अन-नाज़ियात · 30/46
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नाज़ियात
وَالْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَاهَا ۝٣٠
Wal arda b`ada zaalika dahaaha
📖 हिंदी अर्थ
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • दहा: फैलाना, बिछाना, और निवास के योग्य बनाना।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी कुदरत के उस अज़ीम नमूने का ज़िक्र किया है जो उसने आसमानों की पैदाइश के बाद ज़मीन के साथ किया। जब अल्लाह ने आसमान को बुलंद किया, उसे सजाया और उसमें चाँद-सूरज और सितारों को रौशन किया, तो उसके बाद उसने ज़मीन को दहा किया, यानी उसे फैलाया, बिछाया और उसे रहने के काबिल बनाया। यह ज़मीन गोल होते हुए भी इस तरह फैलाई गई कि उस पर चलना, बसना, खेती करना और तमाम ज़रूरतें पूरी करना आसान हो गया। अल्लाह ने ज़मीन को पालने की तरह नरम और आरामदेह बनाया, उसमें पहाड़ों को मेख़ों की तरह गाड़ा ताकि वह हिले नहीं, उसमें चश्मे जारी किए, नदियाँ बहाईं और तरह-तरह की नबातात (वनस्पतियाँ) उगाईं ताकि इंसान और जानवर सब अपनी रोज़ी हासिल कर सकें।

यह अल्लाह की रहमत और कुदरत का नमूना है कि उसने ज़मीन को सिर्फ पैदा ही नहीं किया, बल्कि उसे हमारे लिए हर तरह से मुनासिब बनाया — उसकी सतह को हमारे क़दमों के लिए सहनशील बनाया, उसकी गहराई में पानी और खज़ाने रखे, और उसकी फ़ज़ा (वायुमंडल) को साँस लेने के लिए मुनासिब बनाया। यह सब कुछ उसने अपनी मेहरबानी से किया, बिना किसी सहारे के, बिना किसी मदद के।

और जब अल्लाह के लिए यह सब कुछ मुमकिन था — आसमान की बुलंदी, ज़मीन की फ़राशी (बिछाना), पहाड़ों की मज़बूती — तो क्या उसके लिए मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करना मुश्किल है? हरगिज़ नहीं! जिसने इतनी बड़ी कायनात को पैदा किया और उसे इस तरह सजाया, उसके लिए इंसानों को दोबारा उठाना बहुत आसान है। यही वह पैग़ाम है जो इस आयत से हमें मिलता है — कि क़यामत का दिन आना हक़ है, और उस दिन अल्लाह हमें ज़िंदा करके उठाएगा, जैसे उसने पहली बार पैदा किया था।

तो ऐ इंसान! ज़मीन पर नज़र डाल — वह कैसे बिछाई गई है, उस पर कैसे पहाड़ गाड़े गए हैं, उसमें कैसे पानी के चश्मे जारी किए गए हैं — और यक़ीन कर कि जिस रब ने यह सब किया, वह तुझे दोबारा ज़िंदा करके उस दिन हाज़िर करेगा जब कोई किसी के काम न आएगा। उस दिन की तैयारी आज ही कर ले, क्योंकि अल्लाह की रहमत और उसकी पकड़ दोनों बहुत क़रीब हैं।



📜 आयत 28-32 — सूरा अन-नाज़ियात

28رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّاهَا
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा
29وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَاهَا
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली
30وَالْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَاهَا
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया
31أَخْرَجَ مِنْهَا مَاءَهَا وَمَرْعَاهَا
उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला
32وَالْجِبَالَ أَرْسَاهَا
और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 30

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Thursday, October 1, 2026

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