अन-नाज़ियात · 29/46
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नाज़ियात
وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَاهَا ۝٢٩
Wa aghtasha lailaha wa akhraja duhaaha
📖 हिंदी अर्थ
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَغْطَشَ: अंधेरा कर दिया, रात को घुप अंधेरा बना दिया।
  • لَيْلَهَا: उस (आसमान) की रात।
  • أَخْرَجَ: निकाला, प्रकट किया।
  • ضُحَاهَا: उसका दिन का उजाला, सूरज की रोशनी।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने आसमान की रात को अंधेरा बना दिया, यानी जब सूरज डूबता है तो पूरी दुनिया में अंधेरा छा जाता है। और उसी आसमान से उसने दिन का उजाला निकाला, यानी जब सूरज उगता है तो रोशनी फैल जाती है। यह अल्लाह की कुदरत का अज़ीम नमूना है कि वह रात और दिन को बारी-बारी से लाता है। रात का अंधेरा इंसान के लिए सुकून और आराम का ज़रिया है, और दिन का उजाला काम-काज और रोज़ी कमाने का वक़्त है। यह बदलाव अल्लाह के इशारे से होता है, और इसमें उसकी कुदरत की बड़ी निशानियाँ हैं।

अगर हम ग़ौर करें तो यही अल्लाह की ताकत है जो रात को अंधेरा और दिन को रोशन करती है। जिस अल्लाह ने इतने बड़े आसमान को बनाया, उसकी रात को अंधेरा किया और दिन को उजाला दिया, क्या वह मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं? बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है। यह हमारे लिए सबक है कि जिसने इतनी बड़ी कायनात बनाई, उसके लिए हमारा दोबारा ज़िंदा होना बिल्कुल आसान है। इसलिए हमें अपने रब की इबादत करनी चाहिए और उसके दिए हुए इन नेमतों का शुक्र अदा करना चाहिए। यह रात और दिन का बदलना हमें याद दिलाता है कि ज़िंदगी भी ऐसे ही बदलती है — एक दिन मौत आएगी, फिर क़यामत के दिन हम सब दोबारा ज़िंदा होंगे और अपने अमाल का हिसाब देंगे।



📜 आयत 27-31 — सूरा अन-नाज़ियात

27أَأَنتُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَمِ السَّمَاءُ ۚ بَنَاهَا
भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का
28رَفَعَ سَمْكَهَا فَسَوَّاهَا
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा
29وَأَغْطَشَ لَيْلَهَا وَأَخْرَجَ ضُحَاهَا
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली
30وَالْأَرْضَ بَعْدَ ذَٰلِكَ دَحَاهَا
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया
31أَخْرَجَ مِنْهَا مَاءَهَا وَمَرْعَاهَا
उसी में से उसका पानी और उसका चारा निकाला
अन-नाज़ियातकुरान सूची
46आयत
मक्कीअवतरण स्थान
29आयत

अनुवाद — अन-नाज़ियात 29

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Wednesday, September 30, 2026

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