अल-क़ियामा · 25/40
अनुवाद उच्चारण — अल-क़ियामा
تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌ ۝٢٥
Tazunnu any yuf`ala bihaa faaqirah
📖 हिंदी अर्थ
समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَظُنُّ: यहाँ इसका अर्थ "निश्चित रूप से जानना" या "यक़ीन करना" है, न कि संदेह करना।
  • فَاقِرَةٌ: वह आफ़त और मुसीबत जो रीढ़ की हड्डी (फ़क़ार) को तोड़ दे। अरबी में इसे उस दुखद घटना के लिए कहा जाता है जो इंसान की कमर तोड़ दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

क़ियामत के दिन कुछ चेहरे ऐसे होंगे जो उदास, स्याह और मैले होंगे। उन पर दुख और चिंता की परतें साफ़ दिखाई देंगी। ये वे लोग होंगे जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के हुक्मों को नहीं माना और आख़िरत के दिन को झुठलाया। उन्हें पूरा यक़ीन हो चुका होगा कि उन पर एक ऐसी भयानक मुसीबत आने वाली है जो उनकी कमर तोड़ देगी — यानी अल्लाह का अज़ाब और सज़ा जिससे बचने का कोई रास्ता नहीं होगा।

यहाँ "तज़ुन्नु" का अर्थ संदेह नहीं, बल्कि निश्चित ज्ञान और पूर्ण यक़ीन है। यानी उनके दिलों में इस बात का पक्का एहतिमाल और डर बैठ चुका होगा कि अब उनके साथ वह सलूक होने वाला है जो उन्हें हमेशा के लिए बर्बाद कर देगा। यह वही हालत होगी जब इंसान अपने किए पर पछताएगा, लेकिन पछतावे का वक़्त गुज़र चुका होगा।

दीनी पैग़ाम और नसीहत:

यह आयत हमें बताती है कि आज का हर अमल कल के हिसाब का सामान है। जो लोग आज अल्लाह की नाफ़रमानी में जी रहे हैं और आख़िरत को भूल चुके हैं, उनका अंजाम बहुत भयानक होगा। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है — उसने हमें मौका दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी को संवार लें, तौबा कर लें, और उस रास्ते पर चलें जो हमें जन्नत तक पहुँचाए। यह आयत हमें डराती भी है और जगाती भी है — ताकि हम आज ही अपने भविष्य को सुधार लें। क़ियामत का डर हमें गुनाहों से रोके और नेकियों की तरफ ले जाए। अल्लाह हम सबको उस दिन की रुसवाई से बचाए और हमारे चेहरों को रौशन करे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अल-क़ियामा

23إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةٌ
(और) अपने परवरदिगार (की नेअमत) को देख रहे होंगे
24وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ بَاسِرَةٌ
और बहुतेरे मुँह उस दिन उदास होंगे
25تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌ
समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी
26كَلَّا إِذَا بَلَغَتِ التَّرَاقِيَ
सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी
27وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍ
और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है
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अनुवाद — अल-क़ियामा 25

सूरा अल-क़ियामा आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है…

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Tuesday, August 18, 2026

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