Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بِسَاطًا: बिछाया हुआ, फैलाया हुआ, समतल और आरामदायक बिस्तर के समान।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर अपनी असीम रहमत और एहसान का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि उसने इस धरती को तुम्हारे लिए एक बिछौने (बिसात) के समान बनाया है। यानी उसने ज़मीन को इस तरह फैलाया और समतल किया है कि तुम उस पर आराम से रह सको, चल-फिर सको, सो सको और अपनी ज़रूरतें पूरी कर सको। जिस तरह एक माँ अपने बच्चे के लिए नरम और साफ बिछौना बिछाती है, उसी तरह अल्लाह ने इस कठोर धरती को तुम्हारे लिए नरम, सहनशील और रहने योग्य बनाया है।
यह ज़मीन न तो बहुत सख्त है कि उस पर खेती न हो सके, और न ही बहुत नरम है कि उस पर चलना मुश्किल हो। अल्लाह ने इसे इस तरह बनाया है कि यह तुम्हारे कदमों के नीचे दब जाती है, पानी सोख लेती है, और अपने अंदर से अनाज, फल और तरह-तरह की नेमतें पैदा करती है। यही नहीं, उसने इसमें पहाड़ों को मेखों की तरह गाड़ दिया ताकि यह डगमगाए नहीं, नदियाँ और चश्मे जारी किए ताकि तुम पानी पी सको, और रास्ते बनाए ताकि तुम एक जगह से दूसरी जगह आ-जा सको।
यह आयत हमें अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं कि यह विशाल धरती किस तरह हमारे लिए बिछाई गई है, तो हमें अपने रब की मुहब्बत और एहसान याद आता है। क्या यही अल्लाह हमें क़ब्र से दोबारा नहीं उठाएगा? जिसने इस बड़ी ज़मीन को आसानी से बिछाया, उसके लिए हमें दोबारा ज़िंदा करना और भी आसान है। यही वह अल्लाह है जिसने हमें यह सब नेमतें दीं, तो क्या हमें उसकी इबादत नहीं करनी चाहिए? क्या हमें उसका शुक्र अदा नहीं करना चाहिए?
प्यारे भाइयो और बहनो! जब भी तुम ज़मीन पर चलो, उस पर बैठो, या उसकी पैदावार खाओ, तो याद करो कि यह सब उस रहीम व करीम अल्लाह का इनाम है। उसने यह सब किसी क़ीमत पर नहीं दिया, बल्कि सिर्फ अपनी रहमत से दिया। तो क्या हमें चाहिए कि हम उसकी नाफ़रमानी करें? हरगिज़ नहीं! हमें चाहिए कि उसका शुक्र अदा करें, उसकी इबादत करें और उसके बताए हुए रास्ते पर चलें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों। यह ज़मीन हमारे लिए सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि अल्लाह की महानता और उसकी मुहब्बत की निशानी है।
📜 आयत 17-21 — सूरा नूह
अनुवाद — नूह 19
सूरा नूह आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ही ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फ़र्श बनायासूरा आयत 19/28 — सूरा नूह نوح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा नूह सुनें, सूरा नूह अनुवाद, सूरा नूह mp3, सूरा नूह pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा नूह
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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