पर नाज़ न करें, बल्कि हमेशा अल्लाह से डरते रहें और उसकी रहमत की उम्मीद रखें। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुंचाएगा और अल्लाह के अज़ाब से बचाएगा।



📜 आयत 25-29 — अल-मआरिज

25لِّلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ
लिए एक मुक़र्रर हिस्सा है
26وَالَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ الدِّينِ
और जो लोग रोज़े जज़ा की तस्दीक़ करते हैं
27وَالَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ
और जो लोग अपने परवरदिगार के अज़ाब से डरते रहते हैं
28إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍ
बेशक उनको परवरदिगार के अज़ाब से बेख़ौफ न होना चाहिए
29وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो लोग अपनी शर्मगाहों को अपनी बीवियों और अपनी लौन्डियों के सिवा से हिफाज़त करते हैं
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अनुवाद — अल-मआरिज 27

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सूरा आयत 27/44 — अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मआरिज सुनें, अल-मआरिज अनुवाद, अल-मआरिज mp3, अल-मआरिज pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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