नूह · 9/28
अनुवाद उच्चारण — नूह
ثُمَّ إِنِّي أَعْلَنتُ لَهُمْ وَأَسْرَرْتُ لَهُمْ إِسْرَارًا ۝٩
Summaa inneee a`lantu lahum wa asrartu lahum israaraa
📖 हिंदी अर्थ
और उनकी पोशीदा भी फ़हमाईश की कि मैंने उनसे कहा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَعْلَنتُ: मैंने ऊँची आवाज़ में / खुले तौर पर घोषित किया।
  • أَسْرَرْتُ: मैंने चुपके से / गुप्त रूप से कहा।
  • إِسْرَارًا: बार-बार और पूरी तरह से गुप्त रूप से (बल देने के लिए)।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम को सीधे रास्ते पर लाने के लिए हर संभव तरीक़ा अपना रहे थे। वे कहते हैं: "फिर मैंने उन्हें खुले तौर पर बुलाया और उनसे चुपके-चुपके भी बात की।" यानी उन्होंने दावत का तरीक़ा बदल-बदल कर इस्तेमाल किया—कभी ऊँची आवाज़ में, कभी धीमे स्वर में, कभी अकेले में, कभी सबके सामने। उनका उद्देश्य था कि किसी भी हालत में लोगों के दिलों में ईमान की रोशनी पहुँच जाए। यह एक बेहतरीन दावती उसूल है कि दावत में हालात और लोगों की मनोदशा के हिसाब से अंदाज़ बदलना चाहिए।

यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छाई की तरफ बुलाने में सब्र, हिकमत और तरह-तरह के तरीक़ों की ज़रूरत होती है। हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने न सिर्फ़ दिन-रात मेहनत की, बल्कि अपनी दावत को हर लिहाज़ से मुकम्मल किया—खुले तौर पर भी और गुप्त रूप से भी। यह उनकी उस महान रूह और जज़्बे को दिखाता है जो हर नबी और दावत देने वाले में होनी चाहिए।

आज हमारे लिए भी यही पैग़ाम है कि जब हम किसी को अच्छी बात समझाएँ, तो निराश न हों। कभी सीधे और साफ़ तौर पर कहें, कभी नरमी और प्यार से, कभी अकेले में नसीहत करें, कभी सबके सामने। अल्लाह के रसूलों का तरीक़ा यही था—हर दिल तक पैग़ाम पहुँचाने की कोशिश। यही सच्ची मुहब्बत है कि हम अपने भाइयों की हिदायत के लिए हर जायज़ ज़रिया इस्तेमाल करें, क्योंकि हिदायत की तौफ़ीक़ अल्लाह के हाथ में है, लेकिन कोशिश हमारी ज़िम्मेदारी है।

याद रखें, जब नूह (अलैहिस्सलाम) ने यह सब किया, तो अल्लाह ने उन्हें कामयाबी दी और उनकी दावत का असर सदियों तक क़ायम रहा। हमें भी अपने घर, समाज और दोस्तों में अच्छाई फैलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी चाहिए, और अल्लाह से दुआ करनी चाहिए कि वह हमारी कोशिशों को क़बूल फरमाए।

🎧 सुनें

📜 आयत 7-11 — नूह

7وَإِنِّي كُلَّمَا دَعَوْتُهُمْ لِتَغْفِرَ لَهُمْ جَعَلُوا أَصَابِعَهُمْ فِي آذَانِهِمْ وَاسْتَغْشَوْا ثِيَابَهُمْ وَأَصَرُّوا وَاسْتَكْبَرُوا اسْتِكْبَارًا
और मैने जब उनको बुलाया कि (ये तौबा करें और) तू उन्हें माफ कर दे तो उन्होने अपने कानों में उंगलियां दे लीं और मुझसे छिपने को कपड़े ओढ़ लिए और अड़ गए और बहुत शिद्दत से अकड़ बैठे
8ثُمَّ إِنِّي دَعَوْتُهُمْ جِهَارًا
फिर मैंने उनको बिल एलान बुलाया फिर उनको ज़ाहिर ब ज़ाहिर समझाया
9ثُمَّ إِنِّي أَعْلَنتُ لَهُمْ وَأَسْرَرْتُ لَهُمْ إِسْرَارًا
और उनकी पोशीदा भी फ़हमाईश की कि मैंने उनसे कहा
10فَقُلْتُ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ إِنَّهُ كَانَ غَفَّارًا
अपने परवरदिगार से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है
11يُرْسِلِ السَّمَاءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا
(और) तुम पर आसमान से मूसलाधार पानी बरसाएगा
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अनुवाद — नूह 9

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सूरा आयत 9/28 — नूह نوح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: नूह सुनें, नूह अनुवाद, नूह mp3, नूह pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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