अन-नाज़ियात · 26/46
अनुवाद उच्चारण — अन-नाज़ियात
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰ ۝٢٦
Inna fee zaalika la`ibratal limaiy-yaksha
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जो शख़्श (ख़ुदा से) डरे उसके लिए इस (किस्से) में इबरत है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عِبْرَةً (इबरत): सबक, नसीहत, शिक्षा।
  • يَخْشَى (यख्शा): डरना, खौफ खाना, अल्लाह का भय रखना।

व्याख्या:

अल्लाह तआला इस आयत में फ़िरऔन के अंजाम की ओर इशारा करते हुए फ़रमाता है कि जो कुछ फ़िरऔन के साथ हुआ—उसका अत्याचार, उसका घमंड, उसका "मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूँ" कहना, और फिर उसे समुद्र में डुबोकर उसका अंत करना—यह सब कुछ उन लोगों के लिए एक बड़ी सबक और नसीहत है जो अल्लाह से डरते हैं।

यानी जिसके दिल में अल्लाह का खौफ होता है, वही इन घटनाओं से सीख लेता है। वह देखता है कि जो अल्लाह के आगे सर झुकाने से इनकार करता है और अपने ज़ुल्म में आगे बढ़ता है, उसका अंजाम क्या होता है। फ़िरऔन के पास ताकत थी, सेना थी, साम्राज्य था, लेकिन जब उसने अल्लाह की नाफ़रमानी की, तो उसकी सारी ताकत उसके किसी काम न आई।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की नसीहतें और उसके संकेत हर जगह मौजूद हैं—इतिहास में, क़ुरआन में, और हमारे आस-पास की दुनिया में। लेकिन इनसे फायदा वही उठा सकता है जिसका दिल ज़िंदा हो, जो अल्लाह से डरता हो और उसकी नाराज़गी से बचना चाहता हो।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें आमंत्रित करती है कि हम अपने दिलों में अल्लाह का खौफ पैदा करें। यह खौफ निराशा नहीं है, बल्कि यही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से रोकती है और उसे सीधे रास्ते पर चलाती है। जिस दिल में अल्लाह का डर होता है, वह दिल कभी गुमराह नहीं होता। फ़िरऔन की कहानी सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए आईना है जो घमंड करता है, जो अल्लाह के हुक्म को भूल जाता है, और जो अपनी ताकत पर इतराता है।

आओ, हम इस आयत से सीख लें और अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढालें। याद रखें, अल्लाह का खौफ ही वह चाबी है जो हमें जन्नत के दरवाजे खोलती है और हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचाती है।



📜 आयत 24-28 — अन-नाज़ियात

24فَقَالَ أَنَا رَبُّكُمُ الْأَعْلَىٰ
तो कहने लगा मैं तुम लोगों का सबसे बड़ा परवरदिगार हूँ
25فَأَخَذَهُ اللَّهُ نَكَالَ الْآخِرَةِ وَالْأُولَىٰ
तो ख़ुदा ने उसे दुनिया और आख़ेरत (दोनों) के अज़ाब में गिरफ्तार किया
26إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰ
बेशक जो शख़्श (ख़ुदा से) डरे उसके लिए इस (किस्से) में इबरत है
27أَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ السَّمَاءُ ۚ بَنَاهَا
भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का
28رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّاهَا
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 26

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Tuesday, August 18, 2026

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