अल-क़ियामा · 26/40
अनुवाद उच्चारण — अल-क़ियामा
كَلَّا إِذَا بَلَغَتِ التَّرَاقِيَ ۝٢٦
Kallaaa izaa balaghatit taraaqee
📖 हिंदी अर्थ
सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَرَاقِيَ: "तराक़ी" शब्द "तरक़ुव्वा" का बहुवचन है, जिसका अर्थ है गले के पास की हड्डी, यानी सीने के ऊपरी हिस्से में गर्दन के पास की हड्डियाँ। यह वह स्थान है जहाँ जान निकलते समय साँस अटकती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हरगिज़ नहीं, जैसा कि कुफ़्फ़ार और मुनकिरीन समझते हैं कि मरने के बाद कोई हिसाब नहीं होगा और न ही उन्हें अज़ाब दिया जाएगा। यह उनकी बिल्कुल ग़लत सोच है। जब किसी इंसान की रूह (आत्मा) उसके गले तक पहुँच जाती है और सीने के ऊपरी हिस्से की हड्डियों तक आ जाती है, तो उस वक़्त उसे अपनी मौत का यक़ीन हो जाता है। वहाँ मौजूद लोग एक-दूसरे से कहते हैं: "क्या कोई झाड़-फूँक करने वाला या इलाज करने वाला है जो इसे बचा ले?" लेकिन उस वक़्त न कोई दवा काम आती है और न कोई झाड़-फूँक। इंसान मौत के फ़रिश्तों को देख लेता है और उसे पूरा यक़ीन हो जाता है कि दुनिया से जुदाई का वक़्त आ गया है। उसी घड़ी दुनिया की आख़िरी तकलीफ़ और आख़िरत की पहली तकलीफ़ आपस में मिल जाती हैं, और सब कुछ अल्लाह ही की तरफ़ लौट जाता है। उस दिन हर इंसान का हिसाब होगा, और उसका अंजाम या तो जन्नत होगा या जहन्नम।

दावती पहलू:

यह आयत हमें याद दिलाती है कि मौत की घड़ी कितनी सख्त और भयावह है। आज हम दुनिया के मामलों में इतने मशगूल हैं कि मौत को भूल गए हैं, लेकिन जब रूह गले तक पहुँचेगी, तो न माल-दौलत काम आएगा, न रिश्तेदार, न दोस्त। इसलिए हमें चाहिए कि आज ही अपने आख़िरत के सफ़र की तैयारी कर लें। अल्लाह की रहमत और मग़फिरत का दरवाज़ा अभी खुला है, तौबा कर लें, नेक अमल करें, और ऐसी ज़िंदगी गुज़ारें जो हमें क़यामत के दिन शर्मिंदा न करे। याद रखें, मौत की घड़ी जितनी कठिन है, उसके बाद का हिसाब उससे भी कठिन होगा, लेकिन जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत और उसके रसूल ﷺ की पैरवी करते हैं, उनके लिए उस घड़ी में भी रहमत और सुकून होगा। अल्लाह हम सबको मौत की घड़ी में ईमान की हालत में रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 24-28 — अल-क़ियामा

24وَوُجُوهٌ يَوْمَئِذٍ بَاسِرَةٌ
और बहुतेरे मुँह उस दिन उदास होंगे
25تَظُنُّ أَن يُفْعَلَ بِهَا فَاقِرَةٌ
समझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी
26كَلَّا إِذَا بَلَغَتِ التَّرَاقِيَ
सुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी
27وَقِيلَ مَنْ ۜ رَاقٍ
और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है
28وَظَنَّ أَنَّهُ الْفِرَاقُ
और मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है
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अनुवाद — अल-क़ियामा 26

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Tuesday, August 18, 2026

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