अल-जिन्न · 5/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जिन्न
وَأَنَّا ظَنَنَّا أَن لَّن تَقُولَ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۝٥
Wa annaa zanannaaa al lan taqoolal insu wal jinnu `alal laahi kazibaa
📖 हिंदी अर्थ
और ये कि हमारा तो ख्याल था कि आदमी और जिन ख़ुदा की निस्बत झूठी बात नहीं बोल सकते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ظَنَنَّا: हमने अनुमान लगाया, समझा
  • لَن تَقُولَ: कभी नहीं कहेंगे
  • عَلَى اللَّهِ كَذِبًا: अल्लाह पर झूठ बोलना (अल्लाह के बारे में झूठी बातें कहना)

तफ़सीर:

यह आयत जिन्नों के उस समूह का कथन है जिन्होंने पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की तिलावत सुनी और ईमान ले आए। वे कह रहे हैं कि हमने पहले यही समझा था कि इंसान और जिन्न में से कोई भी अल्लाह के बारे में झूठ नहीं बोल सकता। हमें यह विश्वास था कि कोई भी प्राणी अल्लाह पर झूठी बातें थोपने की हिम्मत नहीं कर सकता।

लेकिन जब हमने मशरिकीन (बहुदेववादियों) को यह कहते सुना कि अल्लाह की पत्नी और संतान है, तो हम उनकी इन बातों को सच मान बैठे और उनके पीछे चल पड़े। हमने उनके इस झूठ को सच समझ लिया, क्योंकि हमें यह गुमान था कि इंसान और जिन्न अल्लाह के बारे में झूठी बातें नहीं कह सकते। यह हमारी भूल थी कि हमने बिना सोचे-समझे उनकी बातों को सच मान लिया और अल्लाह के बारे में गलत धारणाएँ अपना लीं।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें किसी भी बात को बिना सत्यापन के नहीं मान लेना चाहिए, खासकर अल्लाह के बारे में। अल्लाह पाक है और उसकी पवित्रता के खिलाफ कोई भी बात कहना बहुत बड़ा पाप है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के बारे में वही बातें कहें जो उसने खुद अपने पैगंबरों के माध्यम से बताई हैं।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अंधी पैरवी और बिना सोचे-समझे दूसरों की बातों को मान लेना कितना खतरनाक है। जिन्नों ने भी जब सच्चाई सुनी तो वे ईमान ले आए और अपनी गलती का एहसास किया। हमें भी चाहिए कि हम सत्य की खोज करें और उसे अपनाएँ, चाहे वह हमारे पुराने विश्वासों के खिलाफ ही क्यों न हो।

अल्लाह तआला अपनी पवित्रता और महानता में अकेला है, उसका कोई साथी नहीं, कोई संतान नहीं। वह हर कमी से पाक है। यही सच्चा ईमान है और यही वह रास्ता है जो हमें सच्ची सफलता तक पहुँचाता है।



📜 आयत 3-7 — सूरा अल-जिन्न

3وَأَنَّهُ تَعَالَىٰ جَدُّ رَبِّنَا مَا اتَّخَذَ صَاحِبَةً وَلَا وَلَدًا
और ये कि हमारे परवरदिगार की शान बहुत बड़ी है उसने न (किसी को) बीवी बनाया और न बेटा बेटी
4وَأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ سَفِيهُنَا عَلَى اللَّهِ شَطَطًا
और ये कि हममें से बाज़ बेवकूफ ख़ुदा के बारे में हद से ज्यादा लग़ो बातें निकाला करते थे
5وَأَنَّا ظَنَنَّا أَن لَّن تَقُولَ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا
और ये कि हमारा तो ख्याल था कि आदमी और जिन ख़ुदा की निस्बत झूठी बात नहीं बोल सकते
6وَأَنَّهُ كَانَ رِجَالٌ مِّنَ الْإِنسِ يَعُوذُونَ بِرِجَالٍ مِّنَ الْجِنِّ فَزَادُوهُمْ رَهَقًا
और ये कि आदमियों में से कुछ लोग जिन्नात में से बाज़ लोगों की पनाह पकड़ा करते थे तो (इससे) उनकी सरकशी और बढ़ गयी
7وَأَنَّهُمْ ظَنُّوا كَمَا ظَنَنتُمْ أَن لَّن يَبْعَثَ اللَّهُ أَحَدًا
और ये कि जैसा तुम्हारा ख्याल है वैसा उनका भी एतक़ाद था कि ख़ुदा हरगिज़ किसी को दोबारा नहीं ज़िन्दा करेगा
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अनुवाद — अल-जिन्न 5

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Tuesday, September 29, 2026

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