अल-मआरिज · 43/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍ يُوفِضُونَ ۝٤٣
Yawma yakhrujoona minal ajdaasi siraa`an ka anna hum ilaa nusubiny yoofidoon
📖 हिंदी अर्थ
उसी दिन ये लोग कब्रों से निकल कर इस तरह दौड़ेंगे गोया वह किसी झन्डे की तरफ दौड़े चले जाते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अल-अजदास: क़ब्रें (क़ब्रों का बहुवचन)
  • सिरा'अन: बहुत तेज़ी से, दौड़ते हुए
  • नुसुब: वह ऊँचा निशान या मूर्ति जिसे लोग पूजा के लिए खड़ा करते थे (बुत)
  • यूफ़िदून: दौड़ते हुए, बहुत तेज़ी से जाना

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन का चित्रण करती है जब सभी लोग अपनी क़ब्रों से निकलेंगे। वे क़ब्रों से इस तरह निकलेंगे जैसे वे दुनिया में अपने बुतों और मूर्तियों की ओर दौड़ते थे। जिस तरह वे दुनिया में अपने झूठे देवताओं के पास जल्दी-जल्दी जाते थे, उन्हें सम्मान देने और उनके सामने सिर झुकाने के लिए दौड़ते थे, उसी तरह क़ियामत के दिन वे अल्लाह की ओर दौड़ेंगे—लेकिन इस बार उनकी आँखें नीची होंगी, उन पर ज़िल्लत और रुसवाई छाई होगी। वे डरे हुए, घबराए हुए और बेसहारा होंगे।

यह वही दिन है जिसका वादा अल्लाह ने किया था, जिसे दुनिया में वे मज़ाक़ उड़ाया करते थे और झुठलाया करते थे। आज वह दिन सामने होगा और उन्हें अपने किए पर पछतावा होगा, लेकिन पछतावे का वक़्त निकल चुका होगा।

दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):

यह आयत हमें बताती है कि यह दुनिया की ज़िंदगी आख़िरी नहीं है। हर इंसान को एक दिन अपनी क़ब्र से उठना है और अपने रब के सामने हाज़िर होना है। जिस तरह हम दुनिया के कामों में दौड़ते-भागते हैं, क्या हमें उस दिन के लिए भी कुछ नहीं करना चाहिए? जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत के लिए दौड़ते हैं, उनके लिए उस दिन खुशखबरी है। लेकिन जो लोग दुनिया के झूठे माबूदों (धन, शोहरत, मर्तबा) के पीछे भागते रहे, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा।

आओ हम अपनी ज़िंदगी को इस तरह गुज़ारें कि उस दिन हमारा चेहरा रौशन हो, हमारी आँखें ऊपर उठी हों और हम अल्लाह की रहमत के साये में हों। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।



📜 आयत 41-44 — अल-मआरिज

41عَلَىٰ أَن نُّبَدِّلَ خَيْرًا مِّنْهُمْ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ
कि उनके बदले उनसे बेहतर लोग ला (बसाएँ) और हम आजिज़ नहीं हैं
42فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا وَيَلْعَبُوا حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي يُوعَدُونَ
तो तुम उनको छोड़ दो कि बातिल में पड़े खेलते रहें यहाँ तक कि जिस दिन का उनसे वायदा किया जाता है उनके सामने आ मौजूद हो
43يَوْمَ يَخْرُجُونَ مِنَ الْأَجْدَاثِ سِرَاعًا كَأَنَّهُمْ إِلَىٰ نُصُبٍ يُوفِضُونَ
उसी दिन ये लोग कब्रों से निकल कर इस तरह दौड़ेंगे गोया वह किसी झन्डे की तरफ दौड़े चले जाते हैं
44خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۚ ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الَّذِي كَانُوا يُوعَدُونَ
(निदामत से) उनकी ऑंखें झुकी होंगी उन पर रूसवाई छाई हुई होगी ये वही दिन है जिसका उनसे वायदा किया जाता था
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अनुवाद — अल-मआरिज 43

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Tuesday, August 18, 2026

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