नूह · 10/28
अनुवाद उच्चारण — नूह
فَقُلْتُ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ إِنَّهُ كَانَ غَفَّارًا ۝١٠
Faqultus taghfiroo Rabakam innahoo kaana Ghaffaaraa
📖 हिंदी अर्थ
अपने परवरदिगार से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • اسْتَغْفِرُوا – क्षमा माँगो, अपने पापों से तौबा करो।
  • غَفَّارًا – अत्यंत क्षमाशील, जो बार-बार क्षमा करने वाला हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को समझाने के लिए हर संभव तरीक़ा अपनाया—कभी उन्होंने उन्हें आहिस्ता से बुलाया, कभी खुले तौर पर, कभी व्यक्तिगत रूप से और कभी सार्वजनिक रूप से। जब उन्होंने देखा कि उनकी क़ौम का ज़्यादातर हिस्सा अब भी अज्ञानता और ज़िद में डूबा हुआ है, तो उन्होंने उन्हें सबसे बड़ी और सबसे आसान राह दिखाई—वह राह जो अल्लाह के दरवाज़े तक सीधे पहुँचती है।

उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "तुम अपने रब से माफ़ी माँगो, उसकी ओर लौट आओ, अपने कु़फ़्र और गुनाहों से तौबा करो।" यह कोई सिर्फ़ ज़बानी दुआ नहीं थी, बल्कि यह उनके दिलों को पाक करने और उनकी ज़िंदगी बदलने की कुंजी थी। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि वह غَفَّارًا है—यानी वह ऐसा क्षमाशील है जो बार-बार क्षमा करता है, चाहे गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों। जो भी बंदा सच्चे दिल से उसकी ओर लौटता है, अल्लाह उसके सारे पाप धो डालता है और उसे नई ज़िंदगी देता है।

इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। अल्लाह तआला का दरवाज़ा हमेशा खुला है। चाहे हमसे कितनी भी ग़लतियाँ हुई हों, चाहे हम कितनी भी दूर चले गए हों, बस एक सच्ची तौबा और इस्तिग़फ़ार उसे हमारी तरफ खींच लाता है। वह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और चाहता है कि वे उसकी रहमत की तरफ लौट आएँ।

याद रखिए, इस्तिग़फ़ार सिर्फ़ गुनाहों की माफ़ी का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह रिज़्क़ में बरकत, बारिश की रहमत, औलाद में इज़ाफ़ा और हर मुसीबत से निजात का ज़रिया भी है। जैसा कि हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने आगे की आयात में बताया कि इस्तिग़फ़ार से अल्लाह आसमान से मूसलाधार बारिश भेजता है, माल और औलाद में बढ़ोतरी करता है और बाग़ व नहरें अता करता है।

तो आइए, हम भी अपनी ज़िंदगी में इस अमल को अपनाएँ। हर सुबह-शाम, हर नमाज़ के बाद, हर मुश्किल में और हर आसानी में अल्लाह से माफ़ी माँगते रहें। यह वह दुआ है जो हमारे दिलों को सुकून देती है, हमारे रिज़्क़ में बरकत देती है और हमें अल्लाह का प्यारा बंदा बनाती है। अल्लाह तआला हम सबको सच्ची तौबा और इस्तिग़फ़ार की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — नूह

8ثُمَّ إِنِّي دَعَوْتُهُمْ جِهَارًا
फिर मैंने उनको बिल एलान बुलाया फिर उनको ज़ाहिर ब ज़ाहिर समझाया
9ثُمَّ إِنِّي أَعْلَنتُ لَهُمْ وَأَسْرَرْتُ لَهُمْ إِسْرَارًا
और उनकी पोशीदा भी फ़हमाईश की कि मैंने उनसे कहा
10فَقُلْتُ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ إِنَّهُ كَانَ غَفَّارًا
अपने परवरदिगार से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है
11يُرْسِلِ السَّمَاءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا
(और) तुम पर आसमान से मूसलाधार पानी बरसाएगा
12وَيُمْدِدْكُم بِأَمْوَالٍ وَبَنِينَ وَيَجْعَل لَّكُمْ جَنَّاتٍ وَيَجْعَل لَّكُمْ أَنْهَارًا
और माल और औलाद में तरक्क़ी देगा, और तुम्हारे लिए बाग़ बनाएगा, और तुम्हारे लिए नहरें जारी करेगा
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अनुवाद — नूह 10

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Tuesday, August 18, 2026

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