Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَغْطَشَ: अंधेरा कर दिया, रात को घुप अंधेरा बना दिया।
- لَيْلَهَا: उस (आसमान) की रात।
- أَخْرَجَ: निकाला, प्रकट किया।
- ضُحَاهَا: उसका दिन का उजाला, सूरज की रोशनी।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने आसमान की रात को अंधेरा बना दिया, यानी जब सूरज डूबता है तो पूरी दुनिया में अंधेरा छा जाता है। और उसी आसमान से उसने दिन का उजाला निकाला, यानी जब सूरज उगता है तो रोशनी फैल जाती है। यह अल्लाह की कुदरत का अज़ीम नमूना है कि वह रात और दिन को बारी-बारी से लाता है। रात का अंधेरा इंसान के लिए सुकून और आराम का ज़रिया है, और दिन का उजाला काम-काज और रोज़ी कमाने का वक़्त है। यह बदलाव अल्लाह के इशारे से होता है, और इसमें उसकी कुदरत की बड़ी निशानियाँ हैं।
अगर हम ग़ौर करें तो यही अल्लाह की ताकत है जो रात को अंधेरा और दिन को रोशन करती है। जिस अल्लाह ने इतने बड़े आसमान को बनाया, उसकी रात को अंधेरा किया और दिन को उजाला दिया, क्या वह मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं? बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है। यह हमारे लिए सबक है कि जिसने इतनी बड़ी कायनात बनाई, उसके लिए हमारा दोबारा ज़िंदा होना बिल्कुल आसान है। इसलिए हमें अपने रब की इबादत करनी चाहिए और उसके दिए हुए इन नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए। यह रात और दिन का बदलना हमें याद दिलाता है कि ज़िंदगी भी ऐसे ही बदलती है — एक दिन मौत आएगी, फिर क़यामत के दिन हम सब दोबारा ज़िंदा होंगे और अपने अमाल का हिसाब देंगे।
📜 आयत 27-31 — सूरा अन-नाज़ियात
अनुवाद — अन-नाज़ियात 29
सूरा अन-नाज़ियात आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया…सूरा आयत 29/46 — सूरा अन-नाज़ियात النازعات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नाज़ियात सुनें, सूरा अन-नाज़ियात अनुवाद, सूरा अन-नाज़ियात mp3, सूरा अन-नाज़ियात pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अन-नाज़ियात
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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