अल-मुज्जम्मिल · 5/20
अनुवाद उच्चारण — अल-मुज्जम्मिल
إِنَّا سَنُلْقِي عَلَيْكَ قَوْلًا ثَقِيلًا ۝٥
Innaa sanulqee `alika qawalan saqeelaa
📖 हिंदी अर्थ
हम अनक़रीब तुम पर एक भारी हुक्म नाज़िल करेंगे इसमें शक़ नहीं कि रात को उठना
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَنُلْقِي – हम डालेंगे / उतारेंगे (यहाँ अर्थ है ‘हम तुम पर उतारेंगे’)
  • قَوْلًا – बात / वचन (यहाँ अर्थ है ‘क़ुरआन’)
  • ثَقِيلًا – भारी / बोझिल (अर्थात जिसमें गहरे और भारी अर्थ हों)

तफ़सीर:

ऐ नबी! अल्लाह तआला आपको संबोधित करते हुए फ़रमा रहा है कि हम आप पर बहुत जल्द एक ऐसा क़ौल (वचन) उतारेंगे जो अत्यंत भारी और गंभीर है। यह क़ौल कोई साधारण बात नहीं, बल्कि यह क़ुरआन-ए-करीम है — वह किताब जो अपने अंदर पूरी ज़िंदगी का निज़ाम समेटे हुए है। इसमें अल्लाह के आदेश और निषेध हैं, हलाल और हराम की वाज़ेह हदूद हैं, इंसानी ज़िंदगी के हर पहलू के लिए हिदायत है, और आख़िरत की तैयारी का पूरा प्रोग्राम है।

यह ‘भारी’ इसलिए कहा गया कि इसे समझना, इस पर अमल करना, और इसे दूसरों तक पहुँचाना — यह सब एक बड़ी ज़िम्मेदारी है। यह वह किताब है जिसे नाज़िल करने का सिलसिला भी भारी था, और इसके एहकाम पर चलना भी इंसान के लिए संघर्ष और परिश्रम का तक़ाज़ा करता है। मगर यही भारीपन इसकी अज़मत और बरकत की निशानी है — जितना इस पर अमल करोगे, उतनी ही तुम्हारी रूह को राहत और दिल को सुकून मिलेगा।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली दे रहा है कि यह क़ुरआन उतारना हमारी तरफ से है — हम ख़ुद इसकी ज़िम्मेदारी ले रहे हैं। और यही बात हर मोमिन के लिए बशारत है कि जो शख्स क़ुरआन को अपनाएगा, अल्लाह उसे हर मुश्किल में संभालेगा। क़ुरआन का भारी होना उसे छोड़ने का सबब नहीं, बल्कि उसे और गहराई से समझने और उस पर जमकर अमल करने की दावत है। यह वह किताब है जो इंसान को ज़ुल्मात से निकालकर नूर की तरफ ले जाती है, और जो इसे थाम लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।

आओ, हम सब इस भारी अमानत को सीने से लगाएँ, इसे पढ़ें, समझें, और अपनी ज़िंदगी को इसकी रोशनी में ढालें — क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 3-7 — अल-मुज्जम्मिल

3نِّصْفَهُ أَوِ انقُصْ مِنْهُ قَلِيلًا
थोड़ी रात या आधी रात या इससे भी कुछ कम कर दो या उससे कुछ बढ़ा दो
4أَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ الْقُرْآنَ تَرْتِيلًا
और क़ुरान को बाक़ायदा ठहर ठहर कर पढ़ा करो
5إِنَّا سَنُلْقِي عَلَيْكَ قَوْلًا ثَقِيلًا
हम अनक़रीब तुम पर एक भारी हुक्म नाज़िल करेंगे इसमें शक़ नहीं कि रात को उठना
6إِنَّ نَاشِئَةَ اللَّيْلِ هِيَ أَشَدُّ وَطْئًا وَأَقْوَمُ قِيلًا
ख़ूब (नफ्स का) पामाल करना और बहुत ठिकाने से ज़िक्र का वक्त है
7إِنَّ لَكَ فِي النَّهَارِ سَبْحًا طَوِيلًا
दिन को तो तुम्हारे बहुत बड़े बड़े अशग़ाल हैं
अल-मुज्जम्मिलकुरान सूची
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5आयत

अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 5

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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