अल-अनफाल · 45/75
अनुवाद उच्चारण — अल-अनफाल
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا لَقِيتُمْ فِئَةً فَاثْبُتُوا وَاذْكُرُوا اللَّهَ كَثِيرًا لَّعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ ۝٤٥
Yaaa aiyuhal lazeena aamanooo izaa laqeetum fi`atan fasbutoo wazkurul laaha kaseeral la`allakum tuflihoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों जब तुम किसी फौज से मुठभेड़ करो तो ख़बरदार अपने क़दम जमाए रहो और ख़ुदा को बहुंत याद करते रहो ताकि तुम फलाह पाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فِئَةً: समूह, यहाँ अर्थ है शत्रुओं का युद्धकारी दल।
  • فَاثْبُتُوا: डटे रहो, स्थिर रहो, पीछे मत हटो।
  • تُفْلِحُونَ: सफल हो जाओ, कामयाबी पाओ।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमानवालों! जब तुम्हारा सामना काफ़िरों के किसी युद्धकारी दल से हो, तो उनके मुक़ाबले में डटे रहो और भागो मत। कायरता और पस्त हिम्मती से बचो। उस समय अल्लाह का बहुत अधिक ज़िक्र करो — दिल से, ज़बान से, और उससे मदद की दुआ करते रहो। याद रखो कि विजय तुम्हारे बल और हथियारों से नहीं, बल्कि अल्लाह की मदद से मिलती है। जब तुम अल्लाह को याद करोगे, उसी पर भरोसा रखोगे और उसी से फ़रियाद करोगे, तो वह तुम्हें शत्रु पर विजय प्रदान करेगा और तुम्हारी सफलता का रास्ता खोल देगा। यह सफलता दुनिया में फ़तह और आख़िरत में जन्नत दोनों रूपों में हो सकती है।

फ़ायदे (उपदेश):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि मुश्किल घड़ी में सब्र और स्थिरता ही सफलता की कुंजी है। घबराना और भागना कभी कामयाबी नहीं देता।
  2. अल्लाह का ज़िक्र सिर्फ़ इबादत नहीं, बल्कि दिल की मज़बूती और हौसले का ज़रिया है। जो अल्लाह को याद रखता है, अल्लाह उसकी मदद करता है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि हर काम में — चाहे वह जिहाद हो या ज़िंदगी का कोई और मैदान — अल्लाह पर भरोसा और उससे दुआ ही असली ताक़त है।
  4. मुसलमानों को एकजुट होकर, बिना डरे, अपने ईमान की हिफ़ाज़त के लिए खड़ा होना चाहिए, और यही इस्लाम की रूह है — अल्लाह की राह में साबित क़दम रहना।


📜 आयत 43-47 — अल-अनफाल

43إِذْ يُرِيكَهُمُ اللَّهُ فِي مَنَامِكَ قَلِيلًا ۖ وَلَوْ أَرَاكَهُمْ كَثِيرًا لَّفَشِلْتُمْ وَلَتَنَازَعْتُمْ فِي الْأَمْرِ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ سَلَّمَ ۗ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
(ये वह वक्त था) जब ख़ुदा ने तुम्हें ख्वाब में कुफ्फ़ार को कम करके दिखलाया था और अगर उनको तुम्हें ज्यादा करते दिखलाता तुम यक़ीनन हिम्मत हार देते और लड़ाई के बारे में झगड़ने लगते मगर ख़ुदा ने इसे (बदनामी) से बचाया इसमें तो शक़ ही नहीं कि वह दिली ख्यालात से वाक़िफ़ है
44وَإِذْ يُرِيكُمُوهُمْ إِذِ الْتَقَيْتُمْ فِي أَعْيُنِكُمْ قَلِيلًا وَيُقَلِّلُكُمْ فِي أَعْيُنِهِمْ لِيَقْضِيَ اللَّهُ أَمْرًا كَانَ مَفْعُولًا ۗ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
(ये वह वक्त था) जब तुम लोगों ने मुठभेड़ की तो ख़ुदा ने तुम्हारी ऑखों में कुफ्फ़ार को बहुत कम करके दिखलाया और उनकी ऑखों में तुमको थोड़ा कर दिया ताकि ख़ुदा को जो कुछ करना मंज़ूर था वह पूरा हो जाए और कुल बातों का दारोमदार तो ख़ुदा ही पर है
45يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا لَقِيتُمْ فِئَةً فَاثْبُتُوا وَاذْكُرُوا اللَّهَ كَثِيرًا لَّعَلَّكُمْ تُفْلِحُونَ
ऐ ईमानदारों जब तुम किसी फौज से मुठभेड़ करो तो ख़बरदार अपने क़दम जमाए रहो और ख़ुदा को बहुंत याद करते रहो ताकि तुम फलाह पाओ
46وَأَطِيعُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَلَا تَنَازَعُوا فَتَفْشَلُوا وَتَذْهَبَ رِيحُكُمْ ۖ وَاصْبِرُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ مَعَ الصَّابِرِينَ
और ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो और आपस में झगड़ा न करो वरना तुम हिम्मत हारोगे और तुम्हारी हवा उखड़ जाएगी और (जंग की तकलीफ़ को) झेल जाओ (क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनन सब्र करने वालों का साथी है
47وَلَا تَكُونُوا كَالَّذِينَ خَرَجُوا مِن دِيَارِهِم بَطَرًا وَرِئَاءَ النَّاسِ وَيَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ ۚ وَاللَّهُ بِمَا يَعْمَلُونَ مُحِيطٌ
और उन लोगों के ऐसे न हो जाओ जो इतराते हुए और लोगों के दिखलाने के वास्ते अपने घरों से निकल खड़े हुए और लोगों को ख़ुदा की राह से रोकते हैं और जो कुछ भी वह लोग करते हैं ख़ुदा उस पर (हर तरह से) अहाता किए हुए है
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीRevelation
45आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 45

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Tuesday, August 18, 2026

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