अल-जिन्न · 3/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जिन्न
وَأَنَّهُ تَعَالَىٰ جَدُّ رَبِّنَا مَا اتَّخَذَ صَاحِبَةً وَلَا وَلَدًا ۝٣
Wa annahoo Ta`aalaa jaddu Rabbinaa mat takhaza saahibatanw wa la waladaa
📖 हिंदी अर्थ
और ये कि हमारे परवरदिगार की शान बहुत बड़ी है उसने न (किसी को) बीवी बनाया और न बेटा बेटी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَعَالَى جَدُّ رَبِّنَا: हमारे रब की महानता, बुज़ुर्गी और शान बहुत ऊँची है।
  • صَاحِبَةً: पत्नी, जीवन-साथी।
  • وَلَدًا: संतान, बेटा।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में जिन्नों के उस समूह का ज़िक्र है, जिन्होंने क़ुरआन की आयतें सुनकर ईमान लाया और अपनी क़ौम को उपदेश देते हुए यह सच्चाई बयान की। वे कह रहे हैं कि हमने यह बात निश्चित रूप से जान ली है कि हमारे रब की शान और महानता बहुत ऊँची है। वह हर कमज़ोरी, हर दोष और हर उस चीज़ से पाक है जो उसकी महिमा के अनुकूल नहीं। उसने किसी को अपनी पत्नी नहीं बनाया और न ही उसकी कोई संतान है। यह उन मुशरिकों का खंडन है जो फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहते थे, या यहूद-नसारा की तरह कहते थे कि उज़ैर या मसीह अल्लाह के बेटे हैं। अल्लाह इन सब बातों से बिल्कुल पाक और मुकद्दस है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ज़ात में कोई कमी नहीं, वह हर ऐब से पाक है। उसकी रचना में कोई साझीदार नहीं, न कोई पत्नी और न कोई संतान। वह अकेला है, बेनियाज़ है, और सारी कायनात उसी की मिल्कियत है। जिन्नों ने यह कहकर अपने ईमान की गहराई और तौहीद की समझ को पेश किया, और यही सबसे बड़ी सच्चाई है जो इंसान और जिन्न दोनों को अपने रब के सामने झुकना सिखाती है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की पवित्रता और अल्लाह की बुज़ुर्गी पर ग़ौर करने की तरफ़ बुलाती है। जब जिन्नात — जो इंसानों से छिपे हुए हैं — क़ुरआन सुनकर ईमान ले आए और उन्होंने अल्लाह की पाकी का इक़रार किया, तो हम इंसानों को और अधिक सोचना चाहिए कि जिस किताब ने जिन्नों को बदल दिया, वह कितनी सच्ची और हिदायत वाली किताब है। यह आयत हमें उस रब की तरफ़ बुलाती है जो हर कमी से पाक है, जो सबका पालनहार है, और जिसने हमें इसलिए पैदा किया ताकि हम उसी की इबादत करें। उसकी महानता को समझकर हम अपने दिलों को उसकी मुहब्बत से भर दें, और उसके सिवा किसी से कोई उम्मीद न रखें। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अपने रब की शान को पहचानें, उसकी पाकी बयान करें, और उसी के आगे सिर झुकाएँ।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-जिन्न

1قُلْ أُوحِيَ إِلَيَّ أَنَّهُ اسْتَمَعَ نَفَرٌ مِّنَ الْجِنِّ فَقَالُوا إِنَّا سَمِعْنَا قُرْآنًا عَجَبًا
(ऐ रसूल लोगों से) कह दो कि मेरे पास 'वही' आयी है कि जिनों की एक जमाअत ने (क़ुरान को) जी लगाकर सुना तो कहने लगे कि हमने एक अजीब क़ुरान सुना है
2يَهْدِي إِلَى الرُّشْدِ فَآمَنَّا بِهِ ۖ وَلَن نُّشْرِكَ بِرَبِّنَا أَحَدًا
जो भलाई की राह दिखाता है तो हम उस पर ईमान ले आए और अब तो हम किसी को अपने परवरदिगार का शरीक न बनाएँगे
3وَأَنَّهُ تَعَالَىٰ جَدُّ رَبِّنَا مَا اتَّخَذَ صَاحِبَةً وَلَا وَلَدًا
और ये कि हमारे परवरदिगार की शान बहुत बड़ी है उसने न (किसी को) बीवी बनाया और न बेटा बेटी
4وَأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ سَفِيهُنَا عَلَى اللَّهِ شَطَطًا
और ये कि हममें से बाज़ बेवकूफ ख़ुदा के बारे में हद से ज्यादा लग़ो बातें निकाला करते थे
5وَأَنَّا ظَنَنَّا أَن لَّن تَقُولَ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا
और ये कि हमारा तो ख्याल था कि आदमी और जिन ख़ुदा की निस्बत झूठी बात नहीं बोल सकते
अल-जिन्नकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-जिन्न 3

सूरा अल-जिन्न आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये कि हमारे परवरदिगार की शान बहुत बड़ी है…

सूरा आयत 3/28 — सूरा अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जिन्न सुनें, सूरा अल-जिन्न अनुवाद, सूरा अल-जिन्न mp3, सूरा अल-जिन्न pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.





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Wednesday, September 30, 2026

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