अल-मआरिज · 44/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۚ ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ ۝٤٤
Khaashi`atan absaaruhum tarhaquhum zillah; zaalikal yawmul lazee kaanoo yoo`adoon
📖 हिंदी अर्थ
(निदामत से) उनकी ऑंखें झुकी होंगी उन पर रूसवाई छाई हुई होगी ये वही दिन है जिसका उनसे वायदा किया जाता था
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ख़ाशि'अतन अब्सारुहुम: उनकी आँखें झुकी हुई होंगी, नीचे की ओर देखती होंगी।
  • तरहक़ुहुम ज़िल्लतुन: उन पर अपमान और ज़िल्लत छा जाएगी, वह उन्हें ढक लेगी।
  • यू'अदून: उन्हें वादा दिया जाता था।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन का वर्णन कर रही है जिसका वादा काफ़िरों और मुनकिरों से किया गया था। जिस दिन वे क़ब्रों से निकलेंगे, वे ऐसे भागते हुए आएँगे जैसे दुनिया में वे अपने बनाए हुए झूठे देवताओं की ओर दौड़ते थे। लेकिन उस दिन उनकी सारी शान-ओ-शौकत खत्म हो जाएगी। उनकी आँखें झुकी हुई होंगी, वे किसी की ओर सीधे देखने की हिम्मत नहीं कर पाएँगे। उनके चेहरों पर अपमान और ज़िल्लत की परत छाई होगी, हर तरफ़ से उन्हें रूसवाई और ख़्वारी घेर लेगी।

यह वही दिन है जिसका उन्हें दुनिया में वादा दिया गया था, लेकिन वे उसे मज़ाक़ समझते थे और उसे झुठलाते थे। आज वह दिन उनके सामने आ खड़ा हुआ है, और वे अपनी आँखों से उसका भयानक दृश्य देख रहे हैं।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसका फैसला आकर रहेगा। जो लोग आज अल्लाह की आयतों को नज़रअंदाज़ करते हैं और आख़िरत को भूलकर दुनिया के खेल-तमाशे में लगे हैं, उन्हें उस दिन पछताना पड़ेगा। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है—उसने हमें मौका दिया है कि हम आज अपनी ज़िंदगी सुधार लें, तौबा कर लें, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचने के लिए अच्छे काम करें। जो आज अल्लाह के आगे झुक जाएगा, उसे उस दिन किसी के आगे झुकना नहीं पड़ेगा। यही सबसे बड़ी कामयाबी है—कि हम उस दिन उन लोगों में से न हों जिनकी आँखें झुकी हों और जिन पर ज़िल्लत छाई हो, बल्कि उन लोगों में से हों जिनके चेहरे नूरानी हों और जिन्हें अल्लाह की रहमत मिली हो।

🎧 सुनें

📜 आयत 42-44 — अल-मआरिज

42فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो तुम उनको छोड़ दो कि बातिल में पड़े खेलते रहें यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है उनके सामने आ मौजूद हो
43يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍ يُوفِضُونَ
उसी दिन ये लोग कब्रों से निकल कर इस तरह दौड़ेंगे गोया वह किसी झन्डे की तरफ दौड़े चले जाते हैं
44خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۚ ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ
(निदामत से) उनकी ऑंखें झुकी होंगी उन पर रूसवाई छाई हुई होगी ये वही दिन है जिसका उनसे वायदा किया जाता था
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अनुवाद — अल-मआरिज 44

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Tuesday, August 18, 2026

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