अल-जिन्न · 6/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-जिन्न
وَأَنَّهُ كَانَ رِجَالٌ مِّنَ الْإِنسِ يَعُوذُونَ بِرِجَالٍ مِّنَ الْجِنِّ فَزَادُوهُمْ رَهَقًا ۝٦
Wa annahoo kaana rijaa lum minal insi ya`oozoona birijaalim minal jinni fazaa doohum rahaqaa
📖 हिंदी अर्थ
और ये कि आदमियों में से कुछ लोग जिन्नात में से बाज़ लोगों की पनाह पकड़ा करते थे तो (इससे) उनकी सरकशी और बढ़ गयी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَعُوذُونَ: पनाह माँगते थे, शरण लेते थे।
  • رَهَقًا: अत्याचार, गुनाह, या डर और खौफ़ में अज़ीम इज़ाफ़ा।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला जिन्नात के उस समूह के क़ौल को नक़्ल करने के बाद ख़ुद फ़रमाता है कि जाहिलियत के ज़माने में इंसानों में से कुछ लोग जब किसी वीराने या ख़ौफ़नाक मक़ाम पर पहुँचते थे, तो वे जिन्नात के सरदारों की पनाह लेते थे। वे कहते थे: "मैं इस वादी के सरदार की पनाह माँगता हूँ उसके बेवक़ूफ़ साथियों के शर से।" मगर इस पनाह माँगने का नतीजा यह हुआ कि जिन्नात के रुतबे में इज़ाफ़ा हुआ और उनका ग़ुरूर, सरकशी और ज़ुल्म और बढ़ गया। उन्होंने इंसानों के इस डर को देखकर और अधिक ख़ौफ़ और रोब फैलाया, यहाँ तक कि कुछ जिन्नों ने यह दावा भी कर दिया कि हम इंसानों और जिन्नों दोनों पर हुकूमत करते हैं। इस तरह इंसानों की यह ग़लत आदत न सिर्फ़ उनके लिए शिर्क का बाब बनी, बल्कि जिन्नात की शरारत और सरकशी में भी इज़ाफ़ा हुआ।

यह आयत उस शिर्क की मज़म्मत करती है जो जाहिलियत में रिवाज था — यानी अल्लाह के सिवा किसी और से पनाह माँगना। यह सबसे बड़ा शिर्क है, जिसे अल्लाह तआला माफ़ नहीं करता जब तक बंदा सच्ची तौबा न करे। इस आयत में उन लोगों के लिए सख़्त तनबीह है जो आज भी जिन्नात, सय्यदों, पीरों, या किसी मख़लूक़ से पनाह माँगते हैं, या साहिरों और नजूमियों के पास जाते हैं। यह सब जाहिलियत की रस्में हैं और इंसान को अल्लाह की पनाह से महरूम कर देती हैं।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! याद रखिए, पनाह और हिफ़ाज़त सिर्फ़ अल्लाह ही दे सकता है। वही सबसे बड़ा हाफ़िज़ है, वही सबसे मज़बूत सहारा है। जब कभी डर या मुसीबत आए, तो सीधे अल्लाह से माँगिए — "أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ" (मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमात की पनाह माँगता हूँ उसकी मख़लूक़ात के शर से)। यह दुआ हमें सिखाई गई है और यही सबसे असरदार है। अल्लाह से सीधा रिश्ता जोड़िए, उसी पर भरोसा कीजिए — क्योंकि जिसने अल्लाह पर भरोसा किया, अल्लाह उसके लिए काफ़ी है। और जो अल्लाह के सिवा किसी और की पनाह लेता है, वह न तो ख़ुद बचता है और न ही दूसरों को बचा सकता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को शिर्क से पाक करें और ख़ालिस तौहीद पर क़ायम रहें — यही हमारी कामयाबी और नजात की कुंजी है।



📜 आयत 4-8 — सूरा अल-जिन्न

4وَأَنَّهُ كَانَ يَقُولُ سَفِيهُنَا عَلَى اللَّهِ شَطَطًا
और ये कि हममें से बाज़ बेवकूफ ख़ुदा के बारे में हद से ज्यादा लग़ो बातें निकाला करते थे
5وَأَنَّا ظَنَنَّا أَن لَّن تَقُولَ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا
और ये कि हमारा तो ख्याल था कि आदमी और जिन ख़ुदा की निस्बत झूठी बात नहीं बोल सकते
6وَأَنَّهُ كَانَ رِجَالٌ مِّنَ الْإِنسِ يَعُوذُونَ بِرِجَالٍ مِّنَ الْجِنِّ فَزَادُوهُمْ رَهَقًا
और ये कि आदमियों में से कुछ लोग जिन्नात में से बाज़ लोगों की पनाह पकड़ा करते थे तो (इससे) उनकी सरकशी और बढ़ गयी
7وَأَنَّهُمْ ظَنُّوا كَمَا ظَنَنتُمْ أَن لَّن يَبْعَثَ اللَّهُ أَحَدًا
और ये कि जैसा तुम्हारा ख्याल है वैसा उनका भी एतक़ाद था कि ख़ुदा हरगिज़ किसी को दोबारा नहीं ज़िन्दा करेगा
8وَأَنَّا لَمَسْنَا السَّمَاءَ فَوَجَدْنَاهَا مُلِئَتْ حَرَسًا شَدِيدًا وَشُهُبًا
और ये कि हमने आसमान को टटोला तो उसको भी बहुत क़वी निगेहबानों और शोलो से भरा हुआ पाया
अल-जिन्नकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — अल-जिन्न 6

सूरा अल-जिन्न आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये कि आदमियों में से कुछ लोग जिन्नात में…

सूरा आयत 6/28 — सूरा अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जिन्न सुनें, सूरा अल-जिन्न अनुवाद, सूरा अल-जिन्न mp3, सूरा अल-जिन्न pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए