Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- सुबुलन (سُبُلًا): रास्ते, मार्ग।
- फ़िजाजन (فِجَاجًا): चौड़े, विशाल और खुले रास्ते।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी उस महान शक्ति और बेपनाह रहमत का ज़िक्र किया है, जिसने इस धरती को इंसान के लिए एक आरामदेह और कामगार बिस्तर बनाया है। उसने ज़मीन को इस तरह बिछाया कि वह तुम्हारे लिए नरम और सहनशील है, और उसमें ऐसे चौड़े-चौड़े रास्ते बनाए, ताकि तुम उन पर चलकर अपनी रोज़ी कमाओ, अपने काम-काज पूरे करो, और एक शहर से दूसरे शहर, एक देश से दूसरे देश तक आसानी से पहुँच सको।
यह अल्लाह की उस रहमत का हिस्सा है जिसका ज़िक्र हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को समझाने के लिए किया था। उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि देखो, तुम्हारे रब ने तुम्हें ज़मीन से पैदा किया, फिर उसी में लौटाएगा, और फिर उसी से निकालेगा। यही नहीं, उसने ज़मीन को तुम्हारे लिए हमवार और फैलाए हुए बनाया, ताकि तुम उसके चौड़े रास्तों पर चलो। यह सब कुछ उसकी क़ुदरत और मेहरबानी की निशानियाँ हैं, फिर भी इंसान उसका शुक्र अदा नहीं करता और उसकी इबादत से मुँह मोड़ लेता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि ज़मीन पर चलना-फिरना, काम-काज करना और रोज़ी कमाना कोई अलग चीज़ नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की दी हुई नेमत का इस्तेमाल है। जो इंसान इन रास्तों पर चलकर हलाल कमाई करता है, वह अल्लाह की इबादत ही कर रहा है, बशर्ते उसका इरादा नेक हो और वह अल्लाह की हदों का ख़याल रखे। अल्लाह ने ज़मीन को इस क़ाबिल बनाया है कि वह तुम्हें अपनी गोद में जगह दे, तुम्हारे लिए रास्ते खोले, और तुम्हारी ज़रूरतों का सामान उपलब्ध कराए।
तो फिर इन नेमतों को देखकर हमें अपने रब का शुक्रगुज़ार होना चाहिए, उसकी इबादत में लगे रहना चाहिए, और उसी से मदद माँगनी चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया की भलाई और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह ने हमें ज़मीन पर चलने के लिए रास्ते दिए हैं, तो हमें भी उसके दिखाए हुए सीधे रास्ते (इस्लाम) पर चलना चाहिए, क्योंकि यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
📜 आयत 18-22 — सूरा नूह
अनुवाद — नूह 20
सूरा नूह आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि तुम उसके बड़े बड़े कुशादा रास्तों में चलो फिरोसूरा आयत 20/28 — सूरा नूह نوح (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा नूह सुनें, सूरा नूह अनुवाद, सूरा नूह mp3, सूरा नूह pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा नूह
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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