अन-नाज़ियात · 27/46
अनुवाद उच्चारण — अन-नाज़ियात
أَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ السَّمَاءُ ۚ بَنَاهَا ۝٢٧
A-antum a shaddu khalqan amis samaa-u banaaha
📖 हिंदी अर्थ
भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَشَدُّ خَلْقًا: अर्थात अधिक कठिन पैदाइश या रचना में अधिक मज़बूत।
  • بَنَاهَا: अर्थात उसे (आसमान को) बनाया, ऊपर उठाया और मज़बूत किया।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों से सवाल कर रहा है जो मरने के बाद दोबारा जीवित होने (आख़िरत) को असंभव समझते हैं। वह फ़रमाता है: "क्या तुम्हारा दोबारा पैदा होना अधिक कठिन है या आसमान का पैदा होना?" यानी जिस अल्लाह ने इतने विशाल, ऊँचे और मज़बूत आसमान को बिना किसी सहारे के खड़ा किया, उसके लिए तुम्हें दोबारा जीवित करना कौन सी मुश्किल काम है? जब वह पहली बार तुम्हें पैदा करने पर क़ादिर था, तो दोबारा पैदा करना उसके लिए और भी आसान है।

फिर अल्लाह आसमान की रचना की महानता बयान करता है कि उसने उसे ऊपर उठाया, उसे एक अद्भुत छत की तरह बनाया, जिसमें कोई दरार नहीं, कोई कमी नहीं। उसने उसकी रात को अंधेरा बनाया और उसके दिन को उजाला दिया। इसके बाद उसने ज़मीन को बिछाया, उसमें पहाड़ों को मज़बूत खूँटों की तरह गाड़ा, उसमें पानी के सोते जारी किए और चरने वाली घास-वनस्पति उगाई — यह सब कुछ तुम्हारे और तुम्हारे जानवरों के फ़ायदे के लिए।

तो जिस अल्लाह ने यह सब कुछ बनाया, क्या वह तुम्हें दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं? हरगिज़ नहीं! यह सब उसके लिए बेहद आसान है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है। जिसने इस विशाल ब्रह्मांड को बनाया, उसके लिए हमारा दोबारा जीवित होना कुछ भी नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की अज़ीमुश्शान क़ुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम आसमान की बुलंदी, उसकी खूबसूरती और उसकी मज़बूती को देखते हैं, तो हमारा ईमान मज़बूत होता है कि जो अल्लाह इतना बड़ा काम कर सकता है, वह हमें दोबारा ज़िंदा करने से कभी आजिज़ नहीं हो सकता। यह हमें आख़िरत की तैयारी की तरफ़ बुलाती है — कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, क्योंकि एक दिन हमें उसी के सामने हाज़िर होना है। यह आयत मोमिन के दिल में अल्लाह की अज़मत का एहसास पैदा करती है और उसे अच्छे आमाल की तरफ़ राग़िब करती है।



📜 आयत 25-29 — अन-नाज़ियात

25فَأَخَذَهُ اللَّهُ نَكَالَ الْآخِرَةِ وَالْأُولَىٰ
तो ख़ुदा ने उसे दुनिया और आख़ेरत (दोनों) के अज़ाब में गिरफ्तार किया
26إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَعِبْرَةً لِّمَن يَخْشَىٰ
बेशक जो शख़्श (ख़ुदा से) डरे उसके लिए इस (किस्से) में इबरत है
27أَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ السَّمَاءُ ۚ بَنَاهَا
भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का
28رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّاهَا
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा
29وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَاهَا
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 27

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Tuesday, August 18, 2026

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