अल-मआरिज · 29/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ ۝٢٩
Wallazeena hum lifuroo jihim haafizoon
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग अपनी शर्मगाहों को अपनी बीवियों और अपनी लौन्डियों के सिवा से हिफाज़त करते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لِفُرُوجِهِمْ (लिफ़ुरूजिहिम): अपनी शर्मगाहों की।
  • حَافِظُونَ (हाफ़िज़ून): रक्षा करने वाले, संरक्षित रखने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला उन मोमिन बंदों की तारीफ़ कर रहे हैं जो अपनी शर्मगाहों की रक्षा करते हैं। यानी वे अपने आप को हर उस चीज़ से बचाते हैं जो अल्लाह ने हराम किया है — चाहे वह ज़िना हो, व्यभिचार हो, या किसी भी प्रकार का अवैध यौन संबंध हो। वे अपनी निगाहों को भी नीची रखते हैं और अपने आप को पाकीज़ा रखते हैं।

यह उन लोगों की विशेषता है जो अल्लाह के करीब रहते हैं और उसकी नाराज़गी से डरते हैं। वे जानते हैं कि शर्मगाह की रक्षा करना ईमान की निशानी है, और अल्लाह ने उनके लिए केवल अपनी पत्नियों और अपनी मिल्कियत वाली (लौंडियों) को हलाल किया है। इन पर कोई गुनाह नहीं, बल्कि यह उनका हक़ है। लेकिन जो कोई इन हदों से आगे बढ़े, वही असली ज़ालिम और गुनाहगार है।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा मोमिन अपनी इज़्ज़त और पाकीज़गी की रक्षा करता है। वह अपनी नफ़्स को काबू में रखता है और अल्लाह की नाराज़गी से बचता है। यही वह लोग हैं जो जन्नत में इज़्ज़त के साथ रहेंगे और अल्लाह की रहमत के हक़दार होंगे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम हमें पाकीज़गी और पवित्रता की तरफ बुलाता है। अल्लाह ने हमारे लिए हलाल रिश्तों को जायज़ किया है ताकि हम अपनी ज़िंदगी को सुकून और इत्मीनान से गुज़ारें। जो लोग इस हद को पार करते हैं, वे न केवल अपने आप को अल्लाह के अज़ाब में डालते हैं बल्कि अपनी ज़िंदगी को भी बर्बाद कर लेते हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी निगाहों को नीची रखें, अपने दिलों को पाक रखें, और अल्लाह के बताए हुए रास्ते पर चलें। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा और अल्लाह की रज़ा का ज़रिया बनेगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अल-मआरिज

27وَالَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ
और जो लोग अपने परवरदिगार के अज़ाब से डरते रहते हैं
28إِنَّ عَذَابَ رَبِّهِمْ غَيْرُ مَأْمُونٍ
बेशक उनको परवरदिगार के अज़ाब से बेख़ौफ न होना चाहिए
29وَالَّذِينَ هُمْ لِفُرُوجِهِمْ حَافِظُونَ
और जो लोग अपनी शर्मगाहों को अपनी बीवियों और अपनी लौन्डियों के सिवा से हिफाज़त करते हैं
30إِلَّا عَلَىٰ أَزْوَاجِهِمْ أَوْ مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ فَإِنَّهُمْ غَيْرُ مَلُومِينَ
तो इन लोगों की हरगिज़ मलामत न की जाएगी
31فَمَنِ ابْتَغَىٰ وَرَاءَ ذَٰلِكَ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْعَادُونَ
तो जो लोग उनके सिवा और के ख़ास्तगार हों तो यही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं
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अनुवाद — अल-मआरिज 29

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Tuesday, August 18, 2026

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