Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ظَنُّوا: उन्होंने अनुमान लगाया / ख़याल किया
- كَمَا ظَنَنتُمْ: जैसा तुमने अनुमान लगाया
- أَن لَّن يَبْعَثَ اللَّهُ أَحَدًا: कि अल्लाह किसी को (मृत्यु के बाद) दोबारा नहीं उठाएगा
विस्तृत व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला जिन्नों के उस क़ौल को बयान कर रहे हैं जो उन्होंने क़ुरआन सुनने के बाद कहा था। जिन्नों की एक जमात ने अपनी क़ौम को संबोधित करते हुए कहा कि हमने यह अद्भुत क़ुरआन सुना है जो सीधे रास्ते की ओर मार्गदर्शन करता है, और हम उस पर ईमान ले आए।
इस आयत में जिन्नों ने यह स्वीकार किया कि पहले हम (जिन्न) भी उसी ग़लतफ़हमी में थे जिसमें कुफ़्फ़ारे इंस (मानव) थे — यानी हम सब यही समझते थे कि अल्लाह तआला मृत्यु के बाद किसी को दोबारा नहीं उठाएगा, न कोई हिसाब होगा, न कोई जज़ा (बदला) मिलेगा। यह उनकी उस समय की सोच थी जब उन्होंने क़ुरआन नहीं सुना था और वे अज्ञानता और गुमराही में डूबे हुए थे।
यहाँ अल्लाह तआला जिन्नों के इस इक़रार (स्वीकारोक्ति) को बयान कर रहे हैं ताकि इंसानों को भी सबक़ मिले कि जिन्नों ने भी जब सच्चाई सुनी तो उसे क़बूल कर लिया, और अपनी पुरानी ग़लतफ़हमियों से तौबा कर ली। यह उन लोगों के लिए बड़ी नसीहत है जो आज भी क़ियामत, हिसाब और आख़िरत के दिन को झुठलाते हैं।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि:
- अल्लाह का भेजा हुआ सच्चा ज्ञान (क़ुरआन) इंसानों और जिन्नों दोनों के लिए मार्गदर्शन है।
- मृत्यु के बाद दोबारा उठाया जाना, हिसाब और जज़ा — यह अल्लाह की सुन्नत (व्यवस्था) है, जिस पर ईमान लाना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है।
- जब सच्चाई सामने आ जाए तो उसे क़बूल करने में देरी नहीं करनी चाहिए, चाहे पहले हम कितनी ही ग़लतफ़हमियों में क्यों न रहे हों।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की रहमत और हिदायत का दामन बहुत वसीअ (विस्तृत) है — जिन्नों को भी उसने क़ुरआन सुनने का शरफ़ दिया और उन्हें भी हिदायत का रास्ता दिखाया। तो हम इंसानों को चाहिए कि हम अल्लाह के इस एहसान का शुक्र अदा करें कि उसने हमें क़ुरआन समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दी, और हम उस दिन की तैयारी करें जब सबको अपने आमाल का हिसाब देना होगा।
📜 आयत 5-9 — सूरा अल-जिन्न
अनुवाद — अल-जिन्न 7
सूरा अल-जिन्न आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये कि जैसा तुम्हारा ख्याल है वैसा उनका भी…सूरा आयत 7/28 — सूरा अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-जिन्न सुनें, सूरा अल-जिन्न अनुवाद, सूरा अल-जिन्न mp3, सूरा अल-जिन्न pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-जिन्न
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


