अल-मुज्जम्मिल · 4/20
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुज्जम्मिल
أَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ الْقُرْآنَ تَرْتِيلًا ۝٤
Aw zid `alaihi wa rattilil Qur`aana tarteela
📖 हिंदी अर्थ
और क़ुरान को बाक़ायदा ठहर ठहर कर पढ़ा करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوْ زِدْ عَلَيْهِ: यानी आधे से बढ़ाकर दो-तिहाई तक कर दो।
  • وَرَتِّلِ الْقُرْآنَ تَرْتِيلًا: कुरान को ठहर-ठहरकर, स्पष्ट और धीरे-धीरे पढ़ो, हर अक्षर और शब्द को साफ़-साफ़ अदा करो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ को नमाज़-ए-तहज्जुद के लिए कह रहा है। पहले फ़रमाया कि आधी रात तक जागो, फिर फ़रमाया कि इस आधे में से थोड़ा कम कर लो या उस पर बढ़ोतरी कर दो, यहाँ तक कि दो-तिहाई तक पहुँच जाओ। यानी अल्लाह ने अपने नबी को इख़्तियार दिया कि जितना आसान हो उतना क़ियाम करें। लेकिन साथ ही एक ज़रूरी हिदायत दी कि जब कुरान पढ़ो तो उसे रट्टे की तरह जल्दी-जल्दी न पढ़ो, बल्कि तरतील के साथ पढ़ो — यानी हर हरफ़ को साफ़ अदा करो, ठहर-ठहरकर पढ़ो, ताकि दिल में उसका असर पैदा हो और समझ आए।

यह तरतील सिर्फ़ नबी ﷺ के लिए नहीं थी, बल्कि हर मुसलमान के लिए यही तरीक़ा है। जब हम कुरान को ठहर-ठहरकर, सोच-समझकर पढ़ते हैं, तो हमारा दिल नरम होता है, आँखों से आँसू निकलते हैं, और अल्लाह से रिश्ता मज़बूत होता है। यही वह तरीक़ा है जिससे कुरान हमारे जीवन को बदल सकता है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयो और बहनों! देखिए अल्लाह ने हम पर रात की नमाज़ फ़र्ज़ नहीं की, लेकिन नबी ﷺ को हुक्म दिया और हमें भी इसकी तरग़ीब दी। रात का वह सन्नाटा, जब दुनिया सोती है, उस वक़्त अल्लाह से बातें करने का लुत्फ़ ही कुछ और है। और जब हम कुरान को तरतील से पढ़ते हैं, तो हर आयत हमारे दिल में उतरती है। यही वह चीज़ है जो हमें अंदर से मज़बूत बनाती है, हमारे ईमान को ताज़ा करती है, और हमें ज़िंदगी की हर मुश्किल का हल देती है। आइए, हम अपनी नमाज़ों में, ख़ासकर तहज्जुद में, कुरान को तरतील के साथ पढ़ने की आदत डालें — यही नबी ﷺ का तरीक़ा है, और यही हमारी कामयाबी की चाबी है।



📜 आयत 2-6 — सूरा अल-मुज्जम्मिल

2قُمِ اللَّيْلَ إِلَّا قَلِيلًا
रात को (नमाज़ के वास्ते) खड़े रहो मगर (पूरी रात नहीं)
3نِّصْفَهُ أَوِ انقُصْ مِنْهُ قَلِيلًا
थोड़ी रात या आधी रात या इससे भी कुछ कम कर दो या उससे कुछ बढ़ा दो
4أَوْ زِدْ عَلَيْهِ وَرَتِّلِ الْقُرْآنَ تَرْتِيلًا
और क़ुरान को बाक़ायदा ठहर ठहर कर पढ़ा करो
5إِنَّا سَنُلْقِي عَلَيْكَ قَوْلًا ثَقِيلًا
हम अनक़रीब तुम पर एक भारी हुक्म नाज़िल करेंगे इसमें शक़ नहीं कि रात को उठना
6إِنَّ نَاشِئَةَ اللَّيْلِ هِيَ أَشَدُّ وَطْئًا وَأَقْوَمُ قِيلًا
ख़ूब (नफ्स का) पामाल करना और बहुत ठिकाने से ज़िक्र का वक्त है
अल-मुज्जम्मिलकुरान सूची
20आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 4

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Monday, September 28, 2026

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